स्वावलंबिनी योजना: उच्च शिक्षण संस्थानों में महिला उद्यमिता को मिलेगी नई उड़ान

स्वावलंबिनी योजना: उच्च शिक्षण संस्थानों में महिला उद्यमिता को मिलेगी नई उड़ान

स्वावलंबिनी योजना: उच्च शिक्षण संस्थानों में महिला उद्यमिता को मिलेगी नई उड़ान
स्वावलंबिनी पायलट परियोजना युवा महिलाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने और सफल उद्यमी बनने में मदद करने के लिए एक चरणबद्ध प्रशिक्षण व्यवस्था प्रदान करती है।


कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) ने नीति आयोग के महिला उद्यमिता मंच के साथ मिलकर फरवरी 2025 में ‘स्वावलंबिनी’ महिला उद्यमिता कार्यक्रम की शुरुआत की। यह कार्यक्रम एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में असम, मेघालय, मिजोरम, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना के छह उच्च शिक्षा संस्थानों और विश्वविद्यालयों में शुरू किया गया है। इस कार्यक्रम को मंत्रालय अपने नोएडा स्थित राष्ट्रीय उद्यमिता एवं लघु व्यवसाय विकास संस्थान (NIESBUD) और गुवाहाटी के भारतीय उद्यमिता संस्थान (IIE) के माध्यम से लागू कर रहा है।

स्वावलंबिनी योजना से महिलाओं को मिलने वाले लाभ  

स्वावलंबिनी पायलट परियोजना युवा महिलाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने और सफल उद्यमी बनने में मदद करने के लिए एक चरणबद्ध प्रशिक्षण व्यवस्था प्रदान करती है। इसका उद्देश्य छात्राओं में उद्यमिता की सोच विकसित करना और उन्हें यह समझाना है कि वे उद्यमिता को करियर के रूप में कैसे अपना सकती हैं। साथ ही, उन्हें उपलब्ध सरकारी योजनाओं, संसाधनों, सहायता तंत्र और नेटवर्क के बारे में जानकारी दी जाती है।

इस परियोजना में 1200 छात्राओं को शामिल किया गया है, जिन्हें सबसे पहले उद्यमिता जागरूकता कार्यक्रम (EAP) के तहत शुरुआती प्रशिक्षण दिया जाता है। इनमें से 600 छात्राओं का चयन आगे के उद्यमिता विकास कार्यक्रम (EDP) के लिए किया जाता है। इस चरण में उन्हें व्यवसाय शुरू करने के लिए जरूरी कौशल, वित्तीय सहायता की जानकारी, बाजार से जुड़ाव, कानूनी और अनुपालन सहायता, व्यावसायिक सेवाएं और नेटवर्किंग के बारे में गहन प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके बाद 21 सप्ताह तक उन्हें मार्गदर्शन और सहायता दी जाती है ताकि वे अपने विचारों को सफल व्यवसाय में बदल सकें।

इस कार्यक्रम के क्रियान्वयन और निगरानी की जिम्मेदारी कौशल विकास मंत्रालय की होगी। वहीं नीति आयोग कार्यशालाएं आयोजित करेगा, मेंटरशिप देगा, शुरुआती फंडिंग में मदद करेगा और Award to Reward (ATR) पहल के तहत सफल उद्यमियों को सम्मानित करेगा।

मार्गदर्शन कार्यक्रम के दौरान उद्योग के अनुभवी और सफल उद्यमी छात्राओं को सलाह और व्यावहारिक सहयोग देंगे। वे अपने अनुभव साझा करेंगे और बताएंगे कि व्यवसाय शुरू करते समय किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा और उन्हें कैसे पार किया गया।

कार्यक्रम में एक फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) भी शामिल है। इसके तहत उच्च शिक्षा संस्थानों के शिक्षकों के लिए पांच दिन का प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया जाएगा, ताकि वे अपने संस्थानों में महिला उद्यमियों को सही मार्गदर्शन दे सकें। यह कार्यक्रम पहले ही शुरू हो चुका है और फिलहाल लागू किया जा रहा है।

MSDE ने प्रशिक्षण के लिए NIESBUD और IIE को कुल 40,46,016 रुपये की राशि आवंटित की है। इसमें से 10,11,504 रुपये पहले ही संबंधित संस्थानों को जारी किए जा चुके हैं। वर्तमान में यह कार्यक्रम असम, मेघालय, मिजोरम, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना के उच्च शिक्षा संस्थानों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चल रहा है। अभी आंध्र प्रदेश में इसे शुरू करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

कार्यक्रम की प्रगति और परिणामों पर नजर रखने के लिए मंत्रालय ने नीति आयोग के सहयोग से एक मजबूत निगरानी और मूल्यांकन व्यवस्था बनाई है। बता दें कि यह जानकारी कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री जयंत चौधरी ने लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।

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