बजट 2026: एडटेक और डिजिटल एडवरटाइजिंग कंपनियां एआई के लिए नीतिगत समर्थन चाहती हैं

बजट 2026: एडटेक और डिजिटल एडवरटाइजिंग कंपनियां एआई के लिए नीतिगत समर्थन चाहती हैं

बजट 2026: एडटेक और डिजिटल एडवरटाइजिंग कंपनियां एआई के लिए नीतिगत समर्थन चाहती हैं
डिजिटल एडवरटाइजिंग से जुड़ी कंपनियां और उद्योग जगत के लीडर्स एआई की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए बजट 2026 से ऐसे नीतिगत उपायों की उम्मीद कर रहे हैं, जो सतत विकास और नवाचार को प्रोत्साहित कर सकें।


डिजिटल क्रांति के इस दौर में शिक्षा और डिजिटल एडवरटाइजिंग से जुड़ी कंपनियां, साथ ही उद्योग जगत के लीडर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए बजट 2026 से ऐसे नीतिगत उपायों की उम्मीद कर रहे हैं जो सतत विकास, कौशल निर्माण और नवाचार को प्रोत्साहित कर सकें। एआई आधारित तकनीकों के तेजी से विस्तार ने न केवल व्यवसाय करने के तरीकों को बदला है, बल्कि शिक्षा, मार्केटिंग और संचार के स्वरूप को भी नया आयाम दिया है।

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार की ओर से स्पष्ट नीतियां, कर ढांचे में पारदर्शिता और तकनीकी बुनियादी ढांचे में निवेश किया जाता है, तो इससे एआई आधारित समाधानों को अपनाने में तेजी आएगी। विशेष रूप से शिक्षा क्षेत्र में, ऐसे उपाय डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म्स को अधिक सुलभ और प्रभावी बना सकते हैं, जिससे युवाओं के कौशल विकास को बल मिलेगा।

इसी तरह डिजिटल एडवरटाइजिंग कंपनियों के लिए एआई नवाचार को बढ़ावा देने वाली नीतियां डेटा विश्लेषण, उपभोक्ता अनुभव और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति को मजबूत कर सकती हैं। कुल मिलाकर बजट 2026 से उद्योग को यह अपेक्षा है कि वह एआई के माध्यम से दीर्घकालिक विकास की नींव रखे और भारत को ज्ञान व तकनीक आधारित अर्थव्यवस्था की ओर और तेज़ी से आगे बढ़ाए।

बजट 2026 के नजदीक आने के साथ डिजिटल शिक्षा और विज्ञापन क्षेत्रों के हितधारक अपनी प्राथमिकताओं और नीतिगत समर्थन की उम्मीदों को व्यक्त कर रहे हैं। एआई-संचालित प्लेटफार्मों को तेजी से अपनाना और उपभोक्ताओं की बदलती अपेक्षाएं इन उद्योगों की दिशा तय कर रही हैं।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित भाषा शिक्षण और डिजिटल शिक्षा से जुड़ी अपेक्षाएं

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित भाषा शिक्षण और डिजिटल शिक्षा को लेकर अपेक्षाएं लगातार बढ़ रही हैं। एआई तकनीक ने सीखने के पारंपरिक तरीकों को बदलते हुए शिक्षा को अधिक व्यक्तिगत, सुलभ और प्रभावी बना दिया है। भाषा शिक्षण के क्षेत्र में एआई आधारित प्लेटफ़ॉर्म विद्यार्थियों की सीखने की गति, उच्चारण, शब्दावली और व्याकरण की कमजोरियों को पहचानकर उसी के अनुरूप कंटेंट प्रदान कर रहे हैं, जिससे सीखने की प्रक्रिया अधिक परिणामोन्मुख बनती जा रही है।

SpeakX.ai के फाउंडर और सीईओ अर्पित मित्तल के अनुसार, भारत में भाषा सीखने के क्षेत्र में हाल के वर्षों में बड़े और महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं। उनका कहना है कि वर्ष 2025 में देशभर में एआई-आधारित भाषा शिक्षण को व्यापक स्तर पर अपनाया गया, जिसमें लाखों शिक्षार्थियों ने इन तकनीकी उपकरणों का उपयोग किया। खास तौर पर तेलुगु, तमिल, मराठी और बंगाली भाषी क्षेत्रों से आने वाले लोगों में अपनी अंग्रेजी भाषा क्षमता को बेहतर बनाने के लिए इन प्लेटफॉर्म्स की लोकप्रियता तेज़ी से बढ़ी है।

