भारत को सिर्फ ग्रेजुएट छात्र नहीं, बल्कि भविष्य के लिए तैयार युवा चाहिए : प्रो. कीयूर पुराणी

भारत को सिर्फ ग्रेजुएट छात्र नहीं, बल्कि भविष्य के लिए तैयार युवा चाहिए : प्रो. कीयूर पुराणी

भारत को सिर्फ ग्रेजुएट छात्र नहीं, बल्कि भविष्य के लिए तैयार युवा चाहिए : प्रो. कीयूर पुराणी
प्रो. पुराणी का मानना है कि भविष्य की शिक्षा का उद्देश्य केवल छात्रों को नौकरी के लिए तैयार करना नहीं, बल्कि उन्हें बदलती दुनिया के अनुरूप सीखने, नेतृत्व करने और नवाचार करने की क्षमता से लैस करना है।


प्रो. कीयूर पुराणी, Prestige University, इंदौर के कुलपति हैं और उच्च शिक्षा, प्रबंधन, उद्योग-शिक्षा सहयोग (Industry-Academia Collaboration) तथा शैक्षणिक नवाचार के क्षेत्र में दो दशकों से अधिक का अनुभव रखते हैं। उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय ने उद्योग-केंद्रित शिक्षा, अनुभवात्मक (Experiential) लर्निंग, बहुविषयक (Multidisciplinary) शिक्षा और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप अकादमिक मॉडल विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया है।

हाल ही में Prestige University का 32 एकड़ का अत्याधुनिक कैंपस Architizer A+ Awards 2026 में Higher Education & Research Facilities श्रेणी में Jury Winner चुना गया, जिसने विश्वविद्यालय को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई। प्रो. पुराणी का मानना है कि भविष्य की शिक्षा का उद्देश्य केवल छात्रों को नौकरी के लिए तैयार करना नहीं, बल्कि उन्हें बदलती दुनिया के अनुरूप सीखने, नेतृत्व करने और नवाचार करने की क्षमता से लैस करना है।

Entrepreneur Media के साथ इस विशेष बातचीत में उन्होंने भारत में उच्च शिक्षा की बदलती तस्वीर, रोजगार क्षमता (Employability), उद्योग और शिक्षा के बीच सहयोग, नई शिक्षा नीति (NEP 2020), अनुभवात्मक शिक्षा (Experiential Learning) और भविष्य के लिए छात्रों को तैयार करने में विश्वविद्यालयों की भूमिका पर विस्तार से अपने विचार साझा किए।

प्रश्न 1. भारत हर साल लाखों ग्रेजुएट तैयार करता है, लेकिन रोजगार क्षमता (Employability) अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। आपके अनुसार उच्च शिक्षा और उद्योग की अपेक्षाओं के बीच सबसे बड़ा अंतर क्या है?

उत्तर:
मुझे लगता है कि कई बार हम समस्या को सही तरीके से समझने के बजाय गलत सवाल पूछते हैं। अक्सर यह मान लिया जाता है कि रोजगार क्षमता बढ़ाने की पूरी जिम्मेदारी केवल विश्वविद्यालयों की है, जबकि वास्तविकता इससे अलग है। रोजगार क्षमता शिक्षा संस्थानों, उद्योग और स्वयं छात्र तीनों की साझा जिम्मेदारी है।

आजकल रोजगार क्षमता को केवल तकनीकी कौशल, सर्टिफिकेट और तुरंत नौकरी मिलने तक सीमित कर दिया गया है। यह सोच अधूरी है। आज कोचिंग संस्थान, एडटेक कंपनियां, सर्टिफिकेशन प्लेटफॉर्म और कॉर्पोरेट अकादमियां भी शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा बन चुके हैं। ये संस्थाएं बाजार की जरूरतों के अनुसार तेजी से काम करती हैं, लेकिन वे विश्वविद्यालयों का विकल्प नहीं हो सकतीं।

विश्वविद्यालयों का उद्देश्य केवल मौजूदा नौकरियों के लिए छात्रों को तैयार करना नहीं है। उन्हें ऐसे सक्षम नागरिक तैयार करने चाहिए, जो बदलती तकनीक, आर्थिक परिस्थितियों और करियर में आने वाले बदलावों के बीच भी खुद को लगातार प्रासंगिक बनाए रख सकें। वहीं उद्योग की भूमिका यह है कि वह विश्वविद्यालयों को भविष्य की जरूरतों, नई भूमिकाओं और वास्तविक समस्याओं से अवगत कराए। हालांकि पाठ्यक्रम तैयार करने की जिम्मेदारी शिक्षकों और शिक्षाविदों की ही होनी चाहिए।

प्रश्न 2. आप अक्सर Outcome-Driven Education की बात करते हैं। Prestige University अपने अकादमिक कार्यक्रमों को रोजगार क्षमता को ध्यान में रखते हुए किस तरह तैयार करता है?

