डीप-टेक स्टार्टअप प्रानोस फ्यूजन ने 6.8 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई

डीप-टेक स्टार्टअप प्रानोस फ्यूजन ने 6.8 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई

डीप-टेक स्टार्टअप प्रानोस फ्यूजन ने 6.8 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई
यह फंडिंग राउंड pi Ventures और Ankur Capital ने मिलकर लीड किया है, जिसमें पहले से निवेश करने वाले Industrial47 और कई एंजेल निवेशकों ने भी हिस्सा लिया।


बेंगलुरु में स्थित इस स्टार्टअप ने पहले भी Industrial47 से 3.5 करोड़ रुपये का प्री-सीड फंड जुटाया था और Startup India Seed Fund से 20 लाख रुपये प्राप्त किए थे।

मई 2024 में शौर्य कौशल और रोशन जॉर्ज द्वारा शुरू की गई यह कंपनी कॉम्पैक्ट मैग्नेटिक सिस्टम पर काम कर रही है, जिससे फ्यूजन एनर्जी को लंबे समय तक स्थिर और कंट्रोल में चलाया जा सके। कंपनी एक ऐसा टेक्नोलॉजी सिस्टम बना रही है जिसमें प्लाज्मा कंट्रोल सॉफ्टवेयर, कॉम्पैक्ट टोकामक प्लेटफॉर्म और हाई-टेम्परेचर सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट शामिल हैं।

नई फंडिंग का इस्तेमाल कंपनी अपनी फ्यूजन टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाने में करेगी। इसमें 2026 तक पहला टोकामक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है, इसके अलावा यह पैसा मैग्नेट सिस्टम, सॉफ्टवेयर डिजाइन और कंट्रोल सिस्टम को बेहतर बनाने, टीम को बढ़ाने और टेस्टिंग फैसिलिटी बनाने में भी लगाया जाएगा।

कंपनी के को-फाउंडर और सीईओ शौर्य कौशल ने कहा कि फ्यूजन टेक्नोलॉजी पहले से मौजूद है, अब जरूरत है इसे बड़े स्तर पर बिजली उत्पादन के लिए इस्तेमाल करने की। प्रानोस फ्यूजन इसी दिशा में काम कर रही है और भारत से इसकी शुरुआत कर रही है।

यह स्टार्टअप Institute for Plasma Research और Jawaharlal Nehru Centre for Advanced Scientific Research जैसे संस्थानों के साथ काम कर रही है और अंतरराष्ट्रीय फ्यूजन प्रोजेक्ट ITER से भी जुड़ी हुई है।

दुनिया में Commonwealth Fusion Systems जैसी कंपनियां भी इसी तरह की तकनीक पर काम कर रही हैं। प्रानोस फ्यूजन कम साइज और कम लागत वाले कॉम्पैक्ट डिजाइन पर फोकस कर रही है, जिससे फ्यूजन रिएक्टर बनाना आसान हो सके।

आने वाले समय में AI, मैन्युफैक्चरिंग और शहरीकरण के कारण बिजली की मांग तेजी से बढ़ेगी। ऐसे में कंपनी अपनी टेक्नोलॉजी को भविष्य की ऊर्जा जरूरतों का अहम हिस्सा मान रही है।

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