नेशनल एजुकेशन, एम्प्लॉयबिलिटी एंड एडटेक समिट 2026: एआई, स्किल्स और भविष्य की शिक्षा पर मंथन

नेशनल एजुकेशन, एम्प्लॉयबिलिटी एंड एडटेक समिट 2026: एआई, स्किल्स और भविष्य की शिक्षा पर मंथन

नेशनल एजुकेशन, एम्प्लॉयबिलिटी एंड एडटेक समिट 2026: एआई, स्किल्स और भविष्य की शिक्षा पर मंथन
भारत मंडपम में आयोजित सम्मेलन में अपस्किलिंग, रिस्किलिंग, डिजिटल साक्षरता और एआई फ्लुएंसी पर विशेषज्ञों ने साझा किए विचार


नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित नेशनल एजुकेशन, एम्प्लॉयबिलिटी और एडटेक समिट 2026 के अंतर्गत इंडियन एजुकेशन कांग्रेस एंड अवॉर्ड्स 2026 का आयोजन किया गया, जिसमें शिक्षा, तकनीक और स्किलिंग क्षेत्र के कई प्रमुख विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और उद्योग प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस मंच पर वैश्विक प्रतिभा के भविष्य, बदलती शिक्षा प्रणाली और कौशल आधारित अर्थव्यवस्था पर व्यापक चर्चा की गई।

सम्मेलन का मुख्य विषय 'अपस्किलिंग, रिस्किलिंग, डिजिटल साक्षरता, एआई फ्लुएंसी और 21वीं सदी के कौशल' रहा, जिन्हें तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में युवाओं के लिए अनिवार्य माना जा रहा है। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि आने वाले समय में केवल पारंपरिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि तकनीकी दक्षता और निरंतर सीखने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।

कार्यक्रम का उद्घाटन एंटरप्रेन्योर इंडिया के एडिटोरियल डायरेक्टर सचिन मार्या ने किया। अपने संबोधन में शिक्षण क्षेत्र के बदलते स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षा, रोजगार और एडटेक की दुनिया वर्तमान समय में तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रही है। बदलते वैश्विक परिदृश्य और तकनीकी प्रगति के कारण शिक्षा प्रणाली को अधिक सुलभ, लचीला, नवाचार आधारित और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप बनाना आज के समय की मांग है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि शिक्षा संस्थान उद्योग के साथ मिलकर काम करें, तो छात्रों को बेहतर अवसर और व्यावहारिक अनुभव मिल सकता है।

इस सत्र में प्रमुख वक्ताओं में प्रियांका मोजा, (India Country Director- G100 MAC India), तरुण आनंद (Chancellor & Founder- Universal AI University), दीपांक अग्रवाल (CTO- SpeakX.AI ), और प्रवीण कुमार राजभर (Founder- Skilling You) आदि शामिल रहे। इन वक्ताओं ने अपने अनुभव और विचार साझा करते हुए बताया कि भविष्य की शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह स्किल्स, टेक्नोलॉजी और नवाचार के समन्वय पर आधारित होगी।

आयोजित पैनल सत्र में विशेषज्ञों और विचारकों ने मुख्य रूप से इस बात पर चर्चा की, कि एआई आधारित और कौशल-केंद्रित वैश्विक अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा करने के लिए शिक्षा व्यवस्था को किस प्रकार विकसित किया जाना चाहिए।

साथ ही पैनल चर्चाओं के दौरान निरंतर सीखने की संस्कृति (Lifelong Learning), डिजिटल परिवर्तन और उद्योग-शिक्षा सहयोग को भविष्य की प्रतिभा निर्माण की आधारशिला बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा संस्थानों को अपने पाठ्यक्रमों में एआई आधारित लर्निंग टूल्स, डिजिटल प्लेटफॉर्म, प्रोजेक्ट आधारित शिक्षा और व्यावहारिक कौशल विकास को शामिल करना चाहिए, ताकि छात्र वास्तविक दुनिया की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें।

विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि आज के समय में छात्रों को केवल अकादमिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि समस्या समाधान क्षमता, रचनात्मक सोच, तकनीकी समझ और वैश्विक दृष्टिकोण जैसे कौशल भी विकसित करने होंगे। इससे वे तेजी से बदलती तकनीकी और आर्थिक परिस्थितियों में बेहतर तरीके से खुद को स्थापित कर पाएंगे।

कार्यक्रम के अंत में विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में प्रासंगिक बने रहने के लिए अपस्किलिंग और रिस्किलिंग अब विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा संस्थान, उद्योग और तकनीकी प्लेटफॉर्म मिलकर काम करें, तो भारत के युवाओं को एआई-संचालित और कौशल-आधारित वैश्विक अर्थव्यवस्था में मजबूत, सक्षम और प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकता है।

सम्मेलन ने इस बात को भी मुख्य रूप से रेखांकित किया कि भारत के पास युवा प्रतिभा की बड़ी शक्ति है और सही शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण तथा तकनीकी संसाधनों के माध्यम से इस शक्ति को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई जा सकती है।

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