इस पहल के तहत कंपनी ने ₹2 करोड़ की छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) की घोषणा की है, जिसका लाभ देशभर की उन छात्राओं को मिलेगा जो हेल्थकेयर शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहती हैं।
नई दिल्ली में की गई इस घोषणा के अनुसार, यह छात्रवृत्ति कार्यक्रम महिलाओं को स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विभिन्न शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करेगा। Virohan का लक्ष्य अधिक से अधिक युवा महिलाओं को तेजी से बढ़ते हेल्थकेयर सेक्टर का हिस्सा बनाना और उन्हें रोजगारोन्मुखी शिक्षा उपलब्ध कराना है।
छात्राओं को मिलेगी ₹50,000 से ₹2 लाख तक की स्कॉलरशिप
कंपनी ने बताया कि Virohan के माध्यम से किसी भी 4 से 5 वर्षीय बैचलर डिग्री प्रोग्राम या 1 वर्षीय यूनिवर्सिटी सर्टिफिकेट प्रोग्राम में दाखिला लेने वाली प्रत्येक पात्र छात्रा को ₹50,000 की स्कॉलरशिप दी जाएगी। यह राशि सीधे कोर्स फीस में समायोजित की जाएगी, जिससे प्रवेश के समय छात्राओं और उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ कम होगा।
इसके अलावा, शैक्षणिक प्रदर्शन के आधार पर अतिरिक्त मेरिट स्कॉलरशिप भी प्रदान की जाएगी। कक्षा 12वीं में 75 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाली छात्राओं को ₹1 लाख तक की छात्रवृत्ति मिलेगी, जबकि 90 प्रतिशत या उससे अधिक अंक हासिल करने वाली छात्राएं ₹2 लाख तक की स्कॉलरशिप पाने की पात्र होंगी।
हेल्थकेयर शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर फोकस
Virohan का कहना है कि यह पहल केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य हेल्थकेयर क्षेत्र में उपलब्ध विविध करियर अवसरों के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी है। कंपनी के अनुसार, भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रशिक्षित पेशेवरों की मांग लगातार बढ़ रही है और आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र लाखों रोजगार अवसर पैदा कर सकता है।
हालांकि अधिकांश छात्र और अभिभावक स्वास्थ्य क्षेत्र में करियर को केवल MBBS और NEET परीक्षा तक सीमित समझते हैं, लेकिन वास्तविकता इससे कहीं अधिक व्यापक है। देश के स्वास्थ्य कार्यबल का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा एलाइड हेल्थ और हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स का है, जिनमें फिजियोथेरेपिस्ट, रेडियोलॉजी टेक्नीशियन, ऑपरेशन थिएटर टेक्नीशियन, मेडिकल लैब विशेषज्ञ और अन्य क्लीनिकल सपोर्ट प्रोफेशनल्स शामिल हैं।
NEET के बिना भी बन सकता है हेल्थकेयर में करियर
कंपनी ने स्पष्ट किया कि हेल्थकेयर सेक्टर में सफल करियर बनाने के लिए NEET स्कोर अनिवार्य नहीं है। कक्षा 12वीं पास छात्र-छात्राएं विज्ञान सहित अन्य शैक्षणिक धाराओं से भी हेल्थकेयर शिक्षा कार्यक्रमों में प्रवेश ले सकते हैं। इन कोर्सों के माध्यम से छात्र रोजगारोन्मुखी कौशल प्राप्त कर सकते हैं और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में करियर बना सकते हैं।
Virohan का मानना है कि आज भी बड़ी संख्या में छात्राओं और उनके अभिभावकों को इन वैकल्पिक करियर विकल्पों की पर्याप्त जानकारी नहीं है। यही कारण है कि कंपनी छात्रवृत्ति के साथ-साथ जागरूकता अभियान पर भी विशेष ध्यान दे रही है, ताकि अधिक से अधिक युवा महिलाएं इस क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठा सकें।
महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
Virohan के,को-फाउंडर और सीटीओ नलिन सलूजा ने कहा कि हेल्थकेयर क्षेत्र न केवल उद्देश्यपूर्ण और सम्मानजनक करियर प्रदान करता है, बल्कि इसमें दीर्घकालिक विकास और रोजगार की भी अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में कुशल स्वास्थ्यकर्मियों की कमी महसूस की जा रही है और भारत के पास इस मांग को पूरा करने की बड़ी क्षमता है।
उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती अवसरों की कमी नहीं, बल्कि जानकारी की कमी है। कई छात्राओं को यह पता ही नहीं होता कि हेल्थकेयर क्षेत्र में NEET के अलावा भी अनेक करियर विकल्प मौजूद हैं। इसी अंतर को कम करने और महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए यह छात्रवृत्ति कार्यक्रम शुरू किया गया है।
20 से अधिक विश्वविद्यालयों में उपलब्ध होंगे कार्यक्रम
Virohan के साझेदार विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के माध्यम से छात्राएं देशभर के 20 से अधिक प्रतिष्ठित संस्थानों में हेल्थकेयर डिग्री और सर्टिफिकेट कार्यक्रमों में प्रवेश ले सकेंगी। इनमें UPES देहरादून, MIT University शिलांग, CMR University बेंगलुरु, KIET Ghaziabad, HRIT University, Lingaya’s Vidyapeeth, Silver Oak University अहमदाबाद और Vikrant University ग्वालियर जैसे संस्थान शामिल हैं।
कंपनी ने बताया कि वर्ष 2026 के प्रवेश सत्र के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इच्छुक छात्राएं और उनके अभिभावक Virohan की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से छात्रवृत्ति और हेल्थकेयर कार्यक्रमों के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल हेल्थकेयर शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और देश में कुशल स्वास्थ्य पेशेवरों की नई पीढ़ी तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।