JSW MG Motor भारत में 440 मिलियन डॉलर तक निवेश करेगी

JSW MG Motor भारत में 440 मिलियन डॉलर तक निवेश करेगी

JSW MG Motor भारत में 440 मिलियन डॉलर तक निवेश करेगी
जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर भारत में हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों पर ध्यान देते हुए 440 मिलियन डॉलर तक निवेश कर उत्पादन क्षमता बढ़ाएगी। एसएआईसी मोटर और जेएसडब्ल्यू ग्रुप की साझेदारी वाली कंपनी लागत घटाकर लाभप्रदता हासिल करने की रणनीति पर काम कर रही है।

भारत में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर ने आने वाले वर्षों में 30 से 40 अरब रुपये (लगभग 330–440 मिलियन डॉलर) तक निवेश करने की योजना बनाई है। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर अनुराग मेहरोत्रा ने बताया कि यह निवेश नए हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों के लॉन्च तथा उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर खर्च होगा।

यह संयुक्त उद्यम चीन की SAIC Motor और भारत के जेएसडब्ल्यू  ग्रुप (JSW Group) के बीच साझेदारी से बना है। कंपनी अपने मौजूदा प्लांट की क्षमता लगभग 1.2 लाख यूनिट से बढ़ाकर 3 लाख यूनिट सालाना करना चाहती है और इस वर्ष 3–4 नए मॉडल लॉन्च करने की तैयारी में है।

मेहरोत्रा के अनुसार शुरुआती निवेश आंतरिक संसाधनों से किया जाएगा, जबकि आगे चलकर कर्ज और इक्विटी विकल्प भी अपनाए जा सकते हैं। कंपनी ने स्थानीय स्तर पर अधिक पुर्ज़ों की सोर्सिंग कर लागत घटाने की रणनीति भी बनाई है, जिससे विदेशी मुद्रा जोखिम और आयात निर्भरता कम होगी।

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार है, जहां टोयोटा (Toyota) और सुज़ुकी (Suzuki) जैसे जापानी निर्माता बड़े निवेश कर रहे हैं, जबकि रेनॉल्ट (Renault) भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है। दूसरी ओर, चीनी कंपनियों पर निवेश प्रतिबंधों के कारण विस्तार सीमित रहा है, हालांकि बीवाईडी (BYD) और एसएआईसी (SAIC) भारत में वाहन बेचते हैं।

सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में कंपनी का घाटा बढ़कर 121 मिलियन डॉलर हो गया, लेकिन बिक्री में सुधार देखा गया। 2025 में कंपनी ने 70,500 कारें बेचीं, जो 2024 के 61,000 यूनिट से अधिक है।

कंपनी का लक्ष्य अपने कुल पोर्टफोलियो में 75% से अधिक हिस्सेदारी हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों की रखना है। मेहरोत्रा का अनुमान है कि 2030 तक भारत में नई ऊर्जा वाहनों की हिस्सेदारी कुल कार बिक्री का लगभग 30% तक पहुंच सकती है।

भारत और चीन के बीच संबंधों में नरमी के संकेत भी दिखाई दे रहे हैं। मेहरोत्रा ने कहा कि वीज़ा और उड़ानों जैसे मामलों में पहले की तुलना में अधिक सहयोग मिल रहा है, हालांकि जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।नई दिल्ली और बीजिंग के बीच संबंधों में सुधार का असर उद्योग पर भी पड़ सकता है।

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