इस पहल का उद्देश्य देश के छात्रों को ड्रोन तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर डिजाइन और स्वदेशी हार्डवेयर इनोवेशन से जोड़ना है। नई दिल्ली स्थित इलेक्ट्रॉनिक्स निकेतन में आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर के छात्र, शिक्षाविद, सरकारी अधिकारी और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल हुए।
NIDAR 2.0 के तहत छात्रों को भारतीय VEGA प्रोसेसर पर आधारित स्मार्ट और पूरी तरह ऑटोनॉमस ड्रोन विकसित करने की चुनौती दी गई है। इस प्रतियोगिता में 65 लाख रुपये से अधिक की पुरस्कार राशि रखी गई है। इसके अलावा विजेता टीमों को स्टार्टअप इनक्यूबेशन, कॉर्पोरेट इंटर्नशिप, क्लाउड कंप्यूटिंग क्रेडिट, सॉफ्टवेयर सपोर्ट और तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जाएगा, ताकि छात्र अपने प्रोटोटाइप को व्यावसायिक उत्पाद में बदल सकें।
कार्यक्रम के दौरान MeitY के सचिव एस. कृष्णन ने NIDAR 2.0 की रूलबुक, पोस्टर और प्रॉब्लम स्टेटमेंट लॉन्च किया। इस अवसर पर मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एवं इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के सीईओ अमितेश कुमार सिन्हा, वैज्ञानिक-जी एवं समूह समन्वयक तुलिका पांडे तथा ड्रोन फेडरेशन इंडिया के अध्यक्ष स्मित शाह भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में नागरिक उड्डयन मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय, डीजीसीए, सशस्त्र बलों, शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग जगत के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
सचिव एस. कृष्णन बोले अब भारतीय छात्र बनाएंगे ‘ड्रोन का दिमाग’
इस मौके पर एस. कृष्णन ने कहा कि NIDAR 2.0 केवल छात्रों को ड्रोन उड़ाना नहीं सिखाता, बल्कि उन्हें ड्रोन का "दिमाग" विकसित करने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि जब ड्रोन का कंट्रोल सिस्टम भारत में विकसित VEGA प्रोसेसर पर चलेगा, तब देश विदेशी चिप डिजाइन और लाइसेंसिंग पर अपनी निर्भरता कम कर सकेगा। उन्होंने बताया कि VEGA प्रोसेसर को डिजिटल इंडिया RISC-V (DIR-V) कार्यक्रम के तहत विकसित किया गया है, जिसका उद्देश्य भारत में स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर तकनीक को बढ़ावा देना है।
इस बार NIDAR 2.0 को दो अलग-अलग ट्रैक में आयोजित किया जाएगा। पहला ट्रैक 'ड्रोन इनोवेशन' है, जिसमें छात्र टीमों को ऐसे पूरी तरह ऑटोनॉमस स्वार्म ड्रोन विकसित करने होंगे जो बिना किसी बाहरी संचार नेटवर्क के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में जीवित लोगों की पहचान कर सकें और जरूरत पड़ने पर मेडिकल सामग्री पहुंचा सकें। इसके साथ ही प्रतिभागियों को ऐसे GPS-रहित ड्रोन तैयार करने की चुनौती भी दी गई है, जो सीमित इनडोर क्षेत्रों में सुरक्षित रूप से उड़ान भरते हुए औद्योगिक निरीक्षण कर सकें।
दूसरा ट्रैक 'कंपोनेंट इनोवेशन' पर आधारित है। इसमें छात्र टीमों को स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स का उपयोग करते हुए VEGA प्रोसेसर आधारित फ्लाइट कंट्रोलर और ऑटोपायलट सिस्टम डिजाइन करना होगा। तकनीकी मूल्यांकन के बाद चयनित शीर्ष 100 टीमों को विकास, परीक्षण और इंटीग्रेशन के लिए दो-दो VEGA प्रोसेसर डेवलपमेंट किट उपलब्ध कराई जाएंगी।
VEGA प्रोसेसर से मिलेगा स्वदेशी ड्रोन तकनीक को नया आधार
VEGA प्रोसेसर, ओपन-स्टैंडर्ड RISC-V आर्किटेक्चर पर आधारित स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसरों की श्रृंखला है, जिसे सी-डैक (C-DAC) ने MeitY के माइक्रोप्रोसेसर डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत विकसित किया है। NIDAR 2.0 के माध्यम से छात्रों को पहली बार भारतीय चिप आधारित ड्रोन कंट्रोल सिस्टम तैयार करने का अवसर मिलेगा। इससे भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन, एम्बेडेड इलेक्ट्रॉनिक्स और एडवांस्ड ड्रोन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में नए इनोवेशन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
प्रतियोगिता के बढ़ते दायरे को देखते हुए इस वर्ष कुल पुरस्कार राशि 65 लाख रुपये से अधिक कर दी गई है। इसके अलावा विजेता टीमों को उद्योग जगत के साथ काम करने का अवसर, स्टार्टअप इनक्यूबेशन, क्लाउड कंप्यूटिंग संसाधन, तकनीकी सहायता और कॉर्पोरेट इंटर्नशिप भी दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य है कि छात्र केवल प्रतियोगिता तक सीमित न रहें, बल्कि अपने नवाचारों को स्टार्टअप और व्यावसायिक उत्पाद के रूप में विकसित कर सकें।
MeitY का मानना है कि नागरिक और रक्षा क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले ड्रोन की कई मूल तकनीकें समान होती हैं। ऐसे में NIDAR 2.0 के तहत विकसित समाधान 'आत्मनिर्भर भारत' और 'विकसित भारत @2047' के लक्ष्य को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यह पहल छात्रों को भविष्य की रक्षा, कृषि, आपदा प्रबंधन, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक निरीक्षण जैसी उभरती तकनीकों के लिए तैयार करेगी।
पहले संस्करण में 3,448 छात्रों ने लिया था हिस्सा
NIDAR का पहला संस्करण मार्च 2025 में शुरू किया गया था। इसमें 22 राज्यों, चार केंद्र शासित प्रदेशों और 109 शहरों के 3,448 छात्रों ने भाग लिया था। प्रतियोगिता के दौरान छात्रों ने आपदा प्रबंधन और सटीक खेती के लिए ऑटोनॉमस ड्रोन समाधान विकसित किए थे। इनमें से 93 टीमें ग्रैंड फिनाले तक पहुंचीं और 24 टीमों ने कुल 40 लाख रुपये की पुरस्कार राशि जीती। पहले संस्करण की सफलता के बाद NIDAR 2.0 को और अधिक तकनीकी, व्यावहारिक और उद्योग-केंद्रित बनाया गया है।
NIDAR 2.0, MeitY की SwaYaan पहल का हिस्सा है, जिसे जुलाई 2022 में मंजूरी दी गई थी। इस पहल के तहत पांच वर्षों में लगभग 89.87 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य देश में ड्रोन तकनीक के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार करना है। इस कार्यक्रम से आईआईएससी, आईआईटी, आईआईआईटी, एनआईटी, सी-डैक और एनआईईएलआईटी सहित 30 प्रमुख संस्थान जुड़े हुए हैं।
अब तक 51,000 से अधिक छात्रों, शिक्षकों और पेशेवरों को ड्रोन तकनीक का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसके साथ ही एमटेक कार्यक्रम, माइनर डिग्री, ऑनलाइन पाठ्यक्रम, अनुसंधान परियोजनाओं और पेटेंट गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि NIDAR 2.0 केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि भारत में ड्रोन, AI, रोबोटिक्स और सेमीकंडक्टर तकनीक के भविष्य को मजबूत करने वाली एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पहल है।