वैनिक्स टेक्नोलॉजीज़ ने अगले 3 से 5 वर्षों में 10,000 से ज्यादा ईवी चार्जर लगाने का लक्ष्य रखा है। कंपनी एक adaptive charging platform को बढ़ाने पर काम कर रही है, जिसे वाहन तकनीक, ग्रिड की स्थिति और चार्जिंग स्टैंडर्ड्स में होने वाले बदलावों के अनुसार अपडेट किया जा सकता है।
कंपनी के पास फिलहाल तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, दिल्ली और पंजाब में 20 पेड रेजिडेंशियल चार्जर डिप्लॉयमेंट हैं। Vanix के मौजूदा पाइपलाइन के आधार पर निकट अवधि में करीब 1,500 यूनिट्स लगाने का लक्ष्य है। कंपनी की अधिकांश डिप्लॉयमेंट भारत में होंगी, जबकि आगे चलकर मिडिल ईस्ट, साउथईस्ट एशिया और अन्य एक्सपोर्ट मार्केट्स में विस्तार की योजना है।
मौजूदा 20 चार्जर्स ने करीब दो महीनों में लगभग 600 चार्जिंग सेशन पूरे किए हैं। इस दौरान करीब 9,500 kWh बिजली की खपत हुई है और कुल लगभग 2,700 घंटे का चार्जिंग टाइम दर्ज किया गया है।
वैनिक्स टेक्नोलॉजीज़ के को-फाउंडर और सीटीओ डॉ. मुद्दसानी सत्यनारायण के अनुसार, अलग-अलग राज्यों में चार्जर्स की तैनाती कंपनी की रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि पंजाब में किसी घर की बिजली सप्लाई और हैदराबाद के घर की बिजली आपूर्ति की स्थिति अलग हो सकती है।
कंपनी के चार्जर्स का उपयोग टाटा, एमजी, हुंडई, सुज़ुकी, किआ और महिंद्रा के इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ किया जा रहा है। वैनिक्स के अनुसार, अलग-अलग साइट्स की परिस्थितियों और वाहनों के व्यवहार से मिलने वाला डेटा उसके प्रोडक्ट डेवलपमेंट में मदद कर रहा है।
कंपनी का मानना है कि फिक्स्ड assumptions पर आधारित चार्जिंग उपकरण भारत में अलग-अलग परिस्थितियों में सीमित साबित हो सकते हैं। घरों, अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स, ऑफिस और पब्लिक चार्जिंग साइट्स पर ग्रिड क्वालिटी, उपलब्ध इलेक्ट्रिकल क्षमता, साझा लोड और इस्तेमाल का पैटर्न अलग-अलग हो सकता है।
वैनिक्स के अडैप्टिव चार्जिंग प्लेटफ़ॉर्म में डायनामिक लोड बैलेंसिंग दिया गया है। इसके जरिए एक साइट पर मौजूद कई चार्जर्स आपस में कम्युनिकेट कर उपलब्ध इलेक्ट्रिकल क्षमता को बांट सकते हैं। कंपनी के अनुसार, इससे मौजूदा पावर लिमिट के भीतर ज्यादा चार्जर्स को सपोर्ट करने और इलेक्ट्रिकल ओवरलोड के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
कंपनी के इको मोड यूटिलिटी के पीक आवर्स, बिल्डिंग लोड और बिजली की मांग में मौसमी बदलावों को ध्यान में रखते हैं। उदाहरण के लिए, किसी रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स में बिल्डिंग का कुल लोड बढ़ने पर EV चार्जिंग को एडजस्ट किया जा सकता है।
वैनिक्स के प्लेटफॉर्म के केंद्र में AMD Zynq adaptive SoC है। कंपनी के अनुसार, इसे इसलिए चुना गया है ताकि चार्जर बदलते स्टैंडर्ड्स और जरूरतों के अनुसार काम कर सके और हर बदलाव के लिए कंट्रोलर को दोबारा डिजाइन करने की जरूरत न पड़े।
कंपनी के 7.4 kW, 11 kW और 22 kW AC चार्जिंग प्रोडक्ट्स एक common controller का इस्तेमाल करते हैं। Vanix इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहनों के लिए 3 kW से 15 kW तक के DC चार्जिंग समाधान भी विकसित कर रही है।
कंपनी का common-controller architecture भविष्य में Renewable Energy Integration, Battery-Aware Charging और Vehicle-to-Grid (V2G) जैसी सुविधाओं को सपोर्ट करने के लिए तैयार किया गया है।
