भारत का इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) उद्योग अब शुरुआती प्रयोगों के दौर से निकलकर बड़े पैमाने पर विकास और लाभदायक व्यवसाय (Profitable Business) की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हालांकि इस सफर में केवल नई तकनीक ही नहीं, बल्कि ग्राहक को बेहतर वैल्यू, मजबूत सप्लाई चेन, डेटा आधारित फैसले और दीर्घकालिक सोच सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यह बात स्विच मोबिलिटी (Switch Mobility) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) गणेश मणि ने "Start-Up to Scale-Up: Signals of a Profitable EV Business in India" विषय पर चर्चा के दौरान कही।
उन्होंने कहा कि भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को लेकर पिछले कुछ वर्षों में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिला है। जहां कुछ वर्ष पहले ईवी की व्यवहार्यता पर सवाल उठाए जाते थे, वहीं आज देश की सड़कों पर इलेक्ट्रिक बसें, दोपहिया और तीनपहिया वाहन तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं। यह बदलाव बताता है कि भारत सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।
लाभदायक EV बिजनेस की कुंजी है Total Cost of Ownership
गणेश मणि ने कहा कि किसी भी ईवी व्यवसाय की सफलता का सबसे बड़ा आधार Total Cost of Ownership (TCO) है। ग्राहक केवल नई तकनीक नहीं खरीदता, बल्कि वह यह देखता है कि पूरे जीवनकाल में वाहन की कुल लागत कितनी होगी। यदि इलेक्ट्रिक वाहन संचालन और रखरखाव में पारंपरिक वाहनों से अधिक किफायती साबित होते हैं, तभी बाजार में उनकी स्वीकार्यता तेजी से बढ़ेगी।
जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक वाहनों और पारंपरिक वाहनों के बीच शुरुआती कीमत का अंतर कम होगा, वैसे-वैसे EV बाजार में तेज़ी से वृद्धि देखने को मिलेगी। यही बदलाव दोपहिया और तीनपहिया वाहनों में पहले ही दिखाई देने लगा है।
सरकारी नीतियों ने उद्योग को दी नई गति
केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं और नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि FAME, PM E-DRIVE और अन्य नई योजनाओं ने केवल सब्सिडी ही नहीं दी, बल्कि पूरे EV इकोसिस्टम को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन नीतियों की वजह से आज देश में बड़ी संख्या में स्थानीय सप्लायर, कंपोनेंट निर्माता और तकनीकी कंपनियां विकसित हो रही हैं।
उन्होंने कहा कि भारत अब केवल असेंबली तक सीमित नहीं है, बल्कि कोर मैन्युफैक्चरिंग और तकनीकी विकास की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।
डेटा और सॉफ्टवेयर बदल रहे हैं EV इंडस्ट्री
गणेश मणि ने कहा कि आधुनिक इलेक्ट्रिक वाहन केवल हार्डवेयर नहीं बल्कि पूरी तरह डेटा और सॉफ्टवेयर आधारित उत्पाद बन चुके हैं। एक कमर्शियल इलेक्ट्रिक वाहन प्रतिदिन कई गीगाबाइट डेटा उत्पन्न करता है, जिसका उपयोग वाहन की परफॉर्मेंस सुधारने, ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और ग्राहकों को बेहतर सेवाएं देने में किया जा रहा है।
भारतीय इंजीनियर अब केवल वाहन नहीं बना रहे, बल्कि स्मार्ट सॉफ्टवेयर, डेटा एनालिटिक्स और इंटेलिजेंट सिस्टम भी विकसित कर रहे हैं। यही भारत की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है।
ग्राहक दोबारा खरीदने आए, तभी मिलेगी असली सफलता
किसी भी ईवी कंपनी की वास्तविक सफलता पहली बिक्री नहीं बल्कि ग्राहक की दूसरी खरीद होती है। यदि ग्राहक वाहन से संतुष्ट है और दोबारा उसी ब्रांड को चुनता है, तो इसका मतलब है कि कंपनी सही दिशा में काम कर रही है।
उन्होंने बताया कि स्विच मोबिलिटी के कई ग्राहक लगातार नए इलेक्ट्रिक वाहन खरीद रहे हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि ईवी अब व्यावसायिक रूप से भी सफल साबित हो रहे हैं।
इलेक्ट्रिक बसें बदल रही हैं सार्वजनिक परिवहन
गणेश मणि ने कहा कि इलेक्ट्रिक बसें केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं हैं, बल्कि सार्वजनिक परिवहन को अधिक किफायती और टिकाऊ भी बना रही हैं। उन्होंने बताया कि चेन्नई सहित कई शहरों में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से डीजल बसों की तुलना में संचालन लागत में 35 से 40 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है।
उनके अनुसार, यदि इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन मजबूत होगा तो इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे ईवी बाजार पर पड़ेगा और निजी उपभोक्ताओं का भरोसा भी बढ़ेगा।
मजबूत इकोसिस्टम और गुणवत्ता क्वालिटी होगी सबसे बड़ी ताकत
ईवी उद्योग में केवल वाहन निर्माता ही नहीं, बल्कि सप्लायर, कंपोनेंट निर्माता, चार्जिंग कंपनियां और तकनीकी साझेदार भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। उद्योग को मजबूत बनाने के लिए सभी हितधारकों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने विशेष रूप से सुरक्षा और क्वालीटी पर जोर देते हुए कहा कि भारतीय ईवी उद्योग को विश्वस्तरीय गुणवत्ता वाले उत्पाद विकसित करने होंगे ताकि ग्राहकों का भरोसा लगातार बढ़े।
भारत के पास वैश्विक नेतृत्व का अवसर
अपने संबोधन के अंत में गणेश मणि ने कहा कि भारत केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं रहेगा। दक्षिण-पूर्व एशिया (ASEAN), अफ्रीका और अन्य उभरते बाजार भारतीय इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बड़े अवसर प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत के पास मजबूत इंजीनियरिंग क्षमता, विकसित होता मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम और नवाचार की शक्ति है। यदि उद्योग लगातार ग्राहक मूल्य, गुणवत्ता, डेटा और लागत दक्षता पर ध्यान देता रहा, तो भारत वैश्विक ईवी उद्योग में एक मजबूत नेतृत्वकारी भूमिका निभा सकता है।