भारत को सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए गुजरात सरकार ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) गांधीनगर में ₹190 करोड़ की लागत से अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर रिसर्च एवं ट्रेनिंग हब स्थापित करने की घोषणा की है। इस केंद्र का उद्देश्य इंजीनियरिंग छात्रों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों और उद्योग से जुड़े पेशेवरों को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण और अनुसंधान सुविधाएं उपलब्ध कराना है, ताकि देश में सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार किया जा सके।
इस नए केंद्र का नाम Silicon and Advanced Semiconductor Manufacturing Research and Training Hub (SAMARTH) रखा गया है। यह परियोजना केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), गुजरात सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा IIT गांधीनगर के संयुक्त सहयोग से विकसित की जा रही है। संस्थान के अनुसार यह केंद्र जल्द ही संचालन शुरू करेगा।
भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को मिलेगा नया बल
भारत सरकार पिछले कुछ वर्षों से देश में सेमीकंडक्टर निर्माण को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी रणनीति के तहत IIT गांधीनगर में स्थापित किया जा रहा SAMARTH केंद्र अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास को एक साथ जोड़ने का कार्य करेगा।
इस केंद्र के माध्यम से छात्रों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि उद्योग की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, जिससे वे सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन (Fab) उद्योग में रोजगार के लिए पूरी तरह तैयार हो सकें।
इंजीनियरिंग छात्रों को मिलेगा उद्योग आधारित प्रशिक्षण
SAMARTH का मुख्य उद्देश्य इंजीनियरिंग छात्रों को आधुनिक सेमीकंडक्टर तकनीकों से परिचित कराना और उन्हें उद्योग की मांग के अनुरूप कौशल प्रदान करना है।
केंद्र में अंडरग्रेजुएट (UG), पोस्टग्रेजुएट (PG) और पीएचडी छात्रों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। यहां छात्रों को सेमीकंडक्टर डिजाइन, निर्माण प्रक्रिया, चिप निर्माण तकनीक, इंटीग्रेटेड सर्किट (IC) डिजाइन और अन्य उन्नत तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा। इसके अलावा शिक्षकों और उद्योग विशेषज्ञों के लिए भी अपस्किलिंग (Upskilling) कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि वे नवीनतम तकनीकों से स्वयं को अपडेट रख सकें।
अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं से लैस होगा SAMARTH
यह केंद्र आधुनिक अनुसंधान सुविधाओं और विश्वस्तरीय प्रयोगशालाओं से सुसज्जित होगा। यहां नैनो-फैब्रिकेशन, CMOS प्रोसेस ट्रेनिंग, सेमीकंडक्टर प्रोसेस एवं डिवाइस डिजाइन, डिवाइस मॉडलिंग, इंटीग्रेटेड सर्किट (IC) डिजाइन, प्रोटोटाइप विकास तथा डिवाइस प्रोसेस कैरेक्टराइजेशन जैसी अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी।
इन प्रयोगशालाओं में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की गुणवत्ता जांच, परीक्षण और सेमीकंडक्टर निर्माण प्रक्रियाओं पर अनुसंधान किया जाएगा, जिससे छात्रों और शोधकर्ताओं को वैश्विक स्तर की तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
पांच वर्षों में 10,000 से अधिक लोगों को मिलेगा प्रशिक्षण
SAMARTH केंद्र ने अगले पांच वर्षों में 10,000 से अधिक लोगों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसमें लगभग 5,600 स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध छात्र, 1,500 व्यावसायिक एवं तकनीकी शिक्षा के विद्यार्थी, 1,000 सर्टिफिकेट कोर्स प्रतिभागी, 230 शिक्षक और 230 उद्योग विशेषज्ञ शामिल होंगे।
इसके अलावा 2,700 से अधिक स्कूल और कॉलेज छात्रों को समर स्कूल, कार्यशालाओं और एक-दिवसीय परिचय कार्यक्रमों के माध्यम से सेमीकंडक्टर तकनीक और करियर अवसरों से परिचित कराया जाएगा।
गुजरात के इंजीनियरिंग कॉलेजों को भी मिलेगा लाभ
IIT गांधीनगर राज्य के विभिन्न इंजीनियरिंग कॉलेजों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) करने की तैयारी कर रहा है।
इन समझौतों के बाद गुजरात के विभिन्न इंजीनियरिंग संस्थानों के छात्र भी नाममात्र शुल्क पर SAMARTH के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग ले सकेंगे। इससे राज्यभर के हजारों विद्यार्थियों को आधुनिक सेमीकंडक्टर शिक्षा और प्रशिक्षण का लाभ मिलेगा।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से होगा सहयोग
SAMARTH केंद्र केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों तथा उद्योगों के साथ सहयोग भी करेगा।
संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं, प्रशिक्षण कार्यक्रम, तकनीकी कार्यशालाएं और ज्ञान आदान-प्रदान के माध्यम से भारत में सेमीकंडक्टर अनुसंधान को नई गति मिलने की उम्मीद है। इससे छात्रों को वैश्विक स्तर की तकनीकों और विशेषज्ञों के साथ काम करने का अवसर भी मिलेगा।
लघु पाठ्यक्रम और समर स्कूल भी होंगे शुरू
नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रमों के अलावा SAMARTH केंद्र शॉर्ट-टर्म सर्टिफिकेट कोर्स, समर स्कूल, वर्कशॉप और आउटरीच कार्यक्रम भी आयोजित करेगा। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य स्कूल और कॉलेज स्तर पर ही छात्रों में सेमीकंडक्टर तकनीक के प्रति रुचि विकसित करना तथा उन्हें भविष्य के करियर विकल्पों से परिचित कराना है।
भारत को सेमीकंडक्टर निर्माण में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम
IIT गांधीनगर ने इस परियोजना के लिए आवश्यक उपकरणों की खरीद और बुनियादी ढांचे के निर्माण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। वहीं इस संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि भारत का लक्ष्य केवल सेमीकंडक्टर फैक्ट्री स्थापित करना नहीं, बल्कि डिजाइन, अनुसंधान, निर्माण, मशीनरी, लॉजिस्टिक्स और कुशल मानव संसाधन सहित पूरे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण करना है।
इस संदर्भ में विशेषज्ञों का मानना है कि IIT गांधीनगर में स्थापित होने वाला SAMARTH केंद्र इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगा। यह न केवल इंजीनियरिंग छात्रों को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण देगा, बल्कि भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में मजबूत पहचान दिलाने और 'मेक इन इंडिया', 'आत्मनिर्भर भारत' तथा India Semiconductor Mission के लक्ष्यों को गति देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।