एवर्सोर्स कैपिटल की इलेक्ट्रिक बस इकाई ग्रीनसेल मोबिलिटी ने इंटरनेशनल फाइनेंस कॉरपोरेशन (IFC), ब्रिटिश इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट (BII) और टाटा कैपिटल से 89 मिलियन अमेरिकी डॉलर की मेज़ानाइन फाइनेंसिंग हासिल की है। यह नई पूंजी कंपनी के इलेक्ट्रिक बस परिचालन के अगले चरण के विस्तार को समर्थन देने के लिए जुटाई गई है।
मेज़ानाइन फाइनेंसिंग, जिसमें ऋण और इक्विटी दोनों के तत्व शामिल होते हैं, का उपयोग अब तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर और क्लीन मोबिलिटी कंपनियों द्वारा किया जा रहा है, ताकि वे बड़े पैमाने पर विकास के लिए पूंजी जुटा सकें और साथ ही तुरंत और बड़े इक्विटी डाइल्यूशन से बच सकें।
ग्रीनसेल मोबिलिटी इस पूंजी का उपयोग अपने इलेक्ट्रिक बस बेड़े को मौजूदा 1,200 से अधिक बसों से बढ़ाकर 3,700 बसों तक ले जाने के लिए करेगी। इस विस्तार के तहत दिल्ली, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, बिहार और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में इंट्रा-सिटी रूट्स के लिए प्रतिस्पर्धी निविदाओं के माध्यम से हासिल की गई बसों को शामिल किया जाएगा।
ये निविदाएं राष्ट्रीय ई-बस कार्यक्रम और पीएम सेवा ई-मोबिलिटी पहल के अंतर्गत आयोजित की गई थीं, जिनका उद्देश्य भारतीय शहरों में इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन को तेजी से अपनाने को बढ़ावा देना है।
यह ताज़ा फंडिंग राउंड ऐसे समय में आया है जब कुछ महीने पहले ही IFC ने ग्रीनसेल मोबिलिटी में 37 मिलियन अमेरिकी डॉलर का मेज़ानाइन निवेश करने की घोषणा की थी। इसके अलावा, IFC ने JBM ईकोलाइफ में 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर की अलग प्रतिबद्धता भी जताई है, जिसका उद्देश्य देश के 39 नगर निकायों में इलेक्ट्रिक बसों और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की तैनाती को समर्थन देना है।
ग्रीनसेल मोबिलिटी के लिए इस फंडिंग राउंड पर टिप्पणी करते हुए एवरस्टोन ग्रुप के वाइस चेयरमैन और एवरसोर्स कैपिटल के सीईओ धनपाल झावेरी ने कहा “इस निवेश के माध्यम से हम IFC, ब्रिटिश इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट (BII) और टाटा कैपिटल जैसे सतत निवेश के अग्रणी संस्थानों के साथ अपनी साझेदारी को और गहरा कर रहे हैं। यह लेनदेन इस बात का उदाहरण है कि निजी, विकासात्मक और संस्थागत पूंजी किस तरह मिलकर भारत की स्वच्छ परिवहन क्रांति को तेज़ी से आगे बढ़ा सकती है।”
हाल के समय में इलेक्ट्रिक बस सेगमेंट में निवेशकों की गतिविधियां तेज़ हुई हैं। अक्टूबर में EKA मोबिलिटी ने नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (NIIF) के तहत संचालित इंडिया-जापान फंड से 500 करोड़ रुपये जुटाए थे। इसके अलावा, जून में कंपनी ने प्राइवेट इक्विटी फर्म ENAM होल्डिंग्स से अतिरिक्त 200 करोड़ रुपये की पूंजी भी हासिल की थी। वहीं, जेबीएम ऑटो ने भी अपनी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पहलों को समर्थन देने के लिए पूंजी जुटाई है।
IFC की एशिया और पैसिफिक क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर और नेचुरल रिसोर्सेज की रीजनल इंडस्ट्री मैनेजर कैथरीन कोह ने कहा “बसों का विद्युतीकरण भारत के शहरी परिवर्तन एजेंडे का एक केंद्रीय हिस्सा है और ग्रीनसेल मोबिलिटी में हमारा मेज़ानाइन निवेश टिकाऊ सार्वजनिक परिवहन को तेज़ी से आगे बढ़ाने में मदद करेगा।”
भारतीय इलेक्ट्रिक बस बाजार में ग्रीनसेल मोबिलिटी की प्रतिस्पर्धा ओलेक्ट्रा ग्रीनटेक, जेबीएम ईकोलाइफ, EKA मोबिलिटी, स्विच मोबिलिटी इंडिया, टाटा मोटर्स इलेक्ट्रिक और अशोक लीलैंड जैसी कंपनियों से है।