भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली (IIT Delhi) ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर भारतीय उच्च शिक्षा की प्रतिष्ठा को मजबूत किया है। QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में IIT दिल्ली ने पांच स्थान की छलांग लगाते हुए 118वां स्थान हासिल किया है। इसके साथ ही संस्थान ने भारत के सबसे उच्च रैंक वाले शिक्षण संस्थान के रूप में अपनी स्थिति बरकरार रखी है।
18 जून को जारी QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 के अनुसार IIT दिल्ली पिछले वर्ष के 123वें स्थान से आगे बढ़कर 118वें स्थान पर पहुंच गया है। वहीं IIT बॉम्बे 134वें स्थान पर रहा और भारतीय संस्थानों में दूसरा सर्वोच्च रैंक हासिल करने में सफल रहा। संस्थान के अनुसार IIT दिल्ली की यह उपलब्धि QS रैंकिंग के इतिहास में किसी भारतीय संस्थान द्वारा हासिल किए गए सर्वोच्च वैश्विक स्थानों में से एक के बराबर है। यह भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों की बढ़ती वैश्विक पहचान, शोध क्षमता और शिक्षा की गुणवत्ता को भी दर्शाती है।
रोजगार और करियर अवसरों में मजबूत प्रदर्शन
IIT दिल्ली के प्रदर्शन में सुधार के पीछे कई महत्वपूर्ण संकेतकों का योगदान रहा है। संस्थान की Employer Reputation रैंकिंग में 11 स्थान का सुधार हुआ है और यह वैश्विक स्तर पर 39वें स्थान पर पहुंच गई है। यह संकेतक इस बात को मापता है कि दुनिया भर के नियोक्ता किसी संस्थान के स्नातकों को कितना सक्षम और रोजगार के लिए तैयार मानते हैं।
इसके अलावा, Employment Outcomes श्रेणी में IIT दिल्ली ने 60 स्थानों की बड़ी छलांग लगाई है। यह श्रेणी छात्रों की रोजगार क्षमता, नेतृत्व विकास और करियर सफलता को मापती है। इस उपलब्धि से यह स्पष्ट होता है कि IIT दिल्ली के छात्र वैश्विक नौकरी बाजार में मजबूत पहचान बना रहे हैं।
शोध और नवाचार में बढ़ी वैश्विक पहचान
संस्थान ने Citations per Faculty संकेतक में भी 26 स्थानों का सुधार दर्ज किया है। यह मापदंड किसी विश्वविद्यालय द्वारा किए गए वैज्ञानिक शोध की गुणवत्ता और उसके प्रभाव को दर्शाता है। अधिक शोध उद्धरण यह संकेत देते हैं कि संस्थान का अनुसंधान कार्य वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त कर रहा है और अकादमिक जगत में उसका प्रभाव बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि IIT दिल्ली का लगातार बढ़ता शोध उत्पादन, उद्योगों के साथ सहयोग और नवाचार पर फोकस इसकी अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को मजबूत कर रहा है। संस्थान के कई शोध परियोजनाएं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऊर्जा, स्वास्थ्य, संचार और उन्नत इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
विश्वस्तरीय शिक्षा पर संस्थान का फोकस
रैंकिंग पर प्रतिक्रिया देते हुए IIT दिल्ली के डीन (प्लानिंग) और रैंकिंग सेल प्रमुख प्रोफेसर सोमनाथ बैद्य रॉय ने कहा कि संस्थान का मुख्य लक्ष्य विश्वस्तरीय और किफायती तकनीकी शिक्षा प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि IIT दिल्ली दुनिया भर के छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए पसंदीदा गंतव्य बनने की दिशा में लगातार काम कर रहा है।
उन्होंने बताया कि संस्थान का नया पाठ्यक्रम, आधुनिक बुनियादी ढांचा, अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग आने वाले वर्षों में इसकी गुणवत्ता और प्रभाव को और बढ़ाएंगे। उनके अनुसार रैंकिंग संस्थान का लक्ष्य नहीं बल्कि अच्छे कार्यों का परिणाम है।
IIT दिल्ली ने पिछले चार वर्षों में अपनी वैश्विक रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2024 में संस्थान 197वें स्थान पर था, जबकि 2027 में यह 118वें स्थान पर पहुंच गया है। यानी चार वर्षों में संस्थान ने 79 स्थानों की प्रभावशाली छलांग लगाई है।
इंजीनियरिंग विषयों में भी शानदार प्रदर्शन
इस वर्ष मार्च में जारी QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग बाय सब्जेक्ट 2026 में भी IIT दिल्ली ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया था। संस्थान के कई विषय वैश्विक टॉप-50 में शामिल हुए थे। इनमें इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस, केमिकल इंजीनियरिंग और सिविल इंजीनियरिंग प्रमुख हैं।
इसके अलावा IIT दिल्ली ने Engineering and Technology श्रेणी में वैश्विक स्तर पर 36वां स्थान हासिल किया और इस क्षेत्र में भी भारत का सबसे उच्च रैंक वाला संस्थान बना रहा।
भारतीय उच्च शिक्षा के लिए सकारात्मक संकेत
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि IIT दिल्ली की यह उपलब्धि केवल एक संस्थान की सफलता नहीं, बल्कि भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली की बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता का प्रतीक है। बेहतर शोध, मजबूत उद्योग सहयोग, रोजगार-केंद्रित शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के माध्यम से भारतीय संस्थान वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।
IIT दिल्ली और IIT बॉम्बे जैसे संस्थानों का लगातार बेहतर प्रदर्शन भारत को वैश्विक शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह उपलब्धि देश के छात्रों, शोधकर्ताओं और शिक्षा जगत के लिए उत्साहजनक संकेत मानी जा रही है।