Q1 2026 में भारत के फिनटेक सेक्टर की फंडिंग 513 मिलियन डॉलर पर स्थिर, डील्स में 54% गिरावट: रिपोर्ट

Q1 2026 में भारत के फिनटेक सेक्टर की फंडिंग 513 मिलियन डॉलर पर स्थिर, डील्स में 54% गिरावट: रिपोर्ट

Q1 2026 में भारत के फिनटेक सेक्टर की फंडिंग 513 मिलियन डॉलर पर स्थिर, डील्स में 54% गिरावट: रिपोर्ट
भारत के फिनटेक सेक्टर में 2026 की पहली तिमाही में फंडिंग लगभग स्थिर रही, लेकिन डील्स की संख्या में बड़ी गिरावट देखने को मिली। जनवरी से मार्च 2026 के दौरान कुल फंडिंग 513 मिलियन डॉलर रही, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में मामूली बढ़ोतरी दर्शाती है।


हालांकि, डील्स की संख्या में तेज गिरावट से यह साफ है कि निवेशक अब पहले की तुलना में ज्यादा सावधानी से निवेश कर रहे हैं और कम कंपनियों में पैसा लगा रहे हैं।

Tracxn की Geo Quarterly Report - India FinTech Q1 2026 के अनुसार, सेक्टर की फंडिंग सालाना आधार पर 2 प्रतिशत बढ़ी, लेकिन पिछली तिमाही की तुलना में इसमें 9 प्रतिशत की गिरावट आई। रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल निवेश लगभग स्थिर रहने के बावजूद अब कम लेकिन बड़े सौदे बाजार की दिशा तय कर रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, इस तिमाही में फंडिंग और डील्स की संख्या के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला। Q1 2025 में जहां 99 फंडिंग डील्स हुई थीं, वहीं Q1 2026 में यह संख्या घटकर केवल 45 रह गई, यानी 54 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, औसत निवेश राशि पहले की तुलना में काफी बढ़ गई क्योंकि अब वही पूंजी कम कंपनियों में बांटी जा रही है। पहली बार फंडिंग पाने वाले स्टार्टअप्स की संख्या भी घटकर 7 रह गई, जबकि पिछले साल यह 23 थी।

विभिन्न चरणों के आंकड़े भी निवेशकों की बदलती रणनीति दिखाते हैं। लेट-स्टेज फंडिंग 126 प्रतिशत बढ़कर 273 मिलियन डॉलर पहुंच गई, जो पिछली तिमाही में 121 मिलियन डॉलर थी। शुरुआती चरण की फंडिंग 214 मिलियन डॉलर रही, जबकि सीड-स्टेज फंडिंग 65 प्रतिशत गिरकर केवल 25.7 मिलियन डॉलर रह गई। इससे पता चलता है कि निवेशक अब शुरुआती स्टार्टअप्स की बजाय स्थापित और मजबूत बिजनेस मॉडल वाली कंपनियों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

इस तिमाही में निवेशकों की गतिविधियां भी काफी चुनिंदा रहीं। सीड-स्टेज में Fundamentum ने दो निवेश किए, जबकि Blume Ventures और IIMA Ventures ने एक-एक निवेश किया। शुरुआती चरण में Peak XV Partners और Lightspeed Venture Partners सबसे सक्रिय निवेशक रहे और दोनों ने तीन-तीन डील्स कीं। वहीं Accel ने दो निवेश किए।

लेट-स्टेज निवेश सीमित लेकिन बड़े रहे। Bessemer Venture Partners ने Innoviti में निवेश किया, जबकि Analog Capital ने IDfy को समर्थन दिया। प्राइवेट इक्विटी क्षेत्र में Trifecta Capital सबसे आगे रही। वहीं British International Investment ने Ecofy और Aerem जैसी कंपनियों में निवेश जारी रखा।

इस तिमाही की सबसे बड़ी खासियत एक बड़ी डील रही। फिनटेक कंपनी Weaver ने 156 मिलियन डॉलर जुटाए, जो कुल फंडिंग का लगभग एक-तिहाई हिस्सा था। Q1 2026 में यह 100 मिलियन डॉलर से ऊपर की एकमात्र डील रही। इससे पता चलता है कि अब कुछ बड़े सौदे पूरे बाजार के फंडिंग ट्रेंड को प्रभावित कर रहे हैं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि ऑनलाइन लेंडिंग सेक्टर सबसे मजबूत रहा। इस सेक्टर ने कुल फंडिंग का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा हासिल किया, जबकि अन्य फिनटेक क्षेत्रों में अपेक्षाकृत कम निवेश हुआ। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक उन बिजनेस मॉडल्स को प्राथमिकता दे रहे हैं जिनमें कमाई और विस्तार की संभावनाएं ज्यादा स्पष्ट हैं।

भौगोलिक स्तर पर मुंबई ने इस तिमाही में बेंगलुरु को पीछे छोड़ते हुए सबसे बड़ा फिनटेक फंडिंग हब बनने का स्थान हासिल किया। मुंबई की कंपनियों ने कुल फंडिंग का 61 प्रतिशत यानी 311 मिलियन डॉलर प्राप्त किया, जबकि पिछले साल यह केवल 9 प्रतिशत था। बेंगलुरु की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत रही। वहीं गुरुग्राम, दिल्ली और चेन्नई जैसे शहरों की संयुक्त हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से कम रही।

एग्जिट गतिविधियों की बात करें तो बाजार में सुस्ती बनी रही। इस तिमाही में केवल दो अधिग्रहण हुए और कोई IPO नहीं आया। साथ ही कोई नया यूनिकॉर्न भी नहीं बना। एक बड़ी डील में Polymarket ने Brahma का 1.2 बिलियन डॉलर में अधिग्रहण किया, हालांकि इसे मुख्य फिनटेक ट्रेंड की बजाय क्रिप्टो सेक्टर से जुड़ा मामला माना गया।

कुल मिलाकर रिपोर्ट यह संकेत देती है कि भारत के फिनटेक सेक्टर में निवेश का माहौल अब अधिक सतर्क और चुनिंदा हो गया है। निवेश जारी है, लेकिन अब पूंजी उन्हीं कंपनियों की ओर जा रही है जिनके बिजनेस मॉडल मजबूत और स्थिर माने जा रहे हैं।

 

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