भारत के एथेनॉल निर्माताओं की शीर्ष संस्था All India Distillers' Association (AIDA) ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय को पत्र लिखकर CAFE-III (Corporate Average Fuel Consumption) के प्रस्तावित नियमों में व्यापक संशोधन की मांग की है। ये नियम FY 2027–28 से FY 2031–32 की अवधि को कवर करते हैं।
22 अप्रैल 2026 को मंत्रालय के सचिव Neeraj Mittal को भेजे गए पत्र में AIDA के अध्यक्ष Vijendra Singh ने मौजूदा ड्राफ्ट को “रणनीतिक रूप से असंतुलित” बताया। उनका कहना है कि यह ढांचा बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (BEVs) और प्लग-इन हाइब्रिड्स को अधिक लाभ देता है, जबकि एथेनॉल-आधारित फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल्स (FFVs) को मात्र 1.1 का सीमित प्रोत्साहन मिलता है।
AIDA ने सरकार के सामने चार प्रमुख मांगें रखी हैं। इसमें FFVs के लिए वॉल्यूम डेरोगेशन फैक्टर को बढ़ाकर 2.0–2.5 करने, टेक्नोलॉजी-न्यूट्रल पॉलिसी लागू करने, CAFE-III को एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (EBP) के साथ जोड़ने और घरेलू एथेनॉल के “वेल-टू-व्हील” उत्सर्जन लाभ को आधिकारिक मान्यता देने की मांग शामिल है।
संस्था का मानना है कि FFVs एक किफायती और तुरंत लागू किया जा सकने वाला डिकार्बोनाइजेशन विकल्प हैं, जो इलेक्ट्रिफिकेशन से जुड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर चुनौतियों और आयात पर निर्भरता को कम कर सकते हैं।