भारत और कनाडा ने स्वच्छ मोबिलिटी, बैटरी निर्माण और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए उच्चस्तरीय द्विपक्षीय चर्चा की। 29 जनवरी 2026 को उद्योग भवन में हुई इस बैठक में केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी और कनाडा के प्राकृतिक संसाधन मंत्री टिम हॉजसन शामिल हुए।
बैठक में बैटरी, इलेक्ट्रिक वाहन इकोसिस्टम के विकास और टिकाऊ सप्लाई चेन पर विस्तार से चर्चा हुई। कुमारस्वामी ने वैश्विक ऑटोमोबाइल क्षेत्र में भारत की मजबूत स्थिति को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत पैसेंजर वाहन, कमर्शियल वाहन, भारी ट्रक और दो-तीन पहिया वाहनों के निर्माण में अग्रणी है। उन्होंने बताया कि फेम-II योजना के तहत अब तक 16 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों को सपोर्ट मिला है और देशभर में 10,900 से ज्यादा सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं।
मंत्री ने पीएम ई-ड्राइव योजना और पीएम ई-बस सर्विस प्रोग्राम जैसी पहलों का भी उल्लेख किया, जो इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया, बसों, ई-ट्रकों, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और परीक्षण सुविधाओं को बढ़ावा देती हैं।
बैटरी निर्माण और क्रिटिकल मिनरल्स तक पहुंच बैठक का अहम विषय रहा। कुमारस्वामी ने एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) निर्माण के लिए भारत के लगभग 2 अरब अमेरिकी डॉलर के प्रोत्साहन कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि कनाडा के पास उपलब्ध क्रिटिकल मिनरल्स और प्रोसेसिंग क्षमताएं मजबूत और लचीली सप्लाई चेन विकसित करने के लिए अहम अवसर प्रदान करती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि एनएमडीसी भारत की इस्पात क्षमता और ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने के लिए कनाडा में कोयला भंडार की संभावनाएं तलाश रहा है।
कनाडा के मंत्री टिम हॉजसन ने भारत को बैटरी तकनीक और स्वच्छ मोबिलिटी समाधान में वैश्विक अग्रणी बताया। उन्होंने भारतीय साझेदारों के साथ उन्नत बैटरी तकनीकों को साझा करने की कनाडा की इच्छा जताई और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी व मैन्युफैक्चरिंग में भारतीय निजी क्षेत्र की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि कनाडा लिथियम, कोबाल्ट, ग्रेफाइट और रेयर अर्थ एलिमेंट्स की सप्लाई में भारत का सहयोग करने को तैयार है।
बैठक में बैटरी सेल और कंपोनेंट निर्माण, अगली पीढ़ी की बैटरी पर अनुसंधान एवं विकास, क्रिटिकल मिनरल सप्लाई चेन, परीक्षण और प्रमाणन अवसंरचना, स्वच्छ मोबिलिटी समाधान और टिकाऊ विनिर्माण प्रक्रियाओं पर सहयोग के ढांचे पर भी चर्चा हुई।
इस बैठक में भारी उद्योग मंत्रालय और इस्पात मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि और कनाडाई प्रतिनिधिमंडल के सदस्य भी उपस्थित रहे। दोनों पक्षों ने संवाद पर संतोष जताया और आने वाले महीनों में तकनीकी परामर्श, उद्योग-स्तरीय संवाद और संरचित फॉलो-अप तंत्र के जरिए इन चर्चाओं को ठोस परियोजनाओं और साझेदारियों में बदलने पर सहमति जताई।