गूगल.org ने भारत में शिक्षा और तकनीक के बीच की खाई को कम करने के उद्देश्य से वाधवानी AI को 85 करोड़ (लगभग 10 मिलियन डॉलर) की ग्रांट देने की घोषणा की है। इस पहल के तहत SWAYAM जैसे सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में एडैप्टिव लर्निंग टेक्नोलॉजी को एकीकृत किया जाएगा, जिससे 2027 तक देशभर के करीब 7.5 करोड़ छात्रों और 18 लाख शिक्षकों को लाभ पहुंचने की उम्मीद है।
अगले तीन वर्षों में वाधवानी एआई (AI) एक व्यापक ‘AI फॉर एजुकेशन’ ब्लूप्रिंट तैयार करेगा, ताकि जिम्मेदार और भारत-केंद्रित AI टूल्स छात्रों, शिक्षकों और शुरुआती करियर प्रोफेशनल्स तक पहुंच सकें। यह कार्यक्रम SWAYAM, POSHAN ट्रैकर, राज्य स्तरीय लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम्स और राष्ट्रीय स्किलिंग पोर्टल्स जैसे सरकारी प्लेटफॉर्म्स में पहले से मौजूद AI समाधानों को मजबूत करेगा। इसका उद्देश्य सीखने के परिणामों में सुधार, शिक्षा मार्गों को बेहतर बनाना और शिक्षकों के प्रशासनिक कार्यों को आसान करना है।
इसी कड़ी में, गूगल क्लाउड ने कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत मेरठ स्थित चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में देश का पहला AI-सक्षम राज्य विश्वविद्यालय स्थापित किया जाएगा। MSDE और शिक्षा मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी ने कहा कि यह पायलट प्रोजेक्ट हजारों शैक्षणिक संस्थानों को अपने मानकों को स्वतंत्र रूप से बेहतर बनाने का ढांचा प्रदान करेगा।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए गूगल ने अपने AI असिस्टेंट ‘जेमिनी’ में जेईई (JEE) मेन के फुल-लेंथ प्रैक्टिस टेस्ट भी शुरू किए हैं, जिनमें फिजिक्सवाला (PhysicsWallah) और Careers360 जैसे एडटेक प्लेटफॉर्म्स की प्रमाणित सामग्री का उपयोग किया गया है। इसके साथ ही, सर्च में ‘AI मोड’ और गूगल क्लासरूम में नए फीचर्स पेश किए गए हैं, जो शिक्षकों को ऑडियो-वीडियो फीडबैक देने और प्रशासनिक कार्यों को ऑटोमेट करने में मदद करेंगे।
गूगल इंडिया की वाइस प्रेसिडेंट और कंट्री मैनेजर प्रीति लोबाना ने कहा कि रिसर्च-आधारित AI और शिक्षकों के मानवीय जुड़ाव को मिलाकर गूगल एक ऐसा भविष्य बना रहा है, जहां भाषा या स्थान की परवाह किए बिना हर भारतीय छात्र अपनी पूरी क्षमता तक पहुंच सके।