बैटरी स्वैपिंग सॉल्यूशन देने वाली कंपनी सन मोबिलिटी (SUN Mobility) ने सरकार से मांग की है कि बैटरी स्वैपिंग तकनीक को भी अन्य ग्रीन मोबिलिटी समाधानों की तरह समान नीति सपोर्ट दिया जाए। कंपनी का कहना है कि यदि इसे सरकारी योजनाओं में शामिल किया जाता है, तो इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहनों को तेजी से अपनाने में मदद मिलेगी।
प्रवास 5.0 कार्यक्रम के दौरान सन मोबिलिटी के हेवी इलेक्ट्रिक व्हीकल (HEV) बिजनेस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) अशोक अग्रवाल ने बताया कि कंपनी ने अपनी बैटरियों का प्रमाणन (सर्टिफिकेशन) पूरा कर लिया है और टाटा स्टारबस ईवी के साथ बैटरी इंटीग्रेशन भी सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। अब कंपनी फ्लीट ऑपरेटरों के साथ बातचीत शुरू कर रही है।उन्होंने कहा कि ऑर्डर मिलने के बाद केवल तीन महीने के भीतर वाहनों की तैनाती शुरू की जा सकती है।
अशोक अग्रवाल के अनुसार, बैटरी स्वैपिंग और फास्ट चार्जिंग दोनों की अपनी-अपनी भूमिका है, लेकिन लंबी दूरी और लगातार चलने वाले कमर्शियल वाहनों, खासकर इंटरसिटी बसों के लिए बैटरी स्वैपिंग अधिक प्रभावी समाधान साबित हो सकती है। उनका कहना है कि यदि कुछ ही मिनटों में बैटरियां बदली जाएं, तो बसें लगभग 24 घंटे तक संचालन में रह सकती हैं और उनका अपटाइम 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।
उन्होंने सरकार से अपील की कि PM E-Drive और प्रस्तावित कमर्शियल वाहन फाइनेंसिंग जैसी योजनाओं में बैटरी स्वैपिंग तकनीक को भी शामिल किया जाए, ताकि सभी हरित तकनीकों को समान अवसर मिल सके।
सन मोबिलिटी के सह-संस्थापक और चेयरमैन चेतन मैनी ने कहा कि कंपनी का मॉड्यूलर मल्टी-बैटरी स्वैपिंग प्लेटफॉर्म कमर्शियल वाहनों के बड़े पैमाने पर विद्युतीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यह तकनीक कम लागत और बेहतर परिचालन दक्षता के साथ विभिन्न प्रकार के कमर्शियल वाहनों के लिए ऊर्जा समाधान उपलब्ध कराती है।
कंपनी के अनुसार, उसका बैटरी स्वैपिंग प्लेटफॉर्म 3 टन से 55 टन तक के कमर्शियल वाहनों के लिए उपयुक्त है। यह बैटरी-एज़-ए-सर्विस (BaaS) मॉडल पर काम करता है, जिसमें ग्राहक बिना बैटरी के वाहन खरीद सकते हैं और बैटरी उपयोग के लिए अलग से भुगतान कर सकते हैं। इससे शुरुआती लागत कम होती है, फ्लीट की उपयोग क्षमता बढ़ती है और इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहनों को अपनाना आसान बनता है।