नई दिल्ली, 23 जनवरी 2026: पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) द्वारा आयोजित 'राष्ट्रीय कौशल शिखर सम्मेलन 2026' में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि "कौशल विकास नवाचार, उत्पादकता और राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता की आधारशिला है। अपने उद्घाटन संबोधन में उन्होंने स्पष्ट किया कि कुशल भारत ही विकसित भारत@2047 की परिकल्पना को साकार करने की कुंजी है, जिसके अंतर्गत भारत वैश्विक स्तर पर प्रतिभा, प्रौद्योगिकी और नवाचार का केंद्र बनकर उभरेगा।"
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि "भारत में प्रतिभा और बौद्धिक क्षमता की कोई कमी नहीं है, लेकिन आवश्यकता सोच और दृष्टिकोण में बदलाव की है।" उन्होंने जोर देते हुए कहा कि "कौशल विकास केवल डिग्री या प्रमाणपत्र प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मविश्वास, अनुकूलनशीलता और ज्ञान के व्यावहारिक उपयोग की क्षमता विकसित करने का माध्यम है।" उन्होंने आगे कहा “कुशल भारत ही विकसित भारत@2047 की सच्ची नींव है। राष्ट्रीय कौशल शिखर सम्मेलन जैसे मंच भारत की जनसांख्यिकीय शक्ति को तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था की जरूरतों के साथ जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।”
मंत्री ने सरकार की प्रमुख पहलों जैसे प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) और राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना (NAPS) का भी उल्लेख किया, जो रोजगार क्षमता बढ़ाने और कार्यस्थल पर सीखने को मजबूत करने में सहायक रही हैं और इन योजनाओं ने युवाओं को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल प्रदान करने में अहम योगदान दिया है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने पीएचडीसीसीआई की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि संगठन ने अपने ‘वर्ल्ड ऑफ वर्क’ पहल के माध्यम से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कौशल विकास को आगे बढ़ाने में निरंतर और केंद्रित प्रयास किए हैं। उन्होंने इसे सार्वजनिक-निजी भागीदारी का एक प्रभावशाली उदाहरण बताया, जो देश में भविष्य के लिए तैयार और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कार्यबल के निर्माण में सहायक सिद्ध हो रहा है।
राष्ट्रीय कौशल शिखर सम्मेलन 2026 ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि कौशल विकास केवल आर्थिक विकास का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक समावेशन, नवाचार और दीर्घकालिक राष्ट्रीय प्रगति का भी आधार है।
पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) द्वारा ‘स्किल्ड भारत फॉर विकसित भारत@2047’ थीम के अंतर्गत राष्ट्रीय कौशल शिखर सम्मेलन 2026 का आयोजन 23 जनवरी 2026 को नई दिल्ली स्थित पीएचडी हाउस में किया गया। इस शिखर सम्मेलन में वरिष्ठ नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं, वैश्विक संगठनों, सेक्टर स्किल काउंसिल्स, शिक्षाविदों और प्रशिक्षण संस्थानों ने भाग लिया। सम्मेलन का उद्देश्य उभरती कौशल आवश्यकताओं, समावेशी कार्यबल रणनीतियों और वैश्विक साझेदारियों पर व्यापक विचार-विमर्श करना था।
सम्मेलन में गणमान्य अतिथियों और प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए तथा विषयवस्तु की पृष्ठभूमि प्रस्तुत करते हुए, डॉ. नेहा बेरलिया, चेयर-स्किल डेवलपमेंट एंड एंटरप्रेन्योरशिप कमेटी, पीएचडीसीसीआई ने कहा कि "आज के समय में कौशल विकास कोई विकल्प नहीं बल्कि एक राष्ट्रीय आवश्यकता बन चुका है।" शिक्षा क्षेत्र के अनुभवों का उल्लेख करते हुए उन्होंने जोर दिया कि डिग्रियों के साथ-साथ छात्रों को व्यावहारिक कौशल, प्रभावी संचार क्षमता और साक्षात्कार के लिए तैयार करना आवश्यक है, ताकि वे कार्यबल में सफलतापूर्वक प्रवेश कर सकें। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय कौशल शिखर सम्मेलन एक प्रमुख मंच के रूप में उभरा है, जहां नीति, उद्योग और शिक्षा जगत मिलकर भारत के भविष्य के कार्यबल के लिए समाधान तैयार करते हैं।
उद्घाटन सत्र में प्रोफेसर इंद्राणी भादुरी, प्रमुख, ईएसडी, एनसीईआरटी एवं सीईओ, परख ने भी मुख्य वक्तव्य दिया। उन्होंने शिक्षा प्रणाली और उद्योग की आवश्यकताओं के बीच मजबूत एकीकरण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि "स्कूल स्तर से लेकर उच्च शिक्षा तक, कौशल, रोजगारयोग्यता और उद्यमिता को सीखने की सभी प्रक्रियाओं में समाहित करना समय की मांग है। साथ ही उन्होंने भविष्य में आवश्यक कौशलों, जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नैतिकता और उभरती प्रौद्योगिकियों से जुड़ी क्षमताओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने की जरूरत पर भी प्रकाश डाला।" उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।
