Antler India ने अपने US मार्केट एंट्री प्रोग्राम के तीसरे एडिशन Embark 3 के लॉन्च की घोषणा की है। यह प्रोग्राम भारतीय फाउंडर्स के लिए है, जो AI-आधारित स्टार्टअप्स बनाकर ग्लोबल मार्केट में विस्तार करना चाहते हैं। इस बार एक बड़ा बदलाव यह है कि अब यह प्रोग्राम केवल Antler के पोर्टफोलियो स्टार्टअप्स तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी योग्य भारतीय फाउंडर्स के लिए खुला है।
इस प्रोग्राम के तहत चुने गए स्टार्टअप्स के लिए Antler प्री-सीड राउंड में 6 लाख से 8 लाख डॉलर तक की फंडिंग लीड करेगा, जिसमें हर टीम के लिए 4.5 लाख डॉलर का कमिटमेंट होगा। निवेश से जुड़े फैसले 15 अप्रैल तक लिए जाएंगे, जबकि प्रोग्राम मई 2026 में सैन फ्रांसिस्को में शुरू होगा। आवेदन की अंतिम तिथि 28 मार्च है।
इस प्रोग्राम का मुख्य उद्देश्य फाउंडर्स को 3 से 6 महीने के भीतर US में प्रोडक्ट-मार्केट फिट हासिल करने में मदद करना है, जो आमतौर पर 12 से 18 महीने का समय लेता है।
Antler India के पार्टनर नितिन शर्मा ने कहा, “Embark को ऐसे लोगों ने डिजाइन किया है, जो जानते हैं कि US में सफल होने के लिए क्या जरूरी है। हम अनुभवी फाउंडर्स और ऑपरेटर्स के अनुभव का लाभ देकर नए फाउंडर्स को तेजी से आगे बढ़ने का मौका दे रहे हैं।”
इस प्रोग्राम में भाग लेने वाले फाउंडर्स 4 से 6 हफ्ते सिलिकॉन वैली में बिताएंगे, जहां उन्हें अनुभवी प्रोफेशनल्स, निवेशकों और इंडस्ट्री नेटवर्क से जुड़ने का मौका मिलेगा। साथ ही वीजा, बैंकिंग, कंप्लायंस और कंपनी सेटअप जैसे जरूरी कामों में भी सहायता दी जाएगी।
Antler के अनुसार, Embark के पहले दो एडिशन काफी सफल रहे हैं, जिनमें भारत और अन्य देशों के 23 स्टार्टअप्स को सपोर्ट किया गया। इनमें से 60% से अधिक स्टार्टअप्स ने US मार्केट में अच्छी प्रगति हासिल की, जबकि आधे से ज्यादा स्टार्टअप्स को प्रोग्राम खत्म होने के 12 हफ्तों के भीतर US निवेशकों से फंडिंग मिली।
Embark 3 में इस बार केवल 4 से 5 स्टार्टअप्स को चुना जाएगा, ताकि उन्हें ज्यादा बेहतर मेंटरशिप और नेटवर्किंग का फायदा मिल सके। इसके अलावा, चुने गए स्टार्टअप्स को OpenAI, Google Cloud और AWS जैसे टेक पार्टनर्स से 10 लाख डॉलर से ज्यादा के क्रेडिट और अन्य सुविधाएं भी मिलेंगी।
Antler India ने बताया कि इस नए प्रोग्राम में पिछले अनुभवों से सीखी गई बातों को शामिल किया गया है, खासकर उन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, जिनका सामना विदेशी फाउंडर्स को US में करना पड़ता है।