Transition VC लाएगा ₹1,500 करोड़ का नया फंड, 20 इंजीनियरिंग स्टार्टअप्स में करेगा निवेश

Transition VC लाएगा ₹1,500 करोड़ का नया फंड, 20 इंजीनियरिंग स्टार्टअप्स में करेगा निवेश

Transition VC लाएगा ₹1,500 करोड़ का नया फंड, 20 इंजीनियरिंग स्टार्टअप्स में करेगा निवेश
ऊर्जा परिवर्तन (Energy Transition) क्षेत्र पर केंद्रित वेंचर कैपिटल फर्म Transition VC ने ₹1,500 करोड़ के लक्ष्य (Target Corpus) के साथ अपने Fund II की शुरुआत की है।


इस फंड के माध्यम से कंपनी अगले चार वर्षों में लगभग 20 इंजीनियरिंग-आधारित (Engineering-led) स्टार्टअप्स में 20 से 50 लाख अमेरिकी डॉलर (USD 2–5 Million) तक का निवेश करेगी। निवेश की प्रक्रिया वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) की तीसरी तिमाही (Q3) से शुरू होगी।

Fund II की शुरुआत कंपनी के Fund I की सफलता के बाद की गई है। Transition VC का पहला फंड ₹723 करोड़ पर बंद हुआ था, जो इसके शुरुआती ₹400 करोड़ के लक्ष्य से काफी अधिक था।

कंपनी के अनुसार, Fund I ने केवल तीन वर्षों में 57% आंतरिक प्रतिफल दर (IRR) हासिल की और निवेश पर 3 गुना से अधिक रिटर्न (MOI) दिया। इसके अलावा, फंड का अब तक कोई भी निवेश घाटे (Write-off) में नहीं गया है। पोर्टफोलियो में शामिल कई स्टार्टअप्स लाभदायक (Profitable) बन चुके हैं, उन्हें आगे की फंडिंग भी मिली है और वे ₹100 करोड़ से अधिक के वार्षिक राजस्व की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

Transition VC ने बताया कि वह पारंपरिक तरीके से केवल आने वाले निवेश प्रस्तावों (Inbound Deal Flow) पर निर्भर नहीं रहता। कंपनी थीसिस-आधारित (Thesis-led) निवेश रणनीति अपनाती है, जिसके तहत विभिन्न औद्योगिक वैल्यू चेन का विश्लेषण कर नए अवसरों की पहचान की जाती है। इसके बाद संभावनाशील कंपनियों का चयन किया जाता है।

कंपनी की टीम वैश्विक उद्योग विशेषज्ञों के साथ मिलकर यह समझती है कि कौन-सी तकनीकें दुनिया में सफल या असफल रही हैं। साथ ही, वैश्विक बौद्धिक संपदा (IP) फाइलिंग, उभरती तकनीकों और AI-आधारित विश्लेषण की मदद से उन स्टार्टअप्स की पहचान की जाती है जो महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग चुनौतियों का समाधान विकसित कर रहे हैं।

Transition VC के, को-फाउंडर और मैनेजिंग पार्टनर राय्यान शिंगटी ने कहा कि दुनिया तेजी से ऊर्जा उत्पादन और खपत के तरीके बदल रही है। हाल के भू-राजनीतिक घटनाक्रमों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) अब ऊर्जा स्थिरता (Energy Sustainability) जितनी ही महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि भारत अपने विशाल घरेलू बाजार, मजबूत इंजीनियरिंग प्रतिभा और किफायती विनिर्माण क्षमता के कारण इस बदलाव का नेतृत्व करने की स्थिति में है।

उन्होंने बताया कि Fund I की सफलता ने कंपनी की निवेश रणनीति को सही साबित किया है। अब Fund II के जरिए कंपनी Advanced Manufacturing, Semiconductor, Geothermal और Nuclear Value Chain जैसे नए क्षेत्रों में निवेश कर अपनी सफलता को दोहराने का लक्ष्य रखती है।


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