शिखर सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण सीमेंस डिजिटल इंडस्ट्री सॉफ्टवेयर द्वारा प्रस्तुत सत्र रहा, जिसका विषय था ‘सीमेंस पाथवे टू लर्निंग इंजीनियरिंग के माध्यम से कक्षा से उद्योग तक की दूरी पाटना’। इस अवसर पर प्रशांत कुलकर्णी, सीनियर डायरेक्टर- मेनस्ट्रीम क्लाउड प्रोडक्ट्स, सीमेंस डिजिटल इंडस्ट्री सॉफ्टवेयर ने बताया कि कैसे उद्योग-नेतृत्व वाले डिजिटल लर्निंग पाथवे छात्रों को व्यावहारिक और उद्योग-उपयुक्त कौशल प्रदान कर सकते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे कार्यक्रम उन्नत विनिर्माण और इंजीनियरिंग क्षेत्रों में छात्रों की रोजगार क्षमता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने में सहायक होते हैं।
कुल मिलाकर, राष्ट्रीय कौशल शिखर सम्मेलन 2026 ने नीति, उद्योग और शिक्षा के बीच सहयोग को सुदृढ़ करते हुए भारत को भविष्य के लिए तैयार, समावेशी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कार्यबल की दिशा में आगे बढ़ाने का एक सशक्त मंच प्रदान किया।
शिखर सम्मेलन में भारत की कौशल विकास यात्रा के महत्वपूर्ण पहलुओं पर केंद्रित दो उच्चस्तरीय पैनल चर्चाओं का आयोजन किया गया।
पहली पैनल चर्चा ‘भविष्य के लिए तैयार और सतत कार्यबल का निर्माण: भारत @2047 के लिए कौशल’ विषय पर आधारित थी, जिसमें तीव्र तकनीकी बदलावों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में दीर्घकालिक कार्यबल योजना पर विचार किया गया।
इस सत्र का संचालन सुश्री शालिनी एस. शर्मा, असिस्टेंट सेक्रेटरी जनरल, पीएचडीसीसीआई ने किया। पैनल में डॉ. पूनम सिन्हा, महानिदेशक, एनआईईएसबीयूडी; कर्नल सुहैल ज़ैदी, महानिदेशक, मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MAIT); श्री प्रशांत कुलकर्णी, सीमेंस डिजिटल इंडस्ट्री सॉफ्टवेयर; सुश्री भावना चोपड़ा, हेड–स्टेनलेस अकादमी, जिंदल स्टेनलेस लिमिटेड तथा सुश्री गुंजन कथारिया, ग्लोबल स्किल्स एक्सीलेंस लीड, माइक्रोसॉफ्ट शामिल थे। पैनलिस्टों ने उभरती नौकरी भूमिकाओं, भविष्य के करियर, टैलेंट पाइपलाइनों और कार्यबल की स्थिरता व सततता सुनिश्चित करने के लिए उद्योग–शिक्षा जगत के बीच गहन सहयोग की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की।
दूसरी पैनल चर्चा ‘कार्यबल परिवर्तन को सशक्त बनाना: उद्योग, समावेशन और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां’ विषय पर केंद्रित रही। इस सत्र में भारत की जनसांख्यिकीय क्षमता का लाभ उठाने के लिए मांग-आधारित कौशल विकास मॉडल, वैश्विक सहयोग और समावेशी ढांचों पर विचार-विमर्श किया गया। इस चर्चा का संचालन डॉ. देबदीप डे, हेड रिसर्च एंड इम्पैक्ट, नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ने किया। पैनल में डॉ. दिव्या नांबियार, यूथ, स्किल्स एंड लाइवलीहुड्स लीड, ऑक्सफोर्ड पॉलिसी मैनेजमेंट; प्रो. मोना गुप्ता, सीईओ, होम मैनेजमेंट एंड केयर गिवर्स सेक्टर स्किल काउंसिल; श्री विंकेश गुलाटी, चेयरपर्सन, ऑटोमोटिव स्किल्स डेवलपमेंट काउंसिल; डॉ. अर्पण तुल्स्यान, सीनियर फेलो, ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन तथा सुश्री भारती बिरला, एंटरप्राइज डेवलपमेंट स्पेशलिस्ट, इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन शामिल थे।
इन दोनों पैनल चर्चाओं ने भारत को 2047 तक एक कुशल, समावेशी और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी कार्यबल बनाने की दिशा में व्यावहारिक दृष्टिकोण और नीतिगत सुझाव प्रस्तुत किए।
चर्चाओं में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि कार्यबल परिवर्तन की प्रक्रिया को मूल रूप से समावेशी होना चाहिए, ताकि महिलाएं, युवा, दिव्यांगजन, असंगठित क्षेत्र के श्रमिक और वंचित समुदाय भविष्य के कार्य जगत में सार्थक रूप से भागीदारी कर सकें। विभिन्न सत्रों में वक्ताओं ने विचार-विमर्श का सार प्रस्तुत करते हुए कहा कि भारत के कौशल विकास पारिस्थितिकी तंत्र को अब आपूर्ति-आधारित मॉडल से आगे बढ़कर मांग-आधारित और उद्योग-केंद्रित ढांचों की ओर निर्णायक रूप से संक्रमण करना होगा। यह परिवर्तन वैश्विक मानकों, अप्रेंटिसशिप कार्यक्रमों, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और अंतरराष्ट्रीय गतिशीलता मार्गों के सहयोग से ही संभव हो सकेगा।
राष्ट्रीय कौशल शिखर सम्मेलन 2026 को सीमेंस डिजिटल इंडस्ट्री सॉफ्टवेयर, अपीजे स्ट्या एंड स्वर्ण ग्रुप तथा डीडी नेशनल (दूरदर्शन) जैसे प्रमुख साझेदारों का समर्थन प्राप्त हुआ। यह समर्थन भारत के कौशल विकास एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए उद्योग और संस्थागत जगत की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।