इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (India Ratings and Research) की जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का पैसेंजर व्हीकल (PV) उद्योग FY26 से FY30 के दौरान बड़े निवेश चक्र में प्रवेश करने जा रहा है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि इस अवधि में उद्योग का कुल कैपेक्स (पूंजीगत व्यय) 3.2 लाख करोड़ से 3.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। एजेंसी के अनुसार, यह निवेश मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक वाहन ट्रांजिशन, निर्यात विस्तार और प्रीमियम वाहन सेगमेंट की बढ़ती मांग से प्रेरित होगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रस्तावित निवेश का लगभग 60-70 प्रतिशत हिस्सा ईवी प्लेटफॉर्म, बैटरी टेक्नोलॉजी और उससे जुड़े इकोसिस्टम के विकास पर खर्च किया जाएगा। शीर्ष पांच ऑटोमोबाइल ओईएम कंपनियां अकेले 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश करने की तैयारी में हैं। श्रुति साबू (Shruti Saboo) ने कहा कि भारतीय पीवी उद्योग फिलहाल एक संरचनात्मक रूप से संचालित कैपेक्स चक्र से गुजर रहा है, जिसमें ईवी ट्रांजिशन और निर्यात विस्तार प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, FY23-FY25 के दौरान उद्योग का Return on Capital Employed (ROCE) 15-20 प्रतिशत के स्वस्थ स्तर पर बना रहा, लेकिन आने वाले समय में बड़े निवेश और ईवी अपनाने की धीमी गति के कारण इसमें अस्थायी दबाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, ईवी सेगमेंट के विस्तार और ऑपरेटिंग लीवरेज बढ़ने के साथ मध्यम अवधि में रिटर्न में सुधार की उम्मीद जताई गई है।
एजेंसी ने निर्यात को उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण दीर्घकालिक विकास चालक बताया। FY26 में पैसेंजर व्हीकल एक्सपोर्ट कुल बिक्री का 18.7 प्रतिशत रहा और FY23-FY26 के दौरान इसमें लगभग 12 प्रतिशत की CAGR वृद्धि दर्ज की गई। रिपोर्ट में कहा गया कि ऑटोमोबाइल कंपनियां अब ऐसे फ्लेक्सिबल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स में निवेश कर रही हैं, जो घरेलू और निर्यात दोनों बाजारों की मांग को पूरा कर सकें। इससे एसेट उपयोग में सुधार और आय में अस्थिरता कम करने में मदद मिलेगी।
इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने यह भी कहा कि मजबूत बैलेंस शीट और आंतरिक नकदी प्रवाह कंपनियों की निवेश योजनाओं को समर्थन देंगे और इससे उनकी क्रेडिट प्रोफाइल पर बड़ा नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। FY25 तक उद्योग का नेट लीवरेज -0.8x रहा, जबकि ऑपरेशन से प्राप्त नकदी प्रवाह और कैपेक्स का अनुपात लगभग 2.4x था। हालांकि, एजेंसी ने ईवी मांग बढ़ने की गति, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौतियों और नए ईवी स्टार्टअप्स तथा वैश्विक ऑटो कंपनियों के लिए क्रियान्वयन जोखिमों को लेकर सावधानी बरतने की भी सलाह दी है।