भारत अगले दो वर्षों में स्थायी चुंबकों (परमानेंट मैग्नेट) का घरेलू उत्पादन शुरू करने की तैयारी कर रहा है, ताकि आयात पर निर्भरता कम की जा सके। भारी उद्योग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव हनीफ कुरैशी ने 5वें ग्लोबल इलेक्ट्रिफिकेशन मोबिलिटी समिट में यह जानकारी दी।
सरकार ने हाल ही में दुर्लभ मृदा (रेयर अर्थ) और परमानेंट मैग्नेट के स्थानीय निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 7,280 करोड़ रुपये की योजना शुरू की है। इस योजना का लक्ष्य प्रति वर्ष 6,000 मीट्रिक टन उत्पादन क्षमता विकसित करना है, जिसमें रेयर अर्थ ऑक्साइड से धातु, धातु से मिश्रधातु और फिर तैयार उत्पाद बनाए जाएंगे।
वर्तमान में भारत अपनी अधिकांश मैग्नेट जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, जिससे ऑटो और ईवी उद्योग सप्लाई जोखिम और कीमतों में उतार-चढ़ाव से प्रभावित होता है। सरकार का मानना है कि घरेलू उत्पादन से सप्लाई चेन मजबूत होगी और भारत ऑटोमोबाइल व इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण का प्रमुख केंद्र बन सकेगा।
परमानेंट मैग्नेट इलेक्ट्रिक वाहनों के मोटर, पवन टरबाइन और औद्योगिक उपकरणों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिए इनके स्थानीय उत्पादन को रणनीतिक रूप से अहम कदम माना जा रहा है।