IGDTUW में बनेगा एडवांस्ड ड्रोन टेक्नोलॉजी सेंटर, 8 करोड़ रुपये की मिली मंजूरी

IGDTUW में बनेगा एडवांस्ड ड्रोन टेक्नोलॉजी सेंटर, 8 करोड़ रुपये की मिली मंजूरी

IGDTUW में बनेगा एडवांस्ड ड्रोन टेक्नोलॉजी सेंटर, 8 करोड़ रुपये की मिली मंजूरी
देश में एडटेक और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में इंदिरा गांधी दिल्ली तकनीकी महिला विश्वविद्यालय (IGDTUW) ने बड़ा कदम उठाया है।


विश्वविद्यालय को एडवांस्ड ड्रोन टेक्नोलॉजी सेंटर स्थापित करने के लिए दिल्ली सरकार के प्रशिक्षण एवं तकनीकी शिक्षा विभाग से 8 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है। यह पहल छात्राओं को आधुनिक तकनीक, रिसर्च और इनोवेशन से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन एडवांस्ड ड्रोन टेक्नोलॉजी' के जरिए छात्राओं को ड्रोन रिसर्च, एआई आधारित तकनीक और स्वदेशी यूएवी सिस्टम पर काम करने का अवसर मिलेगा। यह सेंटर देश में तकनीकी शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट को नई दिशा देने की तैयारी में है।

एआई और ड्रोन टेक्नोलॉजी पर फोकस

प्रस्तावित सेंटर में एआई और मशीन लर्निंग आधारित ड्रोन इंटेलिजेंस, स्वायत्त यूएवी सिस्टम, ड्रोन निर्माण एवं परीक्षण, सिमुलेशन तकनीक, ड्रोन फॉरेंसिक और काउंटर-यूएवी सिस्टम जैसे आधुनिक क्षेत्रों में शोध किया जाएगा।

इसके लिए अत्याधुनिक लैब, एडवांस्ड सॉफ्टवेयर और हाई-टेक रिसर्च सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे छात्राओं को केवल थ्योरी तक सीमित न रहकर प्रैक्टिकल और इंडस्ट्री आधारित तकनीकी अनुभव भी मिलेगा।

एडटेक और स्किल डेवलपमेंट को मिलेगा बढ़ावा

शिक्षाविदों का मानना है कि आने वाले समय में ड्रोन टेक्नोलॉजी शिक्षा, रक्षा, कृषि, लॉजिस्टिक्स, सर्विलांस और इंडस्ट्रियल सेक्टर्स में तेजी से इस्तेमाल होगी। ऐसे में यह सेंटर छात्राओं को भविष्य की टेक्नोलॉजी के लिए तैयार करेगा और उन्हें रिसर्च आधारित शिक्षा उपलब्ध कराएगा।

दिल्ली नॉलेज डेवलपमेंट फाउंडेशन (DKDF) द्वारा समर्थित इस परियोजना के संचालन के लिए विश्वविद्यालय भी लगभग 2.4 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च करेगा। इससे संस्थान में टेक्नोलॉजी आधारित शिक्षा और इनोवेशन इकोसिस्टम को मजबूत किया जाएगा।

महिला नेतृत्व वाले टेक इनोवेशन को बढ़ावा

IGDTUW पहले ही 'नेत्रा, नारी और नेतृत्व' पहल के तहत ड्रोन तकनीक में अपनी पहचान बना चुका है। विश्वविद्यालय ने निगरानी ड्रोन विकसित किए हैं और महिला कर्मियों को यूएवी संचालन तथा सर्विलांस तकनीक का प्रशिक्षण भी दिया है।

अब यह नया सेंटर महिला नेतृत्व वाले टेक्नोलॉजी और ड्रोन इनोवेशन को और मजबूत करेगा। इससे छात्राओं को रिसर्च, स्टार्टअप्स, रक्षा तकनीक और इंडस्ट्री सहयोग के नए अवसर मिलेंगे।

प्रो. रंजना झा के नेतृत्व में आगे बढ़ेगा प्रोजेक्ट

विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. रंजना झा इस परियोजना का नेतृत्व करेंगी। परियोजना टीम में प्रो. बृजेश कुमार, प्रो. ए.के. महापात्रा और प्रो. दीप्ति छाबड़ा जैसे विशेषज्ञ शामिल हैं।

प्रो. रंजना झा ने कहा कि यह पहल 'आत्मनिर्भर भारत' और 'विकसित भारत 2047' के विजन के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि यह सेंटर छात्राओं को एआई आधारित ड्रोन सिस्टम और एडवांस्ड यूएवी टेक्नोलॉजी पर रिसर्च करने का मजबूत मंच देगा।

छात्राओं को मिलेंगे करियर और रिसर्च के नए अवसर

विश्वविद्यालय की योजना भविष्य में ड्रोन टेक्नोलॉजी से जुड़े स्टार्टअप्स, रिसर्च संस्थानों और इंडस्ट्री पार्टनर्स के साथ सहयोग बढ़ाने की है। इससे छात्राओं को इंटर्नशिप, लाइव प्रोजेक्ट्स और रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकेंगे। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल IGDTUW को देश में महिला-केंद्रित तकनीकी शिक्षा और ड्रोन रिसर्च का प्रमुख केंद्र बनाने में मदद करेगी।

इसके साथ ही, यह सेंटर छात्राओं को ड्रोन टेक्नोलॉजी से जुड़े उभरते क्षेत्रों जैसे स्मार्ट सिटी मॉनिटरिंग, आपदा प्रबंधन, हेल्थकेयर डिलीवरी और पर्यावरण निगरानी में रिसर्च करने का अवसर भी देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की एडवांस्ड तकनीकी शिक्षा से छात्राएं न केवल वैश्विक स्तर की स्किल्स हासिल कर सकेंगी, बल्कि भारत के तेजी से बढ़ते ड्रोन और एआई इकोसिस्टम में महत्वपूर्ण भूमिका भी निभा पाएंगी।

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