इलेक्ट्रिक मोबिलिटी स्टार्टअप युलु मेनबोर्ड आईपीओ की दिशा में आगे बढ़ रहा है। कंपनी के को-फाउंडर और सीईओ अमित गुप्ता के अनुसार, युलु तब सार्वजनिक बाजार के लिए तैयार होगी जब उसका सालाना रेवेन्यू करीब 1,200-1,500 करोड़ तक पहुंच जाएगा। कंपनी ने हाल ही में $93 मिलियन (करीब ₹780 करोड़) की Series C फंडिंग जुटाई है, जिसमें $63 मिलियन इक्विटी और $30 मिलियन डेट शामिल है। गुप्ता के मुताबिक, Yulu अप्रैल 2025 से EBITDA स्तर पर प्रॉफिटेबल है और अगले साल PAT प्रॉफिटेबिलिटी हासिल करने की उम्मीद है।
नई फंडिंग का इस्तेमाल युलु अपने फ्लीट का विस्तार, नए शहरों में पहुंच बढ़ाने और शहरी मोबिलिटी व लॉजिस्टिक्स कारोबार के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने में करेगी। कंपनी अब इक्विटी के साथ डेट फंडिंग का संतुलित इस्तेमाल करना चाहती है। गुप्ता के अनुसार, EBITDA प्रॉफिटेबिलिटी हासिल करने के बाद कंपनी करीब $10 मिलियन का डेट जुटा चुकी है। PAT प्रॉफिटेबिलिटी हासिल होने के बाद कंपनी अपने कैपेक्स को मुख्य रूप से डेट के जरिए फंड करने की योजना बना रही है।
युलु ने अगले दो वर्षों में अपने फ्लीट को बढ़ाकर 2 लाख वाहनों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। वर्तमान में कंपनी 12 शहरों में मौजूद है, जिनमें चार शहरों में वह सीधे और आठ शहरों में फ्रेंचाइजी पार्टनर्स के जरिए संचालन करती है। अगले 12 महीनों में कंपनी 20 शहरों तक पहुंचने की योजना बना रही है। कंपनी के रेवेन्यू में फिलहाल क्विक कॉमर्स की हिस्सेदारी करीब 50% है, जबकि फूड डिलीवरी और अन्य क्विक सर्विसेज से भी बड़ा योगदान मिलता है। युलु अपने मौजूदा सिंगल-सीटर लो-स्पीड वाहनों के साथ Yulu Express नाम से दो-सीटर और अधिक पेलोड क्षमता वाला मॉडल भी पेश कर रही है।
फ्लीट विस्तार के साथ युलु की बैटरी-स्वैपिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत भी बढ़ेगी। कंपनी के ज्वाइंट वेंचर Yuma, जो Magna के साथ है, के जरिए बैटरी-स्वैपिंग नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। फिलहाल एक Yulu बाइक को औसतन प्रतिदिन करीब 1.5 बैटरी स्वैप की जरूरत होती है। 2 लाख वाहनों के फ्लीट पर Yuma को अकेले युलु के लिए रोजाना करीब 3.5-4 लाख स्वैप संभालने पड़ सकते हैं, जबकि अन्य ग्राहकों को जोड़ने पर कुल वॉल्यूम 5-6 लाख स्वैप प्रतिदिन तक पहुंचने का अनुमान है। गुप्ता के अनुसार, युलु की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त केवल उसके वाहनों में नहीं, बल्कि विश्वसनीयता, डेटा, इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्राहकों के भरोसे में है। कंपनी भविष्य में लोगों की शहरी मोबिलिटी और फर्स्ट-लास्ट माइल कनेक्टिविटी पर भी दोबारा फोकस करना चाहती है।