अर्पित मित्तल के मुताबिक, इनमें से कई शिक्षार्थियों के लिए अंग्रेजी सीखना केवल व्यक्तिगत विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बेहतर रोजगार और उच्च शिक्षा के नए अवसरों के द्वार खोलने का माध्यम बन गया है। एआई-आधारित भाषा सीखने के समाधान न केवल सीखने की प्रक्रिया को आसान और सुलभ बना रहे हैं, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों में मौजूद कौशल अंतर को पाटने में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं।

मित्तल ने कहा "जैसे-जैसे 2026 का केंद्रीय बजट नजदीक आ रहा है, यह क्षेत्र डिजिटल शिक्षा और उच्च गुणवत्ता वाली क्षेत्रीय सामग्री के निर्माण के लिए स्पष्ट समर्थन की उम्मीद कर रहा है, ताकि ये प्लेटफॉर्म देश के सबसे दूरस्थ हिस्सों तक भी पहुंच सकें। यह भी उम्मीद है कि सरकार कनेक्टिविटी में कमियों को दूर करेगी और कम सेवा वाले क्षेत्रों में ऑनलाइन कौशल-निर्माण पहलों को प्रोत्साहित करेगी।"

एजुकेशन टेक्नोलॉजी और रोजगार क्षमता के लिए नीतिगत समर्थन

व्यापक नीतिगत ध्यान की यह मांग इस आवश्यकता को रेखांकित करती है कि एजुकेशन टेक्नोलॉजी को और अधिक सुलभ बनाया जाए। एआई-आधारित शिक्षण प्लेटफ़ॉर्म्स के लिए लक्षित समर्थन को संचार मानकों को बेहतर बनाने और देशभर में मौजूद रोजगार अंतर को पाटने के एक प्रभावी माध्यम के रूप में देखा जा रहा है। एजुकेशन के अलावा डिजिटल विज्ञापन उद्योग के लीडर्स राजकोषीय नीति से जुड़े परिवर्तनों की भी उम्मीद कर रहे हैं।

AdSocial.ai के सीईओ मन मोहित ने कर सुधारों के संभावित प्रभाव पर टिप्पणी करते हुए कहा "बजट 2026 के नजदीक आने के साथ, कराधान को सरल बनाने और व्यय योग्य आय बढ़ाने पर जोर देने से उपभोक्ता व्यवहार और डिजिटल खर्च के पैटर्न पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। डिजिटल विज्ञापन प्रणाली के लिए, मामूली कर सुधार भी, जिससे उपभोक्ता की आय में वृद्धि हो, ई-कॉमर्स, स्थानीय सेवाओं और उभरते ऑनलाइन बाजारों में मजबूत मांग में तब्दील हो सकता है।" उन्होंने आगे बताया "इस परिवेश में एआई-संचालित प्लेटफॉर्म ब्रांडों को लक्षित निवेश को अनुकूलित करने, निवेश पर लाभ को प्रभावी ढंग से मापने और उपभोक्ताओं की बदलती प्राथमिकताओं के अनुकूल होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे और भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में नवाचार और सतत विकास को भी मजबूत करेगी।"

दूसरे शब्दों में जैसे-जैसे नीति निर्माता बजट 2026 को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, एडटेक और विज्ञापन तकनीकी क्षेत्र से व्यावहारिक और दूरदर्शी नीतिगत उपायों की मांग तेज़ हो रही है। उद्योग जगत के लीडर्स का मानना है कि डिजिटल शिक्षा को उचित समर्थन, कर ढांचे में स्पष्टता और बुनियादी ढांचे में संतुलित निवेश के माध्यम से भारत न केवल अपने कार्यबल के कौशल को सशक्त बना सकता है, बल्कि डिजिटल उपभोग को भी और अधिक मजबूत कर सकता है।

Subscribe Newsletter
Submit your email address to receive the latest updates on news & host of opportunities