भारत का इलेक्ट्रिक वाहन बाजार अगले छह वर्षों में तेज़ी से विस्तार करेगा और वर्ष 2032 तक देश में इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों की वार्षिक बिक्री 15 लाख यूनिट तक पहुंचने की संभावना है। यह अनुमान Frost & Sullivan द्वारा जारी नई रिपोर्ट में लगाया गया है, जिसे कंपनी के रिसर्च डायरेक्टर प्रज्योत एन. साठे ने प्रस्तुत किया। रिपोर्ट में भारत और वैश्विक EV बाजार के मौजूदा रुझानों, भविष्य की संभावनाओं और उद्योग पर प्रभाव डालने वाले प्रमुख कारकों का विस्तृत विश्लेषण किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर वर्ष 2025 में 2.16 करोड़ इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहन बिके, जिनमें लगभग 66% बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन (BEV) और 34% प्लग-इन हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहन (PHEV) थे। इसी अवधि में वैश्विक EV पैठ (Penetration) 21 प्रतिशत से बढ़कर 25 प्रतिशत हो गई। एशिया-प्रशांत क्षेत्र 35 प्रतिशत से अधिक EV पैठ के साथ दुनिया का सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है।
भारत में EV बाजार तेज़ी से बढ़ेगा
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में वर्ष 2025 के दौरान लगभग 1.78 लाख इलेक्ट्रिक पैसेंजर कारों की बिक्री हुई। वर्ष 2026 में यह आंकड़ा बढ़कर 2.78 लाख यूनिट तक पहुंचने का अनुमान है, जो लगभग 56 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्शाता है। वहीं 2032 तक भारत का EV बाजार करीब 15 लाख यूनिट वार्षिक बिक्री के स्तर पर पहुंच सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तेज़ वृद्धि के साथ देश में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का भी समान गति से विस्तार करना होगा, ताकि बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके।
स्थानीयकरण और नई बैटरी तकनीक बनेगी विकास का आधार
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत सरकार की स्थानीयकरण (Localization) नीतियों से आयात पर निर्भरता कम हुई है और घरेलू सप्लाई चेन मजबूत हो रही है। आने वाले वर्षों में LFP, LMFP (Lithium Manganese Iron Phosphate) जैसी नई बैटरी तकनीकों, 800-वोल्ट आर्किटेक्चर, 5-इन-1 इंटीग्रेटेड ई-एक्सल, उन्नत थर्मल मैनेजमेंट और तेज़ चार्जिंग तकनीकों का उपयोग तेजी से बढ़ेगा।
साथ ही, सॉफ्टवेयर-डिफाइंड व्हीकल (SDV), कनेक्टेड फीचर्स और AI आधारित बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम भी EV उद्योग के प्रमुख ट्रेंड बनेंगे।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर होगा सबसे ज्यादा ध्यान
रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में भारत में लगभग 29,000 सार्वजनिक चार्जिंग कनेक्टर स्थापित हैं, जबकि देश में करीब 5 लाख इलेक्ट्रिक कारें सड़कों पर चल रही हैं। ऐसे में आने वाले वर्षों में सार्वजनिक और निजी दोनों स्तरों पर चार्जिंग नेटवर्क का तेजी से विस्तार आवश्यक होगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी EV अपनाने की गति को बढ़ाएगा।
कुछ राज्यों का EV बाजार पर दबदबा
रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र, दिल्ली, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना और केरल वर्तमान में भारत के EV बाजार का नेतृत्व कर रहे हैं। इन राज्यों का वर्ष 2025 में देश की कुल इलेक्ट्रिक कार बिक्री में लगभग 60 प्रतिशत योगदान रहा। हालांकि भविष्य में नई राज्य EV नीतियों के लागू होने के साथ अन्य राज्यों की हिस्सेदारी भी बढ़ने की संभावना है।
तीन प्रमुख निष्कर्ष
रिपोर्ट में तीन प्रमुख निष्कर्ष सामने आए हैं—
- स्थानीयकरण (Localization) से आयात निर्भरता घटेगी, लागत कम होगी और सप्लाई चेन अधिक मजबूत बनेगी।
- सार्वजनिक और निजी चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ाएगा और EV अपनाने की रफ्तार तेज करेगा।
- वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाएं और ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग को और बढ़ावा देंगे।
2030 के बाद निर्यात और नेट-जीरो पर होगा ध्यान
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2028 से 2030 के बीच बैटरी इकोसिस्टम, मानकीकरण (Standardization) और विनिर्माण पर जोर रहेगा। वहीं 2030 के बाद भारत में नेट-जीरो, डीकार्बोनाइजेशन और एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड ईवी हब जैसे विषय उद्योग के प्रमुख विकास क्षेत्र बनेंगे।
रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया है कि मजबूत सरकारी नीतियां, लोकल मैन्युफैक्चरिंग, बेहतर बैटरी तकनीक, चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार और डिजिटल तकनीकों का बढ़ता उपयोग भारत को आने वाले वर्षों में दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रिक वाहन बाजारों में शामिल कर सकता है।