रक्षा उत्पादन और अकादमिक संस्थानों के बीच सहयोग को मजबूत करने की पहल: रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार ने मंगलवार को आईआईटी, एनआईटी और आईआईएससी सहित देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के डायरेक्टर और डीन के साथ एक ऑनलाइन बैठक की। इस बैठक में डिफेंस पीएसयू और अन्य संबंधित पक्ष भी शामिल रहे।
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य: शोध और रक्षा उत्पादन के बीच एक सेतु बनाना था। इसमें यह चर्चा हुई कि विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में किए जा रहे शोध कार्यों को कैसे रक्षा उत्पादन की आवश्यकताओं से जोड़ा जा सके। इसके अलावा, ऐसा तंत्र विकसित करने पर भी विचार किया गया, जिससे अकादमिक संस्थानों और रक्षा क्षेत्र के बीच दीर्घकालिक सहयोग सुनिश्चित किया जा सके।
बैठक में छात्रों की सहभागिता पर भी विशेष ध्यान दिया गया। इसका उद्देश्य यह था कि छात्र इस प्रक्रिया में शामिल होकर लंबे समय तक चलने वाले शोध कार्यों (लॉन्ग-टर्म रिसर्च) में योगदान दे सकें। साथ ही यह विचार किया गया कि अकादमिक संस्थानों और डिफेंस पीएसयू के बीच सहयोग केवल छोटे प्रोजेक्ट तक सीमित न रहकर, उसे बढ़ाकर भविष्य की नई और उभरती तकनीकों पर भी मिलकर काम करने के लिए ठोस व्यवस्था बनाई जाए।
इस पहल से न केवल रक्षा उत्पादन को नवीनतम तकनीकी सहायता मिलेगी, बल्कि छात्रों और शोधकर्ताओं को भी प्रायोगिक अनुभव और अकादमिक विकास का अवसर मिलेगा। यही कारण है कि यह बैठक रक्षा क्षेत्र और शिक्षा जगत के बीच मजबूत साझेदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
अकादमिक रिसर्च और रक्षा तकनीक में नए अवसर
हाल ही में रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें देश के शीर्ष शैक्षणिक संस्थानों के वरिष्ठ प्रोफेसर और विशेषज्ञ शामिल हुए। इस पहल का उद्देश्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में हो रहे शोध कार्यों को सीधे उपयोगी रक्षा तकनीकों में बदलना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अनुसंधान और व्यावहारिक जरूरतों के बीच की दूरी कम होगी और युवा शोधकर्ताओं के काम का प्रत्यक्ष लाभ रक्षा क्षेत्र को मिलेगा।
बैठक में यह भी जोर दिया गया कि अकादमिक जगत और रक्षा उत्पादन विभाग के बीच दीर्घकालिक साझेदारी आवश्यक है। संजीव कुमार ने सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि इस तरह की बातचीत मंत्रालय को शैक्षणिक संस्थानों की क्षमताओं और विशेषज्ञता को बेहतर समझने में मदद करती है। उन्होंने शिक्षा जगत से अपील की कि वे रक्षा उत्पादन विभाग के साथ निरंतर संवाद और सहयोग के माध्यम से देश की रक्षा क्षमता को मजबूत करने में योगदान दें।
बैठक में कौन-कौन से प्रमुख संस्थान शामिल हुए
इस बैठक में आईआईटी मद्रास, आईआईटी कानपुर, आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी हैदराबाद, आईआईटी गांधीनगर, आईआईटी तिरुपति, आईआईटी गुवाहाटी समेत कुल 24 प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के वरिष्ठ प्रोफेसर शामिल हुए। इस संवाद से स्पष्ट हुआ कि रक्षा मंत्रालय शीर्ष शिक्षण संस्थानों और उद्योगों के साथ मिलकर आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार रक्षा तकनीक विकसित करने के लिए गंभीर प्रयास कर रहा है।
इस पहल से न केवल रक्षा क्षेत्र को नई तकनीकी शक्ति मिलेगी, बल्कि अकादमिक संस्थानों के शोध कार्यों को व्यावहारिक दिशा भी मिलेगी, जिससे छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए नए अवसर पैदा होंगे। यह कदम देश की सुरक्षा और शिक्षा दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।