उत्तर:
रोजगार (Employment) और रोजगार क्षमता (Employability) में बड़ा अंतर है। नौकरी मिल जाना रोजगार है, जबकि बदलती परिस्थितियों में लगातार अपनी उपयोगिता बनाए रखना रोजगार क्षमता है। शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी दिलाना नहीं, बल्कि छात्रों की क्षमता विकसित करना होना चाहिए।

Prestige University में हमारा लक्ष्य केवल प्लेसमेंट नहीं, बल्कि छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करना है। आज का समय "एक करियर पूरी जिंदगी" का नहीं, बल्कि "पूरी जिंदगी कई करियर" का है। इसलिए शिक्षा में लचीलापन (Flexibility) बेहद जरूरी हो गया है।

इसी सोच के तहत हमने MPLO (Multi-Path Learning Opportunities) मॉडल विकसित किया है। इसके माध्यम से छात्रों को अलग-अलग विषयों, कौशलों और करियर विकल्पों को समझने और अपनाने का अवसर मिलता है। जब हम कोई नया कार्यक्रम तैयार करते हैं, तो सबसे पहले यह तय करते हैं कि इस कोर्स से निकलने वाला छात्र किस तरह की क्षमताओं वाला होना चाहिए। इसके बाद उसी के अनुसार पाठ्यक्रम, प्रोजेक्ट, इंटर्नशिप और सीखने की पूरी प्रक्रिया तैयार की जाती है।

प्रश्न 3. आप अक्सर कहते हैं कि डिग्री प्रोग्राम को रोजगार के परिणामों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जाना चाहिए। इसका व्यावहारिक अर्थ क्या है?

उत्तर:
इस विचार को कई लोग गलत समझ लेते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि उद्योग या टेक्नोलॉजी कंपनियां विश्वविद्यालयों का पाठ्यक्रम तय करें। विश्वविद्यालयों को उद्योग की जरूरतों को समझना चाहिए, लेकिन शिक्षा का स्वरूप तय करना शिक्षकों का काम है।

हम सबसे पहले यह तय करते हैं कि छात्र के अंदर कौन-कौन सी क्षमताएं विकसित होनी चाहिए। जैसे-विश्लेषणात्मक सोच, प्रभावी संवाद, समस्या समाधान, टीमवर्क, नैतिक निर्णय लेने की क्षमता और बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की योग्यता।

इसके बाद इन्हीं क्षमताओं के आधार पर विषय, प्रोजेक्ट, इंटर्नशिप और मूल्यांकन प्रणाली तैयार की जाती है। Prestige University में हमारे Dean Academics ने 21वीं सदी के आवश्यक कौशलों को विभिन्न शिक्षण विधियों से जोड़ते हुए एक विशेष Faculty Playbook भी तैयार किया है, जिससे शिक्षक अपने विषयों में बेहतर लर्निंग मॉड्यूल विकसित कर सकें।

प्रश्न 4. नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 को आप किस नजरिए से देखते हैं? क्या संस्थान इसकी भावना के अनुरूप बदलाव कर पाए हैं?

उत्तर:
नई शिक्षा नीति ने उच्च शिक्षा की सोच और भाषा दोनों को बदला है। अब विश्वविद्यालय बहुविषयक शिक्षा, लचीले पाठ्यक्रम और छात्र-केंद्रित शिक्षा की बात कर रहे हैं। लेकिन असली चुनौती इन विचारों को व्यवहार में उतारने की है। सिर्फ कुछ वैकल्पिक विषय जोड़ देने से शिक्षा बहुविषयक नहीं बन जाती और न ही अधिक विकल्प देने से वास्तविक लचीलापन आता है। जरूरत पूरी शिक्षा यात्रा को नए तरीके से डिजाइन करने की है।

Prestige University का MPLO मॉडल भी इसी सोच का परिणाम है। हमारा प्रयास है कि छात्रों को अपनी शिक्षा यात्रा तय करने की अधिक स्वतंत्रता मिले, लेकिन अकादमिक गुणवत्ता और गंभीरता से कोई समझौता न हो। मेरा मानना है कि अभी भी कई संस्थान केवल नीति का पालन कर रहे हैं, जबकि उन्हें इसके अवसरों का पूरा लाभ उठाना चाहिए।

प्रश्न 5. पुराने विश्वविद्यालयों की तुलना में Prestige University जैसे नए संस्थानों के क्या फायदे और चुनौतियां हैं?

