यूपी में रॉकलिंक इंडिया ने शुरू किया बैटरी रीसाइक्लिंग प्लांट

यूपी में रॉकलिंक इंडिया ने शुरू किया बैटरी रीसाइक्लिंग प्लांट

यूपी में रॉकलिंक इंडिया ने शुरू किया बैटरी रीसाइक्लिंग प्लांट
रॉकलिंक इंडिया ने उत्तर प्रदेश के सिकंदराबाद में अत्याधुनिक बैटरी और रेयर अर्थ रिसाइक्लिंग प्लांट शुरू किया है, जिसकी क्षमता 10,000 टन प्रति वर्ष है।

जर्मनी स्थित रॉकलिंक ग्रुप की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी Rocklink India Pvt. Ltd. ने उत्तर प्रदेश के सिकंदराबाद स्थित यूपीएसआईडीसी इंडस्ट्रियल एरिया में एक एकीकृत रिसाइक्लिंग प्लांट की शुरुआत की है। यह सुविधा लिथियम-आयन बैटरियों, रेयर अर्थ मैग्नेट्स और मेटल युक्त औद्योगिक कचरे से उपयोगी मैटीरियल की रिकवरी पर केंद्रित है।

यह प्लांट शुरुआती चरण में हर साल 10,000 टन लिथियम-आयन बैटरियों को रिसायकल करने की क्षमता रखता है, जबकि रेयर अर्थ मैग्नेट्स की प्रोसेसिंग क्षमता 60 टन प्रति माह है। इसके अलावा, 1,500 टन सालाना क्षमता वाली रेयर अर्थ क्लोराइड प्रोसेसिंग लाइन को 2026 की पहली तिमाही तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

EPR-रजिस्टर्ड यह बैटरी रिसाइक्लिंग यूनिट 95 प्रकार के प्री और पोस्ट-कंज्यूमर बैटरी स्क्रैप को प्रोसेस करने में सक्षम है। कंपनी की R2 तकनीक के जरिए एल्युमिनियम, कॉपर और आयरन जैसे मटेरियल्स को 98% से अधिक दक्षता के साथ रिकवर किया जाता है, वहीं हानिकारक गैसों को सुरक्षित रूप से कैप्चर करने के लिए एडवांस्ड ट्रीटमेंट सिस्टम भी लगाया गया है।

कंपनी के निदेशक Leonard Alexander Ansorge ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, नवीकरणीय ऊर्जा और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग के लिए जरूरी कच्चे माल के एक सर्कुलर इकोसिस्टम को मजबूत करना है।

रेयर अर्थ सेगमेंट में यह सुविधा NdFeB, SmCo और AlNiCo जैसे मैग्नेट्स के लिए सेमी-ऑटोमेटेड डिस्मेंटलिंग लाइनों से लैस है, जो इलेक्ट्रिक मोटर्स और इंडस्ट्रियल जेनरेटर में व्यापक रूप से उपयोग होते हैं। कंपनी यूरोप में 2018 से सक्रिय अपने Magcycle™ मॉडल को भारत में भी लागू करने की योजना बना रही है, जिससे मैग्नेट स्क्रैप के कलेक्शन और लॉजिस्टिक्स को बेहतर बनाया जा सके।

रॉकलिंक इंडिया “Know Your Material” अप्रोच के तहत इन-हाउस लैब टेस्टिंग के जरिए मटेरियल की संरचना और गुणवत्ता का विश्लेषण करती है, ताकि सही रीसाइक्लिंग प्रक्रिया अपनाई जा सके। जो मटेरियल सीधे रीसायकल नहीं हो पाते, उन्हें 22 मीटर लंबे रोटरी किल्न में प्रोसेस कर रेयर अर्थ क्लोराइड में बदला जाता है।

भविष्य में कंपनी इस सुविधा में बैटरी रिफर्बिशमेंट ऑपरेशंस भी जोड़ने की योजना बना रही है, जिससे उपयोग योग्य बैटरी सेल्स का पुन: उपयोग संभव हो सके। साथ ही, रॉकलिंक टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स, रिसर्च संस्थानों और सरकारी एजेंसियों के साथ सहयोग कर रीसाइक्लिंग तकनीकों को और बेहतर बनाने पर भी काम करेगी।

Subscribe Newsletter
Submit your email address to receive the latest updates on news & host of opportunities