इस कार्यक्रम में हजारों छात्रों ने भाग लिया, जहां उन्हें सीधे कंपनियों के साथ जुड़ने और अपने करियर को आगे बढ़ाने का मौका मिला। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य छात्रों को इंडस्ट्री से जोड़ना और उन्हें बेहतर करियर के अवसर उपलब्ध कराना था। जॉब मेले के दौरान छात्रों ने कंपनियों के प्रतिनिधियों से बातचीत की, इंटरव्यू दिए और कई छात्रों को मौके पर ही जॉब और इंटर्नशिप के ऑफर भी मिले, जिससे इस कार्यक्रम की सफलता साफ तौर पर नजर आई।
इस साल ‘अवसर 2026’ में कॉरपोरेट, स्टार्टअप, गैर-लाभकारी संगठन, कंसल्टिंग एजेंसियां और रिसर्च संस्थानों सहित विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में ग्रेजुएट और पोस्ट-ग्रेजुएट कोर्स के 4000 से अधिक छात्रों ने हिस्सा लिया, जो इसे और भी बड़ा और प्रभावी बनाता है।
कार्यक्रम के दौरान डीयू के कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह ने कहा कि "ऐसे जॉब मेले छात्रों के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं। उन्होंने बताया कि यह पहल शिक्षा और उद्योग के बीच एक मजबूत पुल का काम करती है, जिससे छात्रों को सही दिशा और बेहतर अवसर मिलते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ‘अवसर 2026’ छात्रों को आत्मविश्वास के साथ अपने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत करने में मदद करेगा।"
सीईओ एक्सपर्ट व्यू: इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि आज के समय में केवल डिग्री काफी नहीं है, बल्कि स्किल्स और प्रैक्टिकल अनुभव भी उतने ही जरूरी हैं। ऐसे जॉब मेले छात्रों को रियल वर्ल्ड एक्सपोजर देते हैं और उन्हें कॉर्पोरेट माहौल के लिए तैयार करते हैं। यह प्लेटफॉर्म कंपनियों को सही टैलेंट खोजने और छात्रों को सही अवसर पाने में मदद करता है।
डीयू पिछले कुछ वर्षों से लगातार जॉब मेलों का आयोजन कर रहा है और ‘अवसर 2026’ उसी दिशा में एक मजबूत कदम है। विश्वविद्यालय का लक्ष्य है कि भविष्य में ऐसे आयोजनों को और बड़ा बनाया जाए, ताकि ज्यादा से ज्यादा छात्रों को कैंपस प्लेसमेंट का लाभ मिल सके।
स्टूडेंट वेलफेयर डीन प्रोफेसर रंजन त्रिपाठी ने कहा कि इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सभी संस्थानों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने बताया कि ऐसे आयोजनों से छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ता है और उन्हें व्यावसायिक दुनिया को समझने का मौका मिलता है।
कुल मिलाकर, ‘अवसर 2026’ यह साबित करता है कि दिल्ली विश्वविद्यालय अपने छात्रों के करियर निर्माण और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।