गुरुग्राम स्थित स्टार्टअप स्टेयर्स प्राइवेट लिमिटेड, एआईटीएमसी वेंचर्स लिमिटेड (AVPL) और विक्ट्री इलेक्ट्रिक व्हीकल्स इंटरनेशनल लिमिटेड ने इलेक्ट्रिक वाहन (EV) क्षेत्र में स्किलिंग, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए एक रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की है। यह सहयोग देशभर में ईवी कौशल विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर तैनाती और रोजगार-आधारित उद्यमिता पहलों के लिए एक संरचित ढांचा तैयार करेगा।
इस पहल के तहत देशभर के लगभग 70 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITIs) और संबद्ध केंद्रों में ईवी-केंद्रित प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने का मूल्यांकन किया जाएगा। इन केंद्रों का उद्देश्य युवाओं और तकनीशियनों को ईवी सर्विस, मेंटेनेंस और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े उद्योग-अनुकूल कौशल प्रदान करना है। AVPL अपने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस नेटवर्क के माध्यम से बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करेगा।
साझेदारी का एक प्रमुख लक्ष्य स्किलिंग को सीधे आय और रोजगार से जोड़ना है। प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले उम्मीदवारों को फ्रेंचाइज़-आधारित मॉडल के माध्यम से उद्यमिता के अवसर प्रदान किए जाएंगे। प्रस्तावित फ्रेंचाइज़ मॉडल ₹5 लाख और ₹10 लाख निवेश श्रेणियों में मूल्यांकनाधीन है, जिसके तहत ईवी चार्जिंग सेंटर, ईवी डीलर सर्विस सेंटर और ईवी डीलरशिप स्थापित किए जा सकेंगे।
ईवी एसी/ डीसी चार्जर, बैटरी और संबंधित उपकरणों का निर्माण चरणबद्ध तरीके से हरियाणा के हिसार स्थित AVPL फ्यूचर टेक पार्क में किया जाएगा। यह सुविधा घरेलू उत्पादन क्षमता को मजबूत करते हुए ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के अनुरूप EV इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार को समर्थन देगी। तकनीकी डिजाइन और निर्माण व्यवस्था का नेतृत्व विक्ट्री इंटरनेशनल करेगी, जबकि स्टार्टअप स्टेयर्स उद्यमिता और इकोसिस्टम विकास में सहयोग देगा।
एवीपीएल (AVPL) के संस्थापक और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. प्रीत संधू ने कहा कि यह साझेदारी युवाओं को ईवी और बैटरी सेक्टर में रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर प्रदान करेगी। वहीं विक्ट्री इलेक्ट्रिक व्हीकल्स इंटरनेशनल के मैनेजिंग डायरेक्टर संजय पॉपली ने कहा कि ITI आधारित प्रशिक्षण को वास्तविक व्यावसायिक अवसरों से जोड़कर देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को गति दी जाएगी।
यह सहयोग चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, जिसमें पायलट कार्यक्रम, संस्थागत समन्वय और फ्रैंचाइज़ ऑनबोर्डिंग की प्रक्रिया पहले चरण में शुरू होगी। सभी इंफ्रास्ट्रक्चर और व्यावसायिक गतिविधियां अंतिम समझौतों और नियामकीय अनुमोदनों के अधीन होंगी, जबकि आने वाले महीनों में प्रारंभिक कार्यान्वयन की उम्मीद है।