नीति आयोग ने शिक्षा, रोजगार और एंटरप्रेन्योरशिप को जोड़ने के लिए बनाई रणनीति

नीति आयोग ने शिक्षा, रोजगार और एंटरप्रेन्योरशिप को जोड़ने के लिए बनाई रणनीति

नीति आयोग ने शिक्षा, रोजगार और एंटरप्रेन्योरशिप को जोड़ने के लिए बनाई रणनीति
भारत में युवाओं को बेहतर शिक्षा, रोजगार और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में नीति आयोग ने बड़ा कदम उठाया है। नीति आयोग ने हाल ही में 'शिक्षा से रोजगार एवं उद्यम' से संबंधित उच्चस्तरीय स्थायी समिति की पहली बैठक आयोजित की।


इस समिति का उद्देश्य देश की शिक्षा और कौशल विकास व्यवस्था को बदलती आर्थिक जरूरतों और भविष्य के रोजगार बाजार के अनुसार तैयार करना है।

केंद्रीय बजट 2026-27 में इस समिति के गठन की घोषणा की गई थी। बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने कहा था कि सरकार युवा भारत की आकांक्षाओं को पूरा करने और सेवा क्षेत्र में क्षमता निर्माण को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए 'शिक्षा से रोजगार एवं उद्यम' स्थायी समिति बनाई गई है। सरकार का मानना है कि भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक सेवा क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभा सकता है और वर्ष 2047 तक दुनिया के सेवा बाजार में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है।

रोजगार और कौशल विकास पर रहेगा फोकस

यह समिति देश में रोजगार, कौशल विकास और उद्यमिता से जुड़े प्रमुख क्षेत्रों की पहचान करेगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अन्य नई तकनीकों का रोजगार और स्किल्स पर क्या प्रभाव पड़ रहा है। समिति भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ऐसे सुझाव देगी, जिनसे युवाओं को रोजगार के लिए बेहतर तरीके से तैयार किया जा सके।

इस समिति का गठन नीति आयोग की सीईओ निधि छिब्बर की अध्यक्षता में किया गया है, इसमें कई मंत्रालयों, राज्य सरकारों, उद्योग संगठनों और शिक्षा जगत के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। समिति में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, वाणिज्य विभाग, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, उच्च शिक्षा विभाग, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय, स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग और सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय जैसे विभाग शामिल हैं।

इसके अलावा आंध्र प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश की सरकारों को भी इसमें प्रतिनिधित्व दिया गया है। उद्योग क्षेत्र से नैसकॉम, फिक्की, सीआईआई, एफआईएसएमई और एसईपीसी जैसे संगठनों को भी समिति का हिस्सा बनाया गया है। इससे सरकार, उद्योग और शिक्षा जगत के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की कोशिश की जा रही है।

पहली बैठक में शामिल हुए कई विशेषज्ञ

22 मई 2026 को आयोजित इस समिति की पहली बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। बैठक में कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की सचिव देबाश्री मुखर्जी, नीति आयोग की विशिष्ट फेलो देबजानी घोष तथा विभिन्न मंत्रालयों और उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

बैठक के दौरान नीति आयोग के सेवा प्रभाग की कार्यक्रम निदेशक डॉ. सोनिया पंत ने भारत के सेवा क्षेत्र की संभावनाओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि सेवा क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था में तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और इसमें रोजगार सृजन की बड़ी क्षमता मौजूद है।

नीति आयोग की सीईओ निधि छिब्बर ने कहा कि भारत की बदलती अर्थव्यवस्था के अनुसार शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार व्यवस्था को लगातार अपडेट करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है और यह देश के लिए एक बड़ा अवसर है। यदि युवाओं को सही शिक्षा, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर दिए जाएं, तो भारत तेजी से आर्थिक विकास कर सकता है।

AI और नई तकनीकों पर विशेष ध्यान

बैठक में युवाओं के रोजगार, श्रम बल की भागीदारी, शिक्षा और कौशल के बीच तालमेल, कार्यबल की तैयारी और गैर-कृषि क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि तेजी से बदलती तकनीक के दौर में युवाओं को केवल पारंपरिक शिक्षा देना पर्याप्त नहीं है। उन्हें उद्योगों की जरूरतों के अनुसार आधुनिक और व्यावहारिक कौशल भी सिखाना जरूरी है।

समिति ने विशेष रूप से AI और उन्नत तकनीकों के प्रभाव पर ध्यान दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI, ऑटोमेशन और डिजिटल तकनीक कई पारंपरिक नौकरियों को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट सिस्टम को भविष्य के रोजगार बाजार के अनुसार तैयार करना बेहद जरूरी हो गया है।

बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि उद्योगों की जरूरतों के अनुसार कौशल विकास कार्यक्रम तैयार किए जाएं। इससे छात्रों और युवाओं को पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार पाने में आसानी होगी। साथ ही उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए भी विशेष योजनाएं और प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित करने की जरूरत बताई गई।

सेवा क्षेत्र को मिलेगा बढ़ावा

समिति ने माना कि सेवा क्षेत्र भारत की आर्थिक मजबूती, निर्यात प्रतिस्पर्धा और वैश्विक बाजार में पहचान बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। आईटी, डिजिटल सेवाएं, फाइनेंस, हेल्थकेयर, शिक्षा और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में भारत के पास तेजी से आगे बढ़ने के अवसर हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में बड़ी युवा आबादी होने के बावजूद स्किल गैप अभी भी एक बड़ी चुनौती है। कई बार छात्रों की शिक्षा और उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के बीच अंतर देखने को मिलता है। यही कारण है कि नीति आयोग अब शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार को एक साथ जोड़ने पर जोर दे रहा है।

समिति ने फैसला लिया है कि आने वाले समय में नियमित अंतराल पर बैठकें आयोजित की जाएंगी। इन बैठकों में रोजगार क्षमता बढ़ाने, उद्यमिता को प्रोत्साहन देने और सेवा क्षेत्र में दीर्घकालिक विकास के लिए व्यावहारिक सुझाव तैयार किए जाएंगे।

भविष्य के लिए नई नीति तैयार करने पर जोर

नीति आयोग का मानना है कि यदि केंद्र सरकार, राज्य सरकारें, उद्योग जगत, शिक्षण संस्थान और कौशल विकास संगठन मिलकर काम करें, तो भारत अपने जनसांख्यिकीय लाभांश को विकास में बदल सकता है। यह पहल युवाओं को भविष्य के रोजगार बाजार के लिए तैयार करने और भारत को वैश्विक सेवा क्षेत्र में मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।



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