उत्तर:
पुराने विश्वविद्यालयों के पास मजबूत प्रतिष्ठा, बड़ा पूर्व छात्र नेटवर्क और समाज का विश्वास होता है। यह उनकी सबसे बड़ी ताकत है। दूसरी ओर, नए विश्वविद्यालयों के पास नए प्रयोग करने और तेजी से बदलाव लागू करने की स्वतंत्रता होती है। वे पुरानी व्यवस्थाओं से बंधे नहीं होते।


लेकिन नई संस्थाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी विश्वसनीयता बनाना है। मैं हमेशा कहता हूं कि पुराने संस्थानों के लिए सबसे बड़ा खतरा आत्मसंतुष्टि है, जबकि नए संस्थानों के लिए सबसे बड़ा खतरा केवल दूसरों की नकल करना है। हमारा लक्ष्य भविष्य की जरूरतों के अनुसार विश्वविद्यालय का नया मॉडल विकसित करना है।

प्रश्न 6. Prestige University अपने छात्रों को इंटर्नशिप, लाइव प्रोजेक्ट और उद्योग से जुड़ा व्यावहारिक अनुभव कैसे देता है?

उत्तर:

हम एक्सपोजर और वास्तविक अनुभव (Immersion) में स्पष्ट अंतर मानते हैं। केवल किसी उद्योग का दौरा करना या एक गेस्ट लेक्चर सुनना पर्याप्त नहीं है। छात्रों को वास्तविक परिस्थितियों में काम करना चाहिए। Prestige University में Experiential Learning हमारी शिक्षा का मुख्य आधार है। हमारे यहां एक समर्पित Immersive Learning Coach भी है, जो छात्रों के व्यावहारिक सीखने की प्रक्रिया को दिशा देता है।

हम छात्रों को लंबी अवधि की इंटर्नशिप, लाइव प्रोजेक्ट, इंडस्ट्री असाइनमेंट, बिजनेस सिमुलेशन, फील्ड प्रोजेक्ट, Theatre-Based Learning और LEGO Serious Play जैसी गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर देते हैं। हमारा मानना है कि छात्र केवल देखकर नहीं, बल्कि स्वयं काम करके और कभी-कभी असफल होकर भी सबसे बेहतर सीखते हैं।

प्रश्न 7. यदि भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों को रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए एक बड़ा बदलाव करना हो, तो वह क्या होना चाहिए?

उत्तर:
मेरे अनुसार सबसे बड़ा बदलाव यह होना चाहिए कि विश्वविद्यालय रोजगार क्षमता को केवल प्लेसमेंट सीजन तक सीमित न रखें।

हर डिग्री कार्यक्रम में यह स्पष्ट होना चाहिए कि छात्र कौन-कौन सी क्षमताएं विकसित करेंगे, उन्हें कहां अभ्यास का अवसर मिलेगा और उनका मूल्यांकन किस प्रकार किया जाएगा। वहीं जब विश्वविद्यालय छात्रों की क्षमता निर्माण पर योजनाबद्ध तरीके से काम करेंगे, तो रोजगार क्षमता अपने आप बेहतर होगी।

प्रश्न 8. Prestige University की भविष्य की योजनाएं क्या हैं? आप भारतीय उच्च शिक्षा के भविष्य को किस रूप में देखते हैं?

उत्तर:
Prestige University अभी एक युवा विश्वविद्यालय है और यही हमारी सबसे बड़ी ताकत भी है। हम लगातार यह सोचते हैं कि क्या विश्वविद्यालय उद्योग से जुड़े रहते हुए भी अकादमिक गुणवत्ता बनाए रख सकते हैं? क्या रोजगार क्षमता और जिज्ञासा साथ-साथ विकसित हो सकती है? क्या लचीलापन और शैक्षणिक गंभीरता एक साथ संभव हैं?

आने वाले वर्षों में हम भविष्य की तकनीकों से जुड़े नए विषय, अनुसंधान, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और MPLO जैसे मल्टी-पाथ लर्निंग मॉडल को और मजबूत करेंगे।

भारत को केवल अधिक डिग्रीधारकों की जरूरत नहीं है, बल्कि ऐसे विश्वविद्यालयों की आवश्यकता है जो शिक्षा को केवल प्रशिक्षण नहीं, बल्कि व्यक्तित्व और क्षमता निर्माण का माध्यम मानें। मेरा मानना है कि भविष्य की उच्च शिक्षा तभी सफल होगी, जब उद्योग वास्तविक समस्याएं लेकर आएगा, विश्वविद्यालय गहराई से समाधान विकसित करेंगे और छात्रों को सीखने व जिम्मेदारी निभाने के पर्याप्त अवसर मिलेंगे।


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