इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का वैश्विक हब बन सकता है भारत: शैलेश चंद्रा

इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का वैश्विक हब बन सकता है भारत: शैलेश चंद्रा

इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का वैश्विक हब बन सकता है भारत: शैलेश चंद्रा
टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के एमडी शैलेश चंद्रा ने कहा कि इलेक्ट्रिक और सस्टेनेबल मोबिलिटी भारत को वैश्विक हब बनाने का बड़ा अवसर है।

टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के मैनेजिंग डायरेक्टर शैलेश चंद्रा ने कहा कि ऑटोमोटिव सेक्टर में चल रहा परिवर्तन भारत को इलेक्ट्रिक और सस्टेनेबल मोबिलिटी का वैश्विक केंद्र बनाने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। वह ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) द्वारा आयोजित SIAT 2026 में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे।

चंद्रा ने इलेक्ट्रिफिकेशन को “बाधा नहीं, बल्कि अवसर” बताते हुए कहा कि स्वच्छ मोबिलिटी की ओर संक्रमण भारत को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, उन्नत मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन का केंद्र बना सकता है। इसके लिए मजबूत सप्लाई चेन, नीतिगत समन्वय और उद्योग अकादमिक सहयोग अहम भूमिका निभाएंगे।

उन्होंने कहा कि भारतीय ऑटो उद्योग इस समय तीन बड़े बदलावों सस्टेनेबिलिटी, सुरक्षा और तेज़ तकनीकी विकास के चौराहे पर खड़ा है। इन परिवर्तनों को कैसे संभाला जाता है, यही वैश्विक मोबिलिटी पर भारत की भविष्य की भूमिका तय करेगा।

“सस्टेनेबिलिटी अब विकल्प नहीं, बल्कि एक तात्कालिक राष्ट्रीय चुनौती है,” चंद्रा ने कहा। उन्होंने जोर दिया कि भारत की तेज़ आर्थिक वृद्धि और बढ़ती मोबिलिटी आवश्यकताओं को स्वच्छ तकनीकों, कम उत्सर्जन और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने के साथ संतुलित करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि शून्य-उत्सर्जन मोबिलिटी की ओर बढ़ना एक समग्र प्रणालीगत बदलाव है, जिसमें पूरे ऑटोमोटिव इकोसिस्टम की भागीदारी जरूरी है।

सुरक्षा के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि बीते दशक में मजबूत वाहन संरचनाओं, बेहतर रेस्ट्रेंट सिस्टम और वैश्विक सुरक्षा मानकों को अपनाने से काफी प्रगति हुई है। हालांकि, अगला चरण दुर्घटनाओं को रोकने पर केंद्रित होना चाहिए, जिसके लिए एक्टिव सेफ्टी और ड्राइवर-असिस्टेंस तकनीकों का व्यापक उपयोग आवश्यक है। उन्होंने भरोसेमंद और पारदर्शी परीक्षण ढांचे की अहमियत पर भी जोर दिया।

तकनीकी बदलावों पर बात करते हुए चंद्रा ने कहा कि भारतीय ग्राहक अब अधिक जागरूक और डिजिटल रूप से सक्षम हो रहे हैं, जिससे सभी सेगमेंट, यहां तक कि एंट्री-लेवल वाहनों में भी उन्नत तकनीक, कनेक्टिविटी और सुरक्षा की मांग बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि वाहन अब मैकेनिकल उत्पादों से सॉफ्टवेयर-डिफाइंड मशीनों में बदल रहे हैं, जहां सॉफ्टवेयर यूज़र अनुभव और वाहन के पूरे जीवनचक्र में सुधार को सक्षम बनाता है।

आगे की ओर देखते हुए, चंद्रा ने कहा कि भारत की ऑटोमोटिव ग्रोथ स्टोरी मजबूत बनी हुई है। इलेक्ट्रिफिकेशन, उच्च सुरक्षा मानक और सॉफ्टवेयर-आधारित वाहनों की ओर बदलाव विकास के संकेत हैं, न कि बाधाएं। उन्होंने कहा कि इस परिवर्तन को सफलतापूर्वक संभालने के लिए मजबूत साझेदारियों, निरंतर क्षमता निर्माण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उभरती तकनीकों के समझदारीपूर्ण उपयोग की आवश्यकता होगी।

Subscribe Newsletter
Submit your email address to receive the latest updates on news & host of opportunities