नई रूपरेखा के तहत स्टार्टअप्स में सीधे निवेश नहीं किया जाएगा, बल्कि SEBI में रजिस्टर्ड कैटेगरी I और II अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) के जरिए पैसा लगाया जाएगा। ये AIFs आगे DPIIT से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में निवेश करेंगे। इससे निवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता, बेहतर प्रबंधन और निजी निवेशकों की भागीदारी बढ़ेगी।
इस योजना के कार्यान्वयन के लिए Small Industries Development Bank of India को मुख्य एजेंसी बनाया गया है। SIDBI AIFs का चयन करेगा और उनके प्रदर्शन की निगरानी भी करेगा। DPIIT इस योजना की पहुंच बढ़ाने और अलग-अलग क्षेत्रों में विशेषज्ञता लाने के लिए एक और साझेदार एजेंसी जोड़ने की योजना बना रहा है।
स्टार्टअप फंडिंग की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए AIFs को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है। इनमें डीप टेक्नोलॉजी फंड, शुरुआती स्टार्टअप्स के लिए माइक्रो वेंचर कैपिटल फंड, मैन्युफैक्चरिंग इनोवेशन फंड और सेक्टर-अज्ञेय (sector-agnostic) फंड शामिल हैं। हर श्रेणी के लिए फंड का आकार, सरकारी निवेश की सीमा और निजी पूंजी जुटाने के नियम तय किए गए हैं, ताकि निवेश सही क्षेत्रों में पहुंचे।
AIFs के चयन के लिए दो चरणों की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। पहले चरण में जांच और मूल्यांकन (screening और due diligence) किया जाएगा, इसके बाद वेंचर कैपिटल इन्वेस्टमेंट कमेटी प्रस्तावों का मूल्यांकन करेगी। यह कमेटी फंड मैनेजर के अनुभव और निवेश रणनीति के आधार पर निर्णय लेगी, जिसमें उद्योग, शिक्षा और इनोवेशन क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल होंगे।
FoF 2.0 सीधे फंडिंग देने के बजाय एक “कैटेलिस्ट” की तरह काम करेगा, जिससे सरकारी निवेश के साथ निजी निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, इस योजना में यह भी प्रावधान है कि निवेश से होने वाले कुछ रिटर्न को मेंटरशिप और स्टार्टअप इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में दोबारा लगाया जाएगा।
यह योजना विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और संस्थागत निवेशकों की भागीदारी की अनुमति देती है और भविष्य की जरूरतों के अनुसार इसमें बदलाव की सुविधा भी रखती है। कुल मिलाकर, यह पहल भारत में वेंचर फंडिंग को मजबूत करने और विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार आधारित स्टार्टअप्स को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।