नालंदा यूनिवर्सिटी में साउथईस्ट-एशियन स्टडीज सेंटर की शुरुआत

नालंदा यूनिवर्सिटी में साउथईस्ट-एशियन स्टडीज सेंटर की शुरुआत

नालंदा यूनिवर्सिटी में साउथईस्ट-एशियन स्टडीज सेंटर की शुरुआत
नालंदा विश्वविद्यालय में मंगलवार को सेंटर फॉर साउथईस्ट एशियन स्टडीज का उद्घाटन किया गया। यह पहल भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के बीच शैक्षणिक और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


इस सेंटर का उद्घाटन विदेश मंत्रालय (MEA) में पूर्वी मामलों के सचिव पी. कुमारन ने किया। इस मौके पर कई देशों के राजदूत, उच्चायुक्त, साझेदार देशों के प्रतिनिधि, विश्वविद्यालयों के कुलपति और फैकल्टी सदस्य भी मौजूद रहे, जिससे इस पहल का अंतरराष्ट्रीय महत्व साफ दिखाई देता है।

भारत-आसियान संबंधों को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम

यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अक्टूबर 2025 में कुआलालंपुर में आयोजित ASEAN-India Summit 2025 के दौरान की गई घोषणा के बाद शुरू की गई है। इसका उद्देश्य भारत और आसियान (ASEAN) देशों के बीच सहयोग को और मजबूत बनाना है।

10 शोध क्षेत्रों पर होगा काम

यह सेंटर 10 अलग-अलग इंटरडिसिप्लिनरी (बहु-विषयक) रिसर्च क्षेत्रों पर काम करेगा। इनमें जलवायु परिवर्तन, समुद्री अध्ययन, व्यापार, सांस्कृतिक विरासत, पब्लिक हेल्थ, माइग्रेशन, डिजिटल सहयोग और अंतरराष्ट्रीय संबंध जैसे विषय शामिल हैं। इसका लक्ष्य ASEAN-India Comprehensive Strategic Partnership Plan of Action 2026-2030 के तहत एक नॉलेज पार्टनर के रूप में काम करना है।

नीति और ज्ञान का केंद्र बनेगा यह संस्थान

इस सेंटर का उद्देश्य ASEAN-India Comprehensive Strategic Partnership Plan (2026–2030) के तहत एक ‘नॉलेज पार्टनर’ के रूप में काम करना है। यह न केवल अकादमिक रिसर्च को बढ़ावा देगा, बल्कि नीति-निर्माण (policy making) में भी अहम भूमिका निभाएगा। साथ ही, यह सेंटर छात्रों, रिसर्चर्स और पॉलिसी एक्सपर्ट्स के लिए एक प्रमुख प्लेटफॉर्म बनेगा।

भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच बनेगा मजबूत पुल

विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह सेंटर भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच एक सेतु (bridge) की तरह काम करेगा। इसके जरिए न केवल शैक्षणिक शोध को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि नीति निर्माण (policy making) में सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और ऐतिहासिक रिश्तों को भी और मजबूत किया जाएगा।

छात्रों के लिए नए अवसर और ग्लोबल एक्सपोजर

इस सेंटर के शुरू होने से छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पढ़ाई और रिसर्च के बेहतर अवसर मिलेंगे। यहां विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ सहयोग, एक्सचेंज प्रोग्राम और इंटर्नशिप जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे छात्रों को ग्लोबल एक्सपोजर मिलेगा और वे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे, जो उनके करियर और शोध कार्य के लिए काफी लाभकारी साबित होगा।

इसके अलावा, भारत की 'Act East Policy' को भी मजबूती मिलेगी और नालंदा विश्वविद्यालय एक वैश्विक शिक्षा केंद्र के रूप में अपनी पहचान और मजबूत कर सकेगा।


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