आज के दौर में रेस्टोरेंट की स्केलेबिलिटी केवल नए आउटलेट खोलने तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह एक दोहराए जा सकने वाले, टेक-इनेबल्ड और वित्तीय रूप से मजबूत ब्रांड बनाने पर केंद्रित है।
स्केलेबिलिटी का मतलब है कि कोई रेस्टोरेंट बिना लागत को उसी अनुपात में बढ़ाए, कई यूनिट्स में अपनी सफलता को दोहरा सके, समान गुणवत्ता बनाए रखे और राजस्व में वृद्धि करे। इसमें मानकीकृत ऑपरेशंस, मजबूत सिस्टम, एकसमान संस्कृति और मापने योग्य परफॉर्मेंस ट्रैकिंग शामिल है। भारत का रेस्टोरेंट बाजार 2030 तक 100 अरब डॉलर से अधिक तक पहुंचने का अनुमान है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में हर महीने 1,000–2,000 नए रेस्टोरेंट खुलते हैं, लेकिन ऊंची लागत और तीव्र प्रतिस्पर्धा के कारण बड़ी संख्या में रेस्टोरेंट बंद भी हो जाते हैं। ऐसे में, आज के समय में लीडिंग रेस्टोरेंट ब्रांड्स इस तरह स्केल कर रहे हैं:
सांस्कृतिक प्रासंगिकता और अनुभव-आधारित पहचान
2026 में रेस्टोरेंट स्केलेबिलिटी इस बात से तय होगी कि कोई ब्रांड सांस्कृतिक रूप से कितना प्रासंगिक है और ग्राहकों के मन में अनुभव-आधारित पहचान कितनी मजबूत बना पाता है, न कि सिर्फ आउटलेट्स की संख्या से।
पवन शाहरी, CEO और Co-Founder, Chrome Asia Hospitality, ने कहा,“हमारा फोकस ऐसे फॉर्मेट बनाने पर रहा है जिन्हें ब्रांड्स, कंज्यूमर्स और कोलैबोरेटर्स अनुभवात्मक नाइटलाइफ और बार कल्चर के बेंचमार्क के रूप में देखें। अब हम इसी विज़न को अपने नए कॉकटेल बार Late Checkout के जरिए आगे बढ़ा रहे हैं।”
उन्होंने बताया कि Late Checkout के पहले साल के पूरा होने से पहले ही, ब्रांड ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 10 से अधिक बार टेकओवर सफलतापूर्वक किए हैं।
वैश्विक स्तर पर विस्तार
2026 में Massive Restaurants के लिए स्केलेबिलिटी का आधार है कुलिनरी क्रिएटिविटी और ऑपरेशनल डिसिप्लिन के बीच संतुलन। भारत के करीब 25–30% रेस्टोरेंट ब्रांड्स अमेरिका, यूएई, यूके और सऊदी अरब जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहचान बना चुके हैं।
ज़ोरावर कलरा, Founder & Managing Director, Massive Restaurants Pvt Ltd, ने कहा,“हमारे लिए Farsi Café से लेकर Pa PaYa तक किसी भी ब्रांड को ग्लोबल स्तर पर स्केल करने का मतलब है कि लंदन हो या मुंबई, गेस्ट एक्सपीरियंस हर जगह एक जैसा रहे।”
विकास की नींव एक सिस्टमेटिक किचन हायरार्की पर टिकी होती है। करीब 25–30% फोकस ऑपरेशंस को स्टैंडर्डाइज करने पर होना चाहिए।
तिमांशु मोकल, Co-Founder, Amelia, One BKC, ने कहा,“हमारी शुरुआती सीख यह रही कि मानकीकृत सिस्टम जरूरी हैं, लेकिन तभी जब वे ग्राउंड रियलिटी के अनुसार बनाए जाएं। किचन प्रेप फ्लो और सर्विस हैंडओवर को मजबूत करने से न सिर्फ एफिशिएंसी बढ़ी, बल्कि पीक ऑवर्स में तनाव कम हुआ और गेस्ट एक्सपीरियंस ज्यादा कंसिस्टेंट हुआ।”
रेवेन्यू स्ट्रीम्स का विविधीकरण
स्केलेबिलिटी के लिए रेवेन्यू स्ट्रीम्स का डाइवर्सिफिकेशन भी बेहद अहम है।फिनो फ्रैंगलिन, Co-Founder, Mykos Craft Kitchen & Bar, के अनुसार, फूड और बेवरेज सेल्स के अलावा इन-हाउस डेज़र्ट कैफे, फोटोबूथ जैसे एक्सपीरियेंशियल एलिमेंट्स और इवेंट-आधारित एक्टिवेशन्स अतिरिक्त मासिक रेवेन्यू पैदा करते हैं और यूनिट इकनॉमिक्स को मजबूत बनाते हैं।
