गणतंत्र दिवस 2026 की परेड में स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की झांकी ने भारत की शिक्षा और ज्ञान परंपरा को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया। इस झांकी में बच्चों के पीछे बने पंख विशेष महत्व रखते हैं, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के मूल भाव ‘आत्मनिर्भरता’ में निहित आत्मविश्वास, अवसर और वैश्विक तत्परता का प्रतीक हैं।
यह प्रतीक इस बात को दर्शाता है कि शिक्षा केवल ज्ञान देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बच्चों में स्वतंत्र सोच, आत्मविश्वास और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता विकसित करती है। गणतंत्र दिवस 2026 की परेड में प्रदर्शित की गई झांकी में भारत की शाश्वत ज्ञान विरासत और NEP-2020 के तहत शिक्षा के गतिशील विकास को भी प्रदर्शित किया गया। इसमें स्कूली शिक्षा को ‘विकसित भारत 2047’ की दिशा में एक प्रमुख चालक के रूप में दिखाया गया। झांकी ने प्राचीन भारतीय ज्ञान, विज्ञान, कला और संस्कृति से लेकर भविष्य की शिक्षा तक के विषयों को समाहित किया, और यह प्रधानमंत्री स्कूल के प्रतीक चिन्ह के अंतर्गत प्रस्तुत किया गया।
इस प्रकार की प्रस्तुति न केवल शिक्षा की महत्ता को उजागर करती है, बल्कि यह दिखाती है कि भारतीय शिक्षा प्रणाली बच्चों को आत्मनिर्भर, सक्षम और वैश्विक दृष्टिकोण से तैयार करने की दिशा में लगातार प्रगतिशील कदम उठा रही है। झांकी ने स्पष्ट किया कि शिक्षा केवल विद्यालयों तक सीमित नहीं, बल्कि यह राष्ट्रीय विकास, विज्ञान और नवाचार में योगदान देने की क्षमता भी प्रदान करती है।
गणतंत्र दिवस 2026 में प्रदर्शित झांकी की खासियत
गणतंत्र दिवस 2026 की झांकी में स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने भारतीय शिक्षा और ज्ञान परंपरा की विविधताओं को आकर्षक रूप से प्रस्तुत किया। झांकी के अग्रभाग में आर्यभट की एक मूर्ति दिखाई गई, जो मुस्कुराते हुए बच्चों को देख रही थी। बच्चों के हाथों में 'शून्य' और एक ग्लोब था, जो भारत के वैश्विक ज्ञान में स्थायी योगदान और इस विरासत को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने का प्रतीक था।
बच्चों के पीछे बने पंख नई शिक्षा नीति-2020 का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, जो 'आत्मनिर्भरता' में निहित आत्मविश्वास, अवसर और वैश्विक तत्परता को सक्षम बनाते हैं। झांकी में वीआर हेडसेट का उपयोग करते हुए बच्चों ने 'प्राचीन जड़ों, डिजिटल पंखों' का दृश्य प्रस्तुत किया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि भारत की शिक्षा प्रणाली परंपरा और आधुनिक तकनीक का संयोजन कर रही है। वहीं, 'जादुई पिटारा' ने स्वदेशी खिलौनों और बहुभाषी शिक्षण सामग्री के माध्यम से खेल-आधारित और मातृभाषा में मूलभूत शिक्षा पर प्रकाश डाला।
झांकी में प्रधानमंत्री स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया (पीएम श्री) स्कूल के गेट को भी दर्शाया गया, जहाँ बच्चे पौधे लगा रहे थे। यह दृश्य समावेशिता, पर्यावरण जागरूकता और मिशन लाइफ के मूल्यों का प्रतीक था। इसके साथ ही, औजारों से जुड़े एक छात्र ने प्रारंभिक अवस्था से ही कौशल शिक्षा के महत्व को उजागर किया, जो यह दर्शाता है कि शिक्षा केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यावहारिक कौशल और जीवन कौशल विकसित करने पर भी केंद्रित है।
इस गणतंत्र दिवस की झांकी में शिक्षा विभाग ने शिक्षा में तकनीक और नवाचार को प्रदर्शित किया
इस प्रकार, यह झांकी भारत की शिक्षा प्रणाली में प्राचीन ज्ञान, आधुनिक नवाचार और समग्र विकास की परंपरा को उजागर करती है। इसमें बच्चों की सहभागिता, डिजिटल उपकरणों का उपयोग और मातृभाषा आधारित शिक्षण ने यह संदेश दिया कि भारत की शिक्षा प्रणाली सतत, समावेशी और वैश्विक दृष्टिकोण से तैयार है।
गणतंत्र दिवस 2026 की झांकी के मध्य भाग में शिक्षा में समग्र विकास के महत्व को दर्शाया गया। इस हिस्से में मार्शल आर्ट, प्रदर्शन कला और खेल को शिक्षा के साथ एकीकृत करने का चित्रण किया गया, जिससे यह संदेश दिया गया कि शिक्षा केवल पुस्तक ज्ञान तक सीमित नहीं, बल्कि शारीरिक, मानसिक और सृजनात्मक विकास को भी समान महत्व देती है।
झांकी में एक रोबोटिक हाथ प्रदर्शित किया गया, जो परंपरा और टेक्नोलॉजी के सहज मिश्रण का प्रतीक था। तख्ती से लेकर टैबलेट तक के इस दृश्य ने यह दर्शाया कि भारतीय शिक्षा में मूल्य, नवाचार और आधुनिक तकनीक का सामंजस्य है। यह मध्य भाग विकसित भारत 2047 टावर पर समाप्त हुआ, जहाँ स्मार्ट क्लासरूम, प्रयोगशालाएं और नवाचार केंद्र प्रदर्शित किए गए।
पुस्तकों, गियरों और सर्किटों के प्रतीक चिन्हों के माध्यम से 'पीएम श्री स्कूलों' को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) का मूर्त रूप प्रस्तुत किया गया। इसका उद्देश्य प्रत्येक बच्चे को, चाहे उसका क्षेत्र, लिंग या क्षमता कुछ भी हो, कुशल, मूल्य-प्रेरित और जिम्मेदार नागरिक बनाना है। झांकी में NEP-2020 को भारत के स्कूली शिक्षा सुधारों को एक विकसित राष्ट्र की ओर गति देने वाले रॉकेट के रूप में भी दिखाया गया, जो शिक्षा और नवाचार के माध्यम से भविष्य की दिशा निर्धारित करता है।
इस प्रकार झांकी ने स्पष्ट रूप से यह संदेश दिया कि शिक्षा केवल अकादमिक ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बच्चों में कौशल, मूल्य, नवाचार और वैश्विक दृष्टिकोण विकसित करने की प्रक्रिया है। यह भारत के विकसित और समग्र शिक्षित समाज की दिशा में एक प्रतीकात्मक प्रस्तुति थी।