रिन्यूएबल एनर्जी इंटीग्रेशन (Renewable energy integration) निकट अवधि के संभावित इस्तेमाल में शामिल है। चार्जर घर की बिजली खपत और उपलब्ध सोलर पावर के surplus को समझकर EV की चार्जिंग को एडजस्ट कर सकता है।
Battery-aware charging के लिए वाहन से बैटरी के State of Charge (SoC) की जानकारी मिलना जरूरी है। वैनिक्स (Vanix) के अनुसार, मौजूदा Type 2 AC protocol चार्जर को वाहन की बैटरी का SoC उपलब्ध नहीं कराता। भविष्य में डिजिटल कम्युनिकेशन लेयर के जरिए SoC और target charging time जैसी जानकारी मिलने से चार्जिंग को बेहतर तरीके से शेड्यूल किया जा सकेगा।
वी2जी (V2G) के मामले में कंपनी का कहना है कि उसका कंट्रोलर भविष्य में इस क्षमता को सपोर्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। हालांकि, भारत में इसके लिए वाहन क्षमता और रेगुलेटरी सपोर्ट प्रमुख चुनौतियां हैं।
वैनिक्स (Vanix) अपने ईवीएसई प्लेटफ़ॉर्म (EVSE platform) में एआई (AI) और एनालिटिक्स लेयर (analytics layer) भी विकसित कर रही है। फिलहाल प्लेटफॉर्म में रीयल-टाइम कंट्रोल, टेलीमेट्री, लोड मैनेजमेंट और क्लाउड कनेक्टिविटी जैसी क्षमताएं मौजूद हैं।
कंपनी चार्जिंग, इलेक्ट्रिकल और ऑपरेशनल डेटा का उपयोग predictive maintenance, energy optimisation और intelligent load management जैसे applications के लिए करने की योजना बना रही है।
वैनिक्स के अनुसार, जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक वाहन अधिक software-defined होते जा रहे हैं, वैसे ही EV charging infrastructure को भी अधिक software-driven और adaptable होना होगा।
कनेक्टेड चार्जिंग सिस्टम के बढ़ते इस्तेमाल के साथ cybersecurity पर भी कंपनी का फोकस है। Vanix के अनुसार, इसके approach में secure boot, device identity, protected firmware, trusted execution, encrypted communication, authentication और access control शामिल हैं।
कंपनी के चार्जर्स में secure over-the-air (OTA) updates की क्षमता भी है। इससे deployment के बाद software और firmware को अपडेट किया जा सकता है और बदलती जरूरतों के अनुसार नए functions जोड़े जा सकते हैं।
वैनिक्स का सुझाव है कि ईवी चार्जिंग पॉलिसी में सिर्फ चार्जर्स की संख्या बढ़ाने के बजाय इंटरऑपरेबिलिटी, सिक्योरिटी और एडेप्टेबिलिटी पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। कंपनी ने एसी चार्जर के लिए vehicle battery SoC information, secure boot, signed firmware, secure OTA capability और कम से कम पांच वर्षों तक security patches जैसे प्रावधानों की सिफारिश की है।
वैनिक्स के ईवी चार्जर को भारत में डिजाइन और इंजीनियर किया जाता है। कंपनी का आर्किटेक्चर, कंट्रोलर, फर्मवेयर और क्लाउड प्लेटफ़ॉर्म हैदराबाद में इन-हाउस विकसित किया जाता है, जबकि बड़े पैमाने पर उत्पादन भारतीय electronics manufacturing services (EMS) partners के जरिए किया जाता है।
कंपनी बड़े कैप्टिव मैन्युफैक्चरिंग सुविधाएँ बनाने के बजाय अपने ईएमएस पार्टनर (EMS partners) के जरिए flexible production model अपना रही है। इसके target customers में residential और apartment users, commercial और workplace projects, real estate कंपनियां, distribution partners और Charge Point Operators (CPOs) शामिल हैं।
वैनिक्स का लक्ष्य मौजूदा 20 लाइव चार्जर्स से बढ़कर 10,000 से अधिक deployments तक पहुंचना है। निकट अवधि का 1,500 यूनिट्स का लक्ष्य कंपनी के विस्तार की पहली बड़ी परीक्षा होगी। भारत कंपनी का प्रमुख बाजार बना रहेगा, जबकि आगे मिडिल ईस्ट, साउथईस्ट एशिया और अन्य एक्सपोर्ट मार्केट्स में विस्तार किया जाएगा।