वहीं, Chrome Asia Hospitality में भले ही रेवेन्यू का मुख्य स्रोत फूड और बेवरेज ऑपरेशंस हों, लेकिन ग्लोबल बार टेकओवर को ब्रांड-बिल्डिंग स्ट्रैटेजी के तौर पर देखा जाता है। शाहरी ने कहा,
“Late Checkout के जरिए हमने नाइटलाइफ और बार कल्चर में ग्लोबल एक्सचेंज, कोलैबोरेशन और इनोवेशन का एक प्लेटफॉर्म तैयार किया है।”
स्केलिंग की जल्दबाज़ी नहीं
आज स्केलेबिलिटी केवल आंकड़ों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि ऑडियंस एलाइन्मेंट, फ्लेक्सिबल फॉर्मेट्स, मजबूत बेवरेज प्रोग्राम्स और सांस्कृतिक रूप से प्रासंगिक स्टोरीटेलिंग पर भी निर्भर करती है।
करीब 55–65% ब्रांड्स एक साल बाद स्केल करते हैं, जबकि 10–15% ब्रांड्स पहले ही साल में विस्तार करते हैं, जिनमें से लगभग 50% का फोकस टियर-1 शहरों पर होता है।
वर्तमान में टियर-2, टियर-3 और टियर-4 शहरों में भी तेज़ी से वृद्धि हो रही है, जहां 30–35% ब्रांड्स अपना फोकस बढ़ा रहे हैं।
शाहरी का मानना है कि जो रेस्टोरेंट सफलतापूर्वक स्केल करेंगे, वे सिर्फ वेन्यू नहीं बल्कि एक्सपीरियंस-लेड ब्रांड्स के रूप में काम करेंगे। हालांकि, जो 10–15% ब्रांड्स पहले साल में विस्तार करते हैं, उनमें से बहुत कम ही स्थिरता और टिकाऊपन हासिल कर पाते हैं।
स्टाफिंग और संस्कृति
किसी भी ब्रांड की असली ग्रोथ इंजन उसके लोग होते हैं।
ज़ोरावर कलरा ने कहा,“हम ‘कुलिनरी एक्सीलेंस’ की संस्कृति विकसित करते हैं, जहां हर टीम मेंबर ब्रांड स्टैंडर्ड्स का संरक्षक होता है।”
स्पष्ट ग्रोथ पाथ और संरचित माहौल कर्मचारियों को गर्व और सटीकता के साथ काम करने के लिए प्रेरित करता है।
रेस्टोरेंट इंडस्ट्री में हाई एट्रिशन एक बड़ी चुनौती है, जो सीधे ऑपरेशंस और गेस्ट सैटिस्फैक्शन को प्रभावित करती है।
फ्रैंगलिन ने भी इस बात पर जोर दिया कि ट्रेनिंग, एम्पावरमेंट और रिकॉग्निशन के जरिए पॉजिटिव वर्क कल्चर बनाना टैलेंट रिटेंशन और सस्टेनेबल स्केल के लिए जरूरी है।
टेक्नोलॉजी की ताकत
रिपोर्ट्स के अनुसार, रेस्टोरेंट्स अपने काम को आसान बनाने के लिए 25–30% निवेश टेक्नोलॉजी पर करते हैं, जिससे समय की बचत होती है।
फ्रैंगलिन ने कहा,“रेस्टोरेंट्स POS सिस्टम, इन्वेंट्री मैनेजमेंट, डेटा एनालिटिक्स और ऑटोमेशन में निवेश कर रहे हैं, जिससे बेहतर निर्णय और कम मैनुअल एरर्स संभव हो पाते हैं।”
अमित गोयल, Founder & Managing Director, Tokki & Tora, ने बताया,“रेस्टोरेंट्स अपने करीब 60–70% संसाधन क्लाउड-बेस्ड POS सिस्टम, AI-ड्रिवन कस्टमर सर्विस प्लेटफॉर्म और स्मार्ट किचन मैनेजमेंट टूल्स में लगा रहे हैं, जिससे ऑपरेशंस बेहतर होते हैं, कस्टमर एक्सपीरियंस सुधरता है और प्रॉफिटेबिलिटी बढ़ती है।”
हालांकि, तिमांशु मोकल ने एक अहम पहलू की ओर ध्यान दिलाया,“डैशबोर्ड ट्रेंड्स दिखा सकता है, लेकिन यह फ्लोर मैनेजर ही होता है जो जानता है कि कब किसी टेबल को थोड़ी देर और होल्ड करना है या सर्विस की रफ्तार बदलनी है।”
स्केलेबिलिटी के लिए स्ट्रैटेजिक ग्रोथ प्लानिंग और वित्तीय तैयारी जरूरी है, जिसमें लागत, लाभप्रदता और निवेश पर रिटर्न की स्पष्ट समझ हो, ताकि विस्तार टिकाऊ और सफल बन सके।