क्या AI और SDV बदलेंगे EV का भविष्य?

क्या AI और SDV बदलेंगे EV का भविष्य?

क्या AI और SDV बदलेंगे EV का भविष्य?
एआई और सॉफ्टवेयर-डिफाइंड व्हीकल (SDV) ईवी मोबिलिटी को स्मार्ट, सुरक्षित और कनेक्टेड बना रहे हैं, जिससे वाहन लगातार अपडेट होकर बेहतर परफॉरमेंस करेंगे।

पैनल चर्चा में सॉफ्टवेयर-डिफाइंड व्हीकल,  आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कनेक्टेड मोबिलिटी को ईवी ग्रोथ के नए प्रमुख ड्राइवरों के रूप में समझने पर विस्तार से चर्चा की गई। पैनल का संचालन ओज़ोन मोटर्स के को-फ़ाउंडर अजेश सकलेचा ने किया। चर्चा में जगुआर लैंड रोवर में लीड्स एसडीवी प्रोग्राम महेश मेडिडा वेंकट, वेक्टर इंफॉर्मेटिक इंडिया के एमडी और प्रेसिडेंट ब्रह्मानंद पाटिल, इलेक्ट्रोबिट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर साई श्रीधर, डीएफ-ओएस के फाउंडर और सीईओ रजत श्रीवास्तव, डीएफ-ओएस के फाउंडर और सीईओ रजत श्रीवास्तव, एयॉन-टेक सॉल्यूशंस लिमिटेड के सीबीओ जागृत गंडोत्रा ने हिस्सा लिया।

विशेषज्ञों ने बताया कि ईवी ने ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को एक नए डिजिटल युग में पहुंचा दिया है, जहां वाहन केवल हार्डवेयर उत्पाद नहीं, बल्कि सॉफ्टवेयर, डेटा, AI और कनेक्टिविटी से संचालित स्मार्ट प्लेटफॉर्म बन रहे हैं। Software-Defined Vehicles के जरिए वाहन पूरे जीवनचक्र के दौरान ओवर-द-एयर अपडेट, नए फीचर्स और बेहतर परफॉर्मेंस के साथ लगातार विकसित हो सकते हैं।

चर्चा में साइबर सिक्योरिटी, फंक्शनल सेफ्टी, डेटा प्राइवेसी और AI-आधारित प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। पैनल ने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य की मोबिलिटी में वाहन, OEM, सर्विस सेंटर, इंश्योरेंस कंपनियों और फ्लीट ऑपरेटरों के बीच डेटा और कनेक्टिविटी का मजबूत इकोसिस्टम महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, ईवी ने सॉफ्टवेयर-डिफाइंड व्हीकल के लिए एक नया प्लेटफॉर्म तैयार किया है। आने वाले समय में AI, डेटा एनालिटिक्स और साइबर सिक्योरिटी के बेहतर इस्तेमाल से वाहन अधिक सुरक्षित, स्मार्ट, कनेक्टेड और प्रेडिक्टिव बनेंगे, जिससे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की अगली पीढ़ी को नई दिशा मिलेगी।

सॉफ्टवेयर-डिफाइंड व्हीकल (SDV) में सॉफ्टवेयर की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है और इसकी सीमा कितनी होनी चाहिए?

जागृत गंडोत्रा: ईवी को आज “कंप्यूटर ऑन व्हील्स” कहा जा सकता है, क्योंकि ये वाहन बड़ी मात्रा में डेटा जनरेट करते हैं। इस डेटा का इस्तेमाल एनालिटिक्स और इनसाइट्स के लिए किया जा सकता है, लेकिन इसके साथ साइबर सिक्योरिटी का जोखिम भी बढ़ता है।

बैटरी में हेरफेर, चार्जिंग फ्रॉड, वाहन चोरी और ग्राहक के व्यवहार से जुड़े डेटा की चोरी जैसे खतरे सामने आ सकते हैं। इसलिए साइबर सिक्योरिटी को बाद में जोड़े जाने वाले फीचर के रूप में नहीं, बल्कि वाहन के आर्किटेक्चर का हिस्सा बनाकर डिजाइन किया जाना चाहिए।

क्या हमें सॉफ्टवेयर-डिफाइंड व्हीकल के बजाय सॉफ्टवेयर-डिफाइंड मोबिलिटी की ओर बढ़ना चाहिए?

रजत श्रीवास्तव: मैं Software-Defined Mobility की अवधारणा को ज्यादा व्यापक मानता हूं। EV के आने के बाद मोबिलिटी एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जहां वाहन सिर्फ एक उत्पाद नहीं, बल्कि एक बड़े डिजिटल इकोसिस्टम का हिस्सा बन रहा है।

भविष्य में वाहन, इंश्योरेंस प्रोवाइडर, फ्लीट मैनेजर और मोबिलिटी वैल्यू चेन के अन्य सभी हिस्से आपस में जुड़ सकते हैं। इन सभी को एक साथ जोड़कर ग्राहक के लिए बेहतर सेवाएं और अधिक वैल्यू तैयार की जा सकती है।

ईवी को सॉफ्टवेयर-डिफाइंड व्हीकल के लिए सबसे उपयुक्त प्लेटफॉर्म क्यों माना जा रहा है?

साई श्रीधर: ईवी एक डिजिटल-नेटिव सिस्टम है। पारंपरिक ICE वाहनों में सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर को वाहन के निर्माण के समय तय कर दिया जाता था और उसके बाद वाहन अपने पूरे जीवनचक्र में लगभग उसी रूप में चलता था।

ईवी ने इस मॉडल को बदल दिया है। अब वाहन के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को सॉफ्टवेयर के माध्यम से पूरे जीवनचक्र के दौरान अपडेट और बेहतर किया जा सकता है। इसका मतलब है कि वाहन समय के साथ बेहतर होता रह सकता है।

Software-Defined Vehicle केवल वाहन के अंदर मौजूद सॉफ्टवेयर तक सीमित नहीं रहेगा। इसका वाहन के आसपास मौजूद पूरे डिजिटल इकोसिस्टम के साथ गहरा इंटरेक्शन होगा। ऐसे में साइबर सिक्योरिटी, डेटा और डिजिटल एसेट्स की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी।

ICE और EV वाहनों में सॉफ्टवेयर-डिफाइंड व्हीकल के संदर्भ में सबसे बड़ा अंतर क्या है?

ब्रह्मानंद पाटिल: आईसीई (ICE) वाहनों में भी काफी मात्रा में सॉफ्टवेयर मौजूद होता है, लेकिन वह मुख्य रूप से वाहन के निर्माण के समय विकसित और इंस्टॉल किया जाता है। ICE वाहन में टॉर्क या अन्य महत्वपूर्ण पैरामीटर को ओवर-द-एयर बदलना आसान नहीं होता, क्योंकि इसके लिए दोबारा होमोलोगेशन की आवश्यकता पड़ सकती है।

ईवी में पावरट्रेन अभी भी तेजी से विकसित हो रहा है। बैटरी तकनीक और इलेक्ट्रिक पावरट्रेन में लगातार सुधार हो रहा है। इसलिए वाहन को सॉफ्टवेयर अपडेट के माध्यम से लगातार बेहतर करने की जरूरत होती है।

ईवी में ओवर-द-एयर अपडेट, नए एप्लीकेशन और कनेक्टेड व्हीकल फीचर्स के माध्यम से वाहन को पूरे जीवनचक्र में अपग्रेड किया जा सकता है। यही कारण है कि EV को Software-Defined Vehicle के लिए एक बड़ा और महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म माना जा रहा है।

ओईएम के नजरिए से सॉफ्टवेयर-डिफाइंड व्हीकल ग्राहक अनुभव को किस तरह बदल रहा है?

महेश मेडिडा वेंकट: पहले ग्राहक का वाहन अनुभव वाहन की डिलीवरी के साथ शुरू और लगभग वहीं समाप्त हो जाता था। लेकिन Software-Defined Vehicle इस पूरे अनुभव को बदल रहा है।

अब वाहन समय के साथ पुराना होने के बजाय सॉफ्टवेयर अपडेट के माध्यम से बेहतर हो सकता है। ओवर-द-एयर अपडेट के जरिए नए फीचर्स जोड़े जा सकते हैं, सुरक्षा में सुधार किया जा सकता है और ग्