मैक्सवोल्ट ईवी बैटरी रीसाइक्लिंग पर देगी ध्यान

मैक्सवोल्ट ईवी बैटरी रीसाइक्लिंग पर देगी ध्यान

मैक्सवोल्ट ईवी बैटरी रीसाइक्लिंग पर देगी ध्यान
मैक्सवोल्ट एनर्जी ने नई सब्सिडियरी मैक्सवोल्ट रीअर्थ लॉन्च की है, जो लिथियम बैटरियों की रीसाइक्लिंग पर काम करेगी। यह कंपनी पुरानी बैटरियों से खनिज निकालने और उन्हें दोबारा उपयोग करने के लिए एक इकोसिस्टम तैयार करेगी।

मैक्सवोल्ट एनर्जी ने भारत में लिथियम बैटरी रीसाइक्लिंग के लिए अपनी नई सब्सिडियरी मैक्सवोल्ट रीअर्थ (Maxvolt ReEarth) की शुरुआत की है। यह पहल देश में इलेक्ट्रिक वाहनों, टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर और रिन्यूएबल एनर्जी स्टोरेज के बढ़ते उपयोग के कारण तेजी से बढ़ रही एंड-ऑफ-लाइफ बैटरियों की चुनौती से निपटने के उद्देश्य से की गई है।

मैक्सवोल्ट रीअर्थ लिथियम बैटरियों के पूरे लाइफसाइकल को कवर करेगी, जिसमें सेकंड-लाइफ एप्लिकेशन, पुरानी बैटरियों का डिसअसेंबली और श्रेडिंग, ब्लैक मास का उत्पादन और लिथियम, निकल, कोबाल्ट व मैंगनीज जैसे मूल्यवान खनिजों की रिकवरी शामिल है। कंपनी LFP, NMC, NCA और LCO सहित कई बैटरी केमिस्ट्री को प्रोसेस करने की योजना बना रही है।

कंपनी के अनुसार, रीसाइक्लिंग ऑपरेशंस में उच्च रिकवरी यील्ड के लिए मैकेनिकल प्रोसेसिंग और एडवांस्ड एक्सट्रैक्शन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा, साथ ही घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणीय नियमों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन और कचरे को कम करना भी है।

मैक्सवोल्ट रीअर्थ की लीडरशिप टीम में विशाल गुप्ता (डायरेक्टर–टेक्नोलॉजी), पायल जैन (चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर) और शशांक शुक्ला (चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर) शामिल हैं। तीनों ही आईआईटी से इंजीनियरिंग डिग्री धारक हैं।

विशाल गुप्ता ने कहा, “मैक्सवोल्ट रीअर्थ के साथ हम भारत की लिथियम बैटरी वैल्यू चेन को सर्कुलर बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठा रहे हैं। हमारा लक्ष्य ऐसा मजबूत रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम बनाना है जो पर्यावरणीय जिम्मेदारी के साथ-साथ संसाधन सुरक्षा और भारत के ईवी व क्लीन एनर्जी सेक्टर की दीर्घकालिक ग्रोथ को भी सपोर्ट करे।”

कंपनी ईवी मैन्युफैक्चरर्स, फ्लीट ऑपरेटर्स, बैटरी निर्माताओं, टेलीकॉम कंपनियों, एनर्जी स्टोरेज प्रोवाइडर्स, सरकारी एजेंसियों और रिसर्च संस्थानों के साथ साझेदारी करने की योजना बना रही है। इन सहयोगों से मटेरियल ट्रेसबिलिटी मजबूत होगी और रीसाइकल्ड बैटरी मटेरियल के लिए स्थायी मांग चैनल तैयार किए जा सकेंगे।

मैक्सवोल्ट रीअर्थ का बिजनेस मॉडल सेकंड-लाइफ बैटरी उपयोग, ब्लैक मास मैन्युफैक्चरिंग और मिनरल रिकवरी पर आधारित होगा, जो भारत की उभरती सर्कुलर इकॉनमी को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाएगा।

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