भारत में खेल प्रतिभाओं की पहचान लंबे समय से भौगोलिक दूरी, बुनियादी ढांचे की कमी और प्रशिक्षित मूल्यांकनकर्ताओं के अभाव जैसी चुनौतियों से जूझती रही है। ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में मौजूद कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी औपचारिक चयन और ट्रायल प्रणाली तक पहुंच नहीं बना पाते, जिससे उनकी प्रतिभा अक्सर अनदेखी रह जाती है।
इसी गंभीर समस्या के समाधान के रूप में देश के सबसे बड़े सरकारी हैकथॉन से एक छात्र-नेतृत्व वाली अभिनव पहल सामने आई है। यह समाधान केवल एक साधारण स्मार्टफोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से खेल प्रतिभा की पहचान और आकलन करने का दावा करता है।
Smart India Hackathon 2025 में रिकॉर्ड भागीदारी
Smart India Hackathon 2025 में इस वर्ष अभूतपूर्व भागीदारी देखने को मिली। कुल 13,91,884 छात्रों ने पंजीकरण कराया, जबकि 68,766 टीमों ने 72,165 आइडिया प्रस्तुत किए। ये आइडिया 271 विभिन्न समस्या वक्तव्यों पर आधारित थे।
युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय द्वारा जारी समस्या वक्तव्य के तहत इस श्रेणी में लगभग 500 टीमों ने राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा की, जिससे यह हैकथॉन की सबसे प्रतिस्पर्धी श्रेणियों में से एक बन गई।
छात्र टीम ‘अंतरदृष्टि’ को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी सफलता
Scaler School of Technology की टीम ‘अंतरदृष्टि’ को फिटनेस और स्पोर्ट्स श्रेणी में “Outstanding Winner” घोषित किया गया। टीम ने एक AI आधारित मोबाइल ऐप विकसित किया, जिसका उद्देश्य पूरे भारत में खेल प्रतिभा आकलन को सरल, सुलभ और समान बनाना है।
आखिरी समय में बदला गया प्रोजेक्ट, फिर भी मिली जीत
दिलचस्प बात यह है कि यह टीम का प्रारंभिक प्रोजेक्ट नहीं था। टीम ने पहले लगभग दो सप्ताह तक ट्रैफिक मैनेजमेंट समाधान पर काम किया था। लेकिन हैकथॉन के अंतिम चरण में उन्होंने खेल प्रतिभा आकलन से जुड़ी समस्या पर काम करने का निर्णय लिया। कम समय में नया समाधान तैयार कर टीम ने वीडियो और प्रेजेंटेशन सबमिट की। इसके बाद उन्होंने आंतरिक चयन राउंड पार किया, कानपुर में आयोजित ग्रैंड फिनाले के लिए क्वालिफाई किया और अंततः राष्ट्रीय विजेता बनने में सफलता हासिल की।
भारत में खेल प्रतिभा खोजने की मूल समस्या
यह समस्या Sports Authority of India द्वारा प्रस्तुत की गई थी। भारत के ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में खेल प्रतिभा की पहचान इसलिए कठिन हो जाती है क्योंकि वहां पर्याप्त खेल सुविधाएं, प्रशिक्षित कोच और नियमित ट्रायल आयोजित करने के संसाधन उपलब्ध नहीं होते। परिणामस्वरूप, खेल से जुड़े अवसर अधिकतर शहरी क्षेत्रों तक सीमित रह जाते हैं और बड़ी संख्या में प्रतिभाशाली खिलाड़ी राष्ट्रीय मंच तक पहुंचने से वंचित रह जाते हैं।
समाधान: स्मार्टफोन को बनाया फिटनेस आकलन टूल
टीम द्वारा विकसित यह मोबाइल-फर्स्ट AI ऐप एक साधारण स्मार्टफोन को ही फिटनेस आकलन उपकरण में बदल देता है। खिलाड़ी बिना इंटरनेट कनेक्शन के भी अपने फिटनेस टेस्ट रिकॉर्ड कर सकते हैं और कनेक्टिविटी मिलने पर डेटा अपलोड कर सकते हैं।
यह ऐप ऑन-डिवाइस AI की मदद से वीडियो का विश्लेषण करता है, मूवमेंट और रेपिटेशन गिनता है तथा किसी भी प्रकार की त्रुटि या संभावित हेरफेर की पहचान कर सकता है। इससे प्रशिक्षित मूल्यांकनकर्ताओं पर निर्भरता कम होती है और अलग-अलग स्थानों पर एक समान मानकों के आधार पर परीक्षण संभव हो पाता है।
वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप डिज़ाइन
यह ऐप उम्र और लिंग के आधार पर प्रदर्शन का मूल्यांकन करता है। इसमें ताकत, स्टैमिना, सहनशक्ति और फुर्ती जैसे प्रमुख फिटनेस मानकों को मापा जाता है। इसके लिए किसी विशेष उपकरण, पहनने योग्य डिवाइस या टेस्टिंग सेंटर की आवश्यकता नहीं होती, केवल स्मार्टफोन कैमरा ही पर्याप्त है।
इस तरह यह प्लेटफॉर्म देशभर में बड़े स्तर पर प्रतिभा खोजने में सहायक हो सकता है, विशेष रूप से उन जिलों और गांवों में जहां औपचारिक खेल ट्रायल बहुत कम आयोजित होते हैं।
राष्ट्रीय जीत और आगे की योजना
टीम के सदस्यों जसलीन छाबड़ा, सिद्धांत के., अस्मित बनिक, पियूष गोयनका, शंभु यादव और तनिष कोठारी ने राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीतकर 1.5 लाख रुपये का नकद पुरस्कार प्राप्त किया।
उनके समाधान को “Outstanding” इसलिए माना गया क्योंकि यह तुरंत देशव्यापी स्तर पर लागू किए जाने की क्षमता रखता है। हालांकि टीम इसे केवल एक शुरुआत मानती है। अब वे ऐप के यूजर इंटरफेस को बेहतर बनाने और इसकी क्षमताओं का विस्तार करने पर काम कर रहे हैं, ताकि भविष्य में इसे औपचारिक खेल प्रतिभा खोज प्रणाली से जोड़ा जा सके।
अत: यह पहल ऐसे भारत की ओर इशारा करती है, जहां खेल के अवसर भौगोलिक सीमाओं से नहीं बल्कि प्रतिभा, क्षमता और मेहनत के आधार पर तय होंगे। तकनीक के सही उपयोग से खेल जगत में समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।