विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के सलाहकार तरुण कपूर ने संकेत दिया कि केंद्र सरकार इलेक्ट्रिक ट्रकों को बढ़ावा देने के लिए एक बड़े सपोर्ट कार्यक्रम की तैयारी कर रही है। यह पहल PM E-Drive योजना के तहत चल रहे शुरुआती पायलट प्रोजेक्ट के बाद लाई जाएगी।
तरुण कपूर ने कहा कि भारत की ऊर्जा परिवर्तन यात्रा में माल परिवहन क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका होगी, क्योंकि देश में डीजल की खपत पेट्रोल की तुलना में लगभग दोगुनी है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक ट्रकों का बाजार अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन आने वाले वर्षों में इसमें तेज़ी से वृद्धि होने की संभावना है।
उन्होंने बताया कि PM E-Drive योजना के तहत लगभग 5,000 से 6,000 इलेक्ट्रिक ट्रकों को समर्थन देने का लक्ष्य रखा गया है। इसे एक पायलट परियोजना के रूप में शुरू किया गया है, जिसके बाद सरकार बड़े स्तर की योजना लेकर आएगी।
सरकार ने 3.5 टन से 55 टन तक के ग्रॉस व्हीकल वेट (GVW) वाले इलेक्ट्रिक ट्रकों के लिए 500 करोड़ रुपये की सब्सिडी निर्धारित की है। योजना के तहत बैटरी क्षमता के आधार पर प्रति किलोवाट-घंटा 5,000 रुपये तक की सहायता दी जाती है, जो वाहन की एक्स-फैक्ट्री कीमत के 10 प्रतिशत तक सीमित है।
N2 श्रेणी के इलेक्ट्रिक ट्रकों को अधिकतम 2.7 लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि मिल सकती है, जबकि 7.5 टन से 12 टन GVW वाले ट्रकों के लिए यह राशि 3.6 लाख रुपये तक है। सब्सिडी प्राप्त करने के लिए खरीदारों को अपने पुराने वाहन को स्क्रैप करना होगा और डिपॉजिट सर्टिफिकेट प्रस्तुत करना होगा।
हालांकि योजना के तहत अब तक केवल कुछ ही इलेक्ट्रिक ट्रकों की बिक्री हुई है। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार उच्च प्रारंभिक लागत, सीमित प्रोत्साहन, वाहन स्क्रैपिंग की अनिवार्यता और फ्लीट ऑपरेटरों की चिंताओं के कारण इस श्रेणी में इलेक्ट्रिफिकेशन की गति अपेक्षाकृत धीमी रही है।
कपूर ने कहा कि हाल ही में दिल्ली-एनसीआर में पुराने ट्रकों और बसों को इलेक्ट्रिक तथा सीएनजी वाहनों से बदलने के लिए स्वीकृत योजना भी इलेक्ट्रिक ट्रकों की तैनाती को गति देगी।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर उन्होंने बताया कि सरकार ने देशभर में लगभग 60 राजमार्गों की पहचान की है, जहां चार्जिंग सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहनों को सभी श्रेणियों में तेजी से अपनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उनके अनुसार इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर तुरंत बड़े पैमाने पर अपनाए जा सकते हैं, जबकि टू-व्हीलर क्षेत्र में लागत कम करने और नए वित्तीय मॉडल विकसित करने की आवश्यकता है।
पैसेंजर कार सेगमेंट पर बोलते हुए कपूर ने कहा कि वाहन निर्माताओं ने नए मॉडलों के जरिए उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प दिए हैं, लेकिन किफायती कीमत और बेहतर चार्जिंग नेटवर्क सुनिश्चित करने के लिए अभी और प्रयासों की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के हालिया आह्वान के बाद इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में वृद्धि देखी गई है, जो एक सकारात्मक संकेत है। हालांकि भारत को अपने इलेक्ट्रिक वाहन बाजार की वृद्धि की गति को कम से कम दस गुना बढ़ाने की आवश्यकता है।