आइडिया से IPO तक का सफर

आइडिया से IPO तक का सफर

आइडिया से IPO तक का सफर
IndiQube, जिसे मेघना अग्रवाल ने 2015 में शुरू किया, आज 17 शहरों में लचीले और तैयार (plug-and-play) ऑफिस स्पेस उपलब्ध कराती है और 830 से ज्यादा क्लाइंट्स को सेवाएं देती है।


राजस्थान के अलवर जैसे छोटे शहर में पली-बढ़ी मेघना अग्रवाल एक पारंपरिक मारवाड़ी परिवार से थीं, लेकिन उनके माता-पिता प्रगतिशील थे और उन्होंने शिक्षा व आत्मनिर्भरता पर जोर दिया। वह कंपनी सेक्रेटरी और IMT Ghaziabad से MBA हैं। शुरुआत से ही उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें अपनी अलग पहचान बनानी है। वह कहती हैं, “मैंने खुद को कभी पारंपरिक रास्ते पर चलते नहीं देखा।”

शुरुआत में वह इन्वेस्टमेंट बैंकर बनना चाहती थीं, लेकिन September 11 attacks के बाद मार्केट में अस्थिरता आई और मौके कम हो गए। जो एक झटका लगा, वही उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट बन गया। इसी दौरान उनकी मुलाकात ऋषि से हुई, जो CareerNet बना रहे थे। 25 साल की उम्र में उन्होंने HirePro Technologies की सह-स्थापना की। वह कहती हैं, “कई मायनों में मैं गलती से उद्यमी बनी, लेकिन जब इस रास्ते पर आई तो समझ गया कि यही मेरी जगह है।”

2015 में IndiQube का आइडिया उनके अपने अनुभव से आया। जैसे-जैसे उनकी टीम बढ़ती गई, उन्हें बार-बार ऑफिस बदलना पड़ता था, क्योंकि लीज़ सिस्टम सख्त था। भारत में बढ़ती कंपनियों के लिए लचीले ऑफिस की कमी थी। इसी समस्या का समाधान उन्होंने IndiQube के रूप में बनाया। आज IndiQube 17 शहरों में करीब 130 प्रॉपर्टीज़ और लगभग 1 करोड़ वर्ग फुट ऑफिस स्पेस के साथ काम कर रही है। यह कंपनियों को तैयार ऑफिस, डिजाइन और निर्माण सेवाएं, टेक्नोलॉजी, सस्टेनेबिलिटी और अन्य सुविधाएं देती है।

शुरुआत में उन पर भरोसा निवेशकों ने नहीं, बल्कि उनके पुराने क्लाइंट्स ने किया। बाद में बड़ी कंसल्टिंग कंपनियों और तेजी से बढ़ते स्टार्टअप्स ने इस मॉडल को अपनाया। वहीं साल 2018 में WestBridge Capital और निवेशक आशीष गुप्ता जुड़े और करीब 100 करोड़ रुपये का निवेश किया। 2022 में कंपनी ने लगभग 225 करोड़ रुपये जुटाए और 2025 में IndiQube ने IPO लाकर 700 करोड़ रुपये जुटाए। वह कहती हैं, “पैसे ने हमें विस्तार दिया, लेकिन हमारे विश्वास ने हमें दिशा दी।”

आज IndiQube के 830 से ज्यादा क्लाइंट्स हैं। इनमें से लगभग 40% ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स हैं और 60% में भारतीय कंपनियां, यूनिकॉर्न और स्टार्टअप्स शामिल हैं। करीब 45% रेवेन्यू मल्टी-सेंटर क्लाइंट्स से आता है और 64% क्लाइंट्स 300 से ज्यादा सीट्स लेते हैं जो कंपनी की मजबूत स्थिति को दिखाता है। उनका एक खास मेट्रिक है “नेगेटिव चर्न”, यानी क्लाइंट्स कंपनी के साथ लगातार बढ़ते हैं।

शुरुआत में उन्हें कहा गया कि रियल एस्टेट बिजनेस के लिए मजबूत नेटवर्क, ज्यादा पैसा और स्थानीय पकड़ जरूरी होती है। वह कहती हैं, “हमारे पास इनमें से कुछ भी नहीं था। मैं बेंगलुरु एक बाहरी व्यक्ति के रूप में आई थी। न रियल एस्टेट का बैकग्राउंड, न कोई बड़ा निवेश।” लेकिन उनके पास था, सही तरीके से निवेश करना, मालिकों के साथ अच्छे संबंध और क्लाइंट्स को लगातार अच्छी सेवा देना।

COVID-19 उनके लिए सबसे बड़ी परीक्षा थी। जब लोग कह रहे थे कि ऑफिस का दौर खत्म हो जाएगा, तब IndiQube ने अपने वित्त और क्लाइंट्स पर ध्यान बनाए रखा। वहीं नतीजा रिकवरी के बाद कंपनी ने रिकॉर्ड कमाई की, FY26 की तीसरी तिमाही में कंपनी ने 395 करोड़ रुपये का रेवेन्यू और 40 करोड़ रुपये का मुनाफा (PAT) दर्ज किया और पहले 9 महीनों में रेवेन्यू 1,063 करोड़ रुपये और मुनाफा 95 करोड़ रुपये रहा।

IndiQube की ग्रोथ का एक आसान मंत्र है “जहां टैलेंट है, वहीं जाओ।” कंपनी अब बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे शहरों (Tier II) में भी विस्तार करने की योजना बना रही है, जहाँ टैलेंट और कम लागत का फायदा है।

मेघना अग्रवाल के लिए यह सफर इस बात का सबूत है कि सफलता के लिए पारंपरिक फायदे जरूरी नहीं हैं। वह कहती हैं, “अगर आपके पास स्पष्ट सोच, धैर्य और सही काम करने की क्षमता है, तो आप किसी भी पारंपरिक इंडस्ट्री में अपनी जगह बना सकते हैं।”

तथ्य (Facts):

स्थापना: 2015

शहर: 17

प्रॉपर्टीज़: 130

कुल स्पेस: 1 करोड़ वर्ग फुट

क्लाइंट्स: 830+

GCC क्लाइंट्स: 40%

मल्टी-सेंटर रेवेन्यू: 45%

300+ सीट्स वाले क्लाइंट्स: 64%

IPO: 2025 (700 करोड़ रुपये जुटाए)

Q3 FY26 रेवेन्यू: 395 करोड़ रुपये

9 महीने FY26 रेवेन्यू: 1,063 करोड़ रुपये

महिला कर्मचारी: 150

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