इन प्रयोगशालाओं के माध्यम से छात्रों और शोधकर्ताओं को भविष्य की अत्याधुनिक तकनीकों में प्रशिक्षण, अनुसंधान और नवाचार के अवसर उपलब्ध होंगे।
ये प्रयोगशालाएं इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की इलेक्ट्रॉनिक्स और आईसीटी अकादमिक परियोजना के तहत स्थापित की जाएंगी। इनका उद्देश्य क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन, क्वांटम कंप्यूटिंग सिमुलेशन, क्वांटम सेंसिंग हार्डवेयर तथा सुरक्षित संचार प्रणालियों के क्षेत्र में स्वदेशी क्षमताओं का विकास करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारत को क्वांटम प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
संस्थान में आयोजित कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा गया कि वर्तमान समय में तकनीकी परिवर्तन की सबसे बड़ी शक्ति आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) है, लेकिन आने वाले वर्षों में क्वांटम प्रौद्योगिकी अगली बड़ी तकनीकी क्रांति का आधार बनेगी। क्वांटम संचार और पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी जैसे क्षेत्र न केवल डिजिटल सुरक्षा बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
संस्थान को पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। यह तकनीक भविष्य के शक्तिशाली क्वांटम कंप्यूटरों से उत्पन्न साइबर सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए विकसित की जा रही है और आने वाले समय में इसकी मांग तेजी से बढ़ने की संभावना है।
छात्रों को मिलेगा सेमीवर्स प्लेटफॉर्म पर प्रशिक्षण
कार्यक्रम के दौरान यह भी बताया गया कि एमएनआईटी जयपुर के विद्यार्थियों को लैम रिसर्च के सेमीवर्स (Semiverse) प्लेटफॉर्म पर प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। यह डिजिटल ट्विन आधारित सेमीकंडक्टर निर्माण और प्रशिक्षण प्रणाली है, जिसके माध्यम से छात्र 3डी वातावरण में चिप डिजाइन और निर्माण प्रक्रियाओं को समझ सकेंगे।
सेमीवर्स प्लेटफॉर्म विद्यार्थियों को सेमीकंडक्टर चिप संरचनाओं का विस्तृत अध्ययन करने, निर्माण प्रक्रियाओं का आभासी अनुकरण करने और उद्योग की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप तकनीकी कौशल विकसित करने में मदद करेगा। इससे छात्रों को आधुनिक सेमीकंडक्टर उद्योग की कार्यप्रणाली को समझने का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा।
उद्योग जगत के अनुमानों के अनुसार आने वाले वर्षों में 10 लाख से अधिक सेमीकंडक्टर डिजाइन पेशेवरों की आवश्यकता होगी। वर्तमान में एनवीडिया, क्वालकॉम, एआरएम और एएमडी जैसी वैश्विक कंपनियां भारत में 2 और 3 नैनोमीटर तकनीक पर आधारित उन्नत सेमीकंडक्टर चिप्स के डिजाइन पर काम कर रही हैं। इसे भारत में उपलब्ध कुशल तकनीकी प्रतिभा का परिणाम माना जा रहा है।
323 से अधिक विश्वविद्यालयों को मिल रहे अत्याधुनिक डिजाइन टूल
सरकार के चिप्स टू स्टार्टअप (C2S) कार्यक्रम के तहत देशभर के 323 से अधिक विश्वविद्यालयों को उन्नत इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (EDA) उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इनमें सिनॉप्सिस, कैडेंस और रेनेसास जैसी अग्रणी वैश्विक कंपनियों के सेमीकंडक्टर डिजाइन टूल शामिल हैं।
इन संसाधनों का उपयोग करते हुए देशभर के विद्यार्थियों द्वारा डिजाइन किए गए 100 से अधिक चिप्स का निर्माण मोहाली स्थित सेमीकंडक्टर प्रयोगशाला में किया जा चुका है। विद्यार्थियों को इन सुविधाओं का अधिकतम उपयोग कर नवाचार और अनुसंधान को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया।
MNIT में बनेगी अत्याधुनिक AI लैब
क्वांटम प्रयोगशालाओं के साथ-साथ संस्थान में एक आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लैब भी स्थापित की जाएगी। इस लैब में अनुसंधान और नवाचार के लिए उन्नत कंप्यूटिंग सुविधाएं तथा आधुनिक उपकरण उपलब्ध होंगे। इसे IndiaAI मिशन नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, जिससे छात्रों और शोधकर्ताओं को राष्ट्रीय स्तर के एआई संसाधनों और तकनीकी सहयोग का लाभ मिलेगा।
इस दौरान भारत में विकसित हो रही डीपफेक डिटेक्शन तकनीकों और एआई आधारित नवाचारों का भी उल्लेख किया गया, जो देश में कृत्रिम बुद्धिमत्ता अनुसंधान को नई दिशा दे रहे हैं।
मेकर्स लैब से मिलेगा व्यावहारिक अनुभव
कार्यक्रम के दौरान एमएनआईटी जयपुर में मेकर्स लैब का भी उद्घाटन किया गया। यह लैब विद्यार्थियों को सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर दोनों क्षेत्रों में व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करेगी। इसमें सेंसर, एम्बेडेड सिस्टम, कंप्यूटर उपकरणों और इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों से संबंधित तकनीकों पर काम करने की सुविधा उपलब्ध होगी।
मेकर्स लैब का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रखते हुए उन्हें वास्तविक परियोजनाओं पर कार्य करने और नवाचार विकसित करने के अवसर प्रदान करना है। इससे छात्रों की तकनीकी दक्षता और उद्योग के लिए उनकी तैयारी को मजबूती मिलेगी।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, ड्रोन तकनीक, स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग और पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं और नवाचारों का प्रदर्शन किया। इन प्रस्तुतियों ने यह दर्शाया कि देश के तकनीकी संस्थानों में भविष्य की उभरती तकनीकों पर शोध और नवाचार को तेजी से बढ़ावा मिल रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि क्वांटम, एआई और सेमीकंडक्टर जैसी उन्नत तकनीकों में निवेश और प्रशिक्षण सुविधाओं का विस्तार भारत को वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। MNIT जयपुर में स्थापित होने वाली ये नई प्रयोगशालाएं छात्रों को भविष्य की तकनीकों के लिए तैयार करने के साथ-साथ देश के अनुसंधान एवं नवाचार पारितंत्र को भी मजबूत करेंगी।