भारत की ऊर्जा सुरक्षा और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) उद्योग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए N.A.N. GreenMet और बेल्जियम स्थित हाइड्रोमेटलर्जिकल प्रोसेसिंग कंपनी सिलॉक्स ग्रुप (Silox Group) ने एन.ए.एन. सिलॉक्स ग्रीनमेट प्राइवेट लिमिटेड (N.A.N. Silox GreenMet Pvt. Ltd.) नामक 50:50 संयुक्त उद्यम (JV) के गठन की घोषणा की है। यह साझेदारी भारत में अत्याधुनिक लिथियम-आयन बैटरी रिसाइक्लिंग और क्रिटिकल मिनरल्स रिकवरी प्लेटफॉर्म स्थापित करेगी।
नई कंपनी का उद्देश्य इस्तेमाल हो चुकी ईवी बैटरियों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और एनर्जी स्टोरेज सिस्टम से लिथियम, कोबाल्ट, निकेल और मैंगनीज जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति कर भारत की आयात निर्भरता को कम करना है। इस परियोजना के तहत आंध्र प्रदेश में एक अत्याधुनिक औद्योगिक संयंत्र स्थापित किया जाएगा, जहां बैटरियों की श्रेडिंग, बेनिफिशिएशन और हाइड्रोमेटलर्जिकल रिफाइनिंग के माध्यम से मूल्यवान धातुओं को पुनः प्राप्त किया जाएगा।
परियोजना को दो चरणों में विकसित किया जाएगा। अंतिम चरण में संयंत्र की क्षमता प्रति वर्ष 40,000 टन बैटरी श्रेडिंग और 20,000 टन हाइड्रोमेटलर्जिकल प्रोसेसिंग तक पहुंचाने का लक्ष्य है। कंपनी भविष्य में प्री-कैथोड एक्टिव मैटेरियल (pCAM), कैथोड एक्टिव मैटेरियल (CAM) तथा सेकंड-लाइफ बैटरी आधारित ऊर्जा भंडारण समाधानों के क्षेत्र में भी विस्तार करेगी।
सिलॉक्स ग्रुप (Silox Group) चार दशकों से ज्यादा समय से गैर-लौह धातुओं की पुनर्प्राप्ति में विशेषज्ञता रखता है। वहीं, उसकी भारतीय इकाई ने बैटरी-ग्रेड लिथियम, कोबाल्ट और निकेल रिकवरी के लिए एक स्वदेशी प्रक्रिया विकसित कर भारत में पायलट स्तर पर सफलतापूर्वक सत्यापित किया है।
एन.ए.एन. ग्रीनमेट (N.A.N. GreenMet) के संस्थापक एवं चेयरमैन नवीन अग्रवाल ने कहा कि हर इस्तेमाल हो चुकी बैटरी भारत के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन है, जिसे अब तक देश की आपूर्ति श्रृंखला से हमेशा के लिए खो दिया जाता था। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा के लिए सर्कुलर इकोनॉमी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करेगी।
वहीं, सिलॉक्स ग्रुप (Silox Group) के चेयरमैन जे.सी. बोगार्ट ने कहा कि भारत वैश्विक बैटरी इकोसिस्टम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रहा है और यह संयुक्त उद्यम देश में क्रिटिकल मिनरल्स रीसाइक्लिंग के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित करेगा।
यह परियोजना भारत सरकार की 1,500 करोड़ की क्रिटिकल मिनरल्स रिसाइक्लिंग योजना की संभावित लाभार्थी भी होगी, जिससे देश में बैटरी निर्माण, ऊर्जा भंडारण और ईवी उद्योग के लिए स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी।