विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर मित्सुबिशी इलेक्ट्रिक इंडिया ने जल संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए अपनी कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) पहल को और मजबूत करने की घोषणा की। कंपनी ने Earthwatch Institute India के सहयोग से तमिलनाडु की पुलिकट झील और आसपास के तटीय गांवों में जल निकायों के संरक्षण और जल सुरक्षा पर केंद्रित अपने कार्यक्रम का विस्तार किया है।
विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में कंपनी ने चेन्नई के कट्टूर गांव स्थित पुलिकट झील में एक विशेष कर्मचारी स्वयंसेवी कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान कर्मचारियों ने स्थानीय झील संरक्षकों, स्वयं सहायता समूहों (SHGs), मैंग्रोव क्लब के सदस्यों और मछुआरा समुदायों के साथ मिलकर मैंग्रोव पौधारोपण अभियान में भाग लिया। साथ ही उन्होंने पुनर्स्थापन नर्सरी का दौरा किया और परियोजना के तहत स्थापित ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन तथा एयर क्वालिटी मॉनिटर जैसी पर्यावरण निगरानी तकनीकों का अवलोकन किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य मैंग्रोव वनस्पतियों के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना था, जो तटीय पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा, जैव विविधता संरक्षण और मिट्टी के कटाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
मैंग्रोव संरक्षण के अलावा, इस पहल के तहत स्थानीय महिलाओं को ‘लेक स्टूवर्ड’ के रूप में प्रशिक्षित किया गया है, ताकि वे अपने समुदायों में जलवायु लचीलापन (Climate Resilience) को बढ़ावा दे सकें। ये समूह झील और तटीय क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरा हटाने के अभियान चलाने के साथ-साथ प्रदूषण रोकथाम और टिकाऊ जीवनशैली को लेकर जागरूकता कार्यक्रम भी संचालित कर रहे हैं।
कंपनी ने मछुआरा समुदायों को भी पर्यावरण संरक्षण संबंधी प्रशिक्षण प्रदान किया है। इसमें परित्यक्त मछली पकड़ने वाले जालों को वापस लाना, झील में कचरा न फेंकना और जालों में फंसने वाले ऑलिव रिडले कछुओं को सुरक्षित रूप से मुक्त करना जैसी जिम्मेदार पर्यावरणीय प्रथाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है।
परियोजना में डिजिटल तकनीकों को भी शामिल किया गया है। इसके तहत झील क्षेत्र की जैव विविधता के अध्ययन के लिए डिजिटल फील्ड गाइड विकसित किए गए हैं। साथ ही, मौसम और वायु गुणवत्ता निगरानी उपकरणों के माध्यम से स्थानीय जलवायु संरक्षकों को वास्तविक समय के पर्यावरणीय आंकड़ों को समझने और वैज्ञानिक आधार पर निर्णय लेने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
मित्सुबिशी इलेक्ट्रिक इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर अत्सुशी ताकासे ने कहा, "हमारा मानना है कि टिकाऊ पर्यावरणीय कार्रवाई उन समुदायों से शुरू होनी चाहिए जो प्रकृति के सबसे करीब हैं। पुलिकट केवल एक पारिस्थितिक संसाधन नहीं, बल्कि उन मछुआरा समुदायों और तटीय गांवों की जीवनरेखा है जो पीढ़ियों से इस पर निर्भर रहे हैं। पिछले एक वर्ष में हमने देखा है कि स्थानीय महिलाएं, मछुआरे और सामुदायिक समूह इसके संरक्षण की जिम्मेदारी को गंभीरता से अपना रहे हैं। वैज्ञानिक उपकरणों और शिक्षा से सशक्त यह सामुदायिक भागीदारी ही दीर्घकालिक जलवायु लचीलापन सुनिश्चित करेगी।"
यह पहल भारत के राष्ट्रीय जल मिशन, स्वच्छ भारत मिशन और राष्ट्रीय जलवायु कार्रवाई लक्ष्यों के अनुरूप है। साथ ही यह संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) में SDG 6 (स्वच्छ जल एवं स्वच्छता), SDG 11 (सतत शहर एवं समुदाय) और SDG 13 (जलवायु कार्रवाई) का भी समर्थन करती है।
मित्सुबिशी इलेक्ट्रिक इंडिया ने कहा कि यह परियोजना उसकी व्यापक CSR रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत कंपनी "Changes for the Better" के अपने विजन के अनुरूप पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से मुकाबले के लिए दीर्घकालिक एवं सामुदायिक-आधारित समाधान विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।