भारत-यूके शिक्षा सहयोग मजबूत, बेंगलुरु में स्थापित होगा लिवरपूल विश्वविद्यालय का नया कैंपस

भारत-यूके शिक्षा सहयोग मजबूत, बेंगलुरु में स्थापित होगा लिवरपूल विश्वविद्यालय का नया कैंपस

भारत-यूके शिक्षा सहयोग मजबूत, बेंगलुरु में स्थापित होगा लिवरपूल विश्वविद्यालय का नया कैंपस
शिक्षा मंत्रालय ने यूनाइटेड किंगडम के प्रतिष्ठित लिवरपूल विश्वविद्यालय को कर्नाटक के बेंगलुरु में अपना शाखा परिसर (ब्रांच कैंपस) स्थापित करने के लिए औपचारिक रूप से अनुमोदन पत्र (एलओए) प्रदान किया है।


राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत उच्च शिक्षा के अंतर्राष्ट्रीयकरण को बढ़ावा देने की दिशा में भारत ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शिक्षा मंत्रालय ने यूनाइटेड किंगडम के प्रतिष्ठित लिवरपूल विश्वविद्यालय को कर्नाटक के बेंगलुरु में अपना शाखा परिसर (ब्रांच कैंपस) स्थापित करने के लिए औपचारिक रूप से अनुमोदन पत्र (LoA) प्रदान किया है। यह निर्णय भारत को वैश्विक शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

अनुमोदन पत्र उच्च शिक्षा विभाग के सचिव एवं यूजीसी के अध्यक्ष डॉ. विनीत जोशी ने लिवरपूल विश्वविद्यालय बेंगलुरु के प्रोवोस्ट प्रोफेसर रिचर्ड ग्रोस को सौंपा। इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और यूनाइटेड किंगडम की विदेश सचिव यवेट कूपर भी उपस्थित रहे।

भारत-यूके शिक्षा साझेदारी को मिला नया आयाम

यह घोषणा भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच "इंडिया-यूके विजन 2035" की पहली मंत्रिस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान की गई। इस अवसर को दोनों देशों के बीच शिक्षा क्षेत्र में बढ़ते सहयोग का प्रतीक माना जा रहा है। कार्यक्रम में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी तथा भारत में ब्रिटिश उच्चायुक्त लिंडी कैमरन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

लिवरपूल विश्वविद्यालय को भारत में कैंपस स्थापित करने की प्रक्रिया के तहत 26 मई 2025 को नई दिल्ली में यूजीसी के "भारत में विदेशी उच्च शिक्षण संस्थानों के कैंपस की स्थापना और संचालन विनियम, 2023" के अंतर्गत आशय पत्र (एलओआई) प्रदान किया गया था। इसके बाद पिछले एक वर्ष में विश्वविद्यालय ने आवश्यक शैक्षणिक, प्रशासनिक, बुनियादी ढांचा और नियामकीय तैयारियां पूरी कीं।

UGC द्वारा सभी तैयारियों और नियमों के अनुपालन का मूल्यांकन करने के बाद विश्वविद्यालय को अंतिम अनुमोदन पत्र प्रदान किया गया है, जिससे वह भारत में अपना संचालन शुरू कर सकेगा। यह कदम विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में लाने की एनईपी 2020 की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

छात्रों को मिलेंगे विश्वस्तरीय शिक्षा के अवसर

बेंगलुरु में स्थापित होने वाला यह परिसर भारतीय छात्रों को विश्वस्तरीय शिक्षा प्राप्त करने का अवसर देगा। विश्वविद्यालय यहां बिजनेस मैनेजमेंट, कंप्यूटर साइंस, गेम डिजाइन, फाइनेंस और बायोमेडिकल साइंस जैसे विषयों में स्नातक और परास्नातक कार्यक्रम शुरू करेगा। भविष्य में इंजीनियरिंग, डेटा साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य उभरते क्षेत्रों में भी पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना है।

इस नए कैंपस के माध्यम से छात्रों को विदेश गए बिना अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा और वैश्विक मान्यता प्राप्त डिग्री हासिल करने का अवसर मिलेगा। साथ ही, उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे रोजगारोन्मुख शिक्षा को मजबूती मिलेगी।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि भारत में विश्व के प्रमुख विश्वविद्यालयों की उपस्थिति युवाओं के लिए नए शैक्षणिक अवसरों का द्वार खोलेगी। उन्होंने कहा कि यह कदम एनईपी 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है और भारत को वैश्विक शिक्षा, अनुसंधान तथा नवाचार केंद्र बनाने के लक्ष्य को मजबूत करेगा।

NEP 2020 के लक्ष्यों को मिलेगा बल

धर्मेंद्र प्रधान के अनुसार, ऐसे संस्थानों के आने से भारतीय और विदेशी विश्वविद्यालयों के बीच शैक्षणिक सहयोग बढ़ेगा, संयुक्त शोध परियोजनाओं को बढ़ावा मिलेगा और छात्रों को वैश्विक स्तर के सीखने के अवसर प्राप्त होंगे। इससे भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के अनुरूप विकसित होने में मदद मिलेगी।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी इस अवसर को भारत-यूके रणनीतिक साझेदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि "विजन 2035" के तहत दोनों देशों के बीच शिक्षा, प्रौद्योगिकी, रक्षा, जलवायु और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं, जिनमें प्रौद्योगिकी सुरक्षा पहल, रक्षा औद्योगिक रोडमैप, जलवायु प्रौद्योगिकी स्टार्टअप फंड और अपतटीय पवन ऊर्जा कार्यबल जैसी पहल शामिल हैं। लिवरपूल विश्वविद्यालय का भारत में कैंपस स्थापित करना इसी सहयोग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

शिक्षा और शोध में बढ़ेगा अंतरराष्ट्रीय सहयोग

इस दौरान किंग्स कॉलेज लंदन और नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन के बीच क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर भी हस्ताक्षर किए गए। इससे शिक्षा, अनुसंधान और नीति अध्ययन के क्षेत्र में दोनों देशों के सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है। साल 1881 में स्थापित लिवरपूल विश्वविद्यालय दुनिया के अग्रणी उच्च शिक्षण संस्थानों में से एक है। शिक्षण, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए इसकी वैश्विक पहचान है और इसे विश्व के शीर्ष विश्वविद्यालयों में गिना जाता है।

भारत में कैंपस स्थापित करने का उसका निर्णय भारतीय उच्च शिक्षा क्षेत्र की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा और सरकार द्वारा किए गए प्रगतिशील सुधारों में बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।

भारत बनेगा वैश्विक शिक्षा केंद्र

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में प्रतिष्ठित विदेशी विश्वविद्यालयों के आगमन से उच्च शिक्षा क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, शोध और नवाचार को नई गति मिलेगी तथा छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा देश में ही उपलब्ध हो सकेगी।

बेंगलुरु में लिवरपूल विश्वविद्यालय का नया परिसर न केवल भारतीय छात्रों के लिए अवसरों का विस्तार करेगा, बल्कि भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच शिक्षा सहयोग को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा। यह पहल भारत को वैश्विक शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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