बेंगलुरु में स्थित स्पेसटेक स्टार्टअप The Guild (पहले जिसे EtherealX कहा जाता था) ने सीरीज़ A फंडिंग राउंड में USD 20.5 मिलियन जुटाए हैं। इस राउंड का नेतृत्व TDK Ventures और BIG Capital ने किया, जबकि अन्य निवेशकों में Accel, Prosus, Yournest, Campus Fund, BlueHill और Riceberg शामिल रहे।
इस फंडिंग के बाद कंपनी का मूल्यांकन 5.5 गुना बढ़कर USD 80.5 मिलियन हो गया है। इस राउंड के साथ अब तक The Guild की कुल फंडिंग USD 25.5 मिलियन हो चुकी है। कंपनी ने कहा कि नए निवेश का इस्तेमाल अपनी लॉन्च व्हीकल Razor Crest Mk-1 के विकास और फ्लाइट क्वालिफिकेशन को आगे बढ़ाने में किया जाएगा।
Razor Crest Mk-1 एक मीडियम-लिफ्ट, पूरी तरह से रीयूजेबल (पुन: उपयोग योग्य) लॉन्च व्हीकल है, जिसे लोअर अर्थ ऑर्बिट (LEO) और जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में मिशनों के लिए बनाया जा रहा है। कंपनी का लक्ष्य है कि यह लॉन्च व्हीकल लॉन्च कॉस्ट को काफी कम करे, लगभग USD 500 प्रति किलोग्राम।
दूसरे रीयूजेबल लॉन्च सिस्टम्स के मुकाबले, जहां केवल बूस्टर रीकवर किया जाता है, The Guild ऊपरी और निचले दोनों स्टेज को सुरक्षित तरीके से वापिस लाने के लिए डिजाइन कर रही है ताकि दोनों को दोबारा इस्तेमाल किया जा सके।
इस रॉकेट में LEO तक 24.8 टन और GTO तक 10.8 टन पेलोड ले जाने की क्षमता होगी। इसकी प्रमुख तकनीकी विशेषता है Full-flow Segregated Cooling Cycle (FSCC) पर आधारित प्रोपल्शन सिस्टम, जो ऊपरी स्टेज की रीयूजेबिलिटी के थर्मल डिमांड को मैनेज करने के लिए बनाया गया है।
The Guild, जिसे 2022 में Ethereal Exploration Guild के नाम से स्थापित किया गया था, ने अपने पूरी तरह से पुन: प्रयोज्य (Fully Reusable) लॉन्च वाहन के लिए दो इंजन विकसित किए हैं। इन इंजन में शामिल हैं -
Stallion: यह 1.2 मेगान्यूटन का पुन: प्रयोज्य सेमी-क्रायोजेनिक इंजन है, जो रॉकेट के बूस्टर स्टेज के लिए है।
Pegasus: यह 80 किलो न्यूटन का इंजन है, जो ऊपरी स्टेज (Upper Stage) के लिए डिज़ाइन किया गया है।
'पूरी तरह से पुन: प्रयोज्य' का मतलब है कि रॉकेट के दोनों स्टेज को लॉन्च के बाद सुरक्षित रूप से वापस लाया जा सकता है और फिर से उड़ाया जा सकता है। अगले विकास चरण में, The Guild इंजन-स्तरीय और स्टेज-स्तरीय परीक्षण शुरू करेगा। इसमें Technology Demonstrator Vehicle के बूस्टर स्टेज का परीक्षण शामिल है, जिसे Stallion इंजन द्वारा संचालित किया जाएगा, साथ ही ऊपरी स्टेज और उसके FSCC-आधारित प्रणोदन प्रणाली (Propulsion System) को भी मान्य किया जाएगा।
कंपनी दक्षिण भारत में अपनी परीक्षण और निर्माण सुविधाओं का विस्तार भी कर रही है। वह आंध्र प्रदेश के स्पेस सिटी में BASE-002 नामक नई सुविधा शुरू करने की योजना बना रही है, जो इंजन और स्टेज की फायरिंग, क्वालिफिकेशन और रिफर्बिशमेंट (Refurbishment) का समर्थन करेगी। यह नई सुविधा तमिलनाडु के कड्डालोर में मौजूद BASE-001 सुविधा को पूरक करेगी, जो अब भी Pegasus इंजन के परीक्षण में इस्तेमाल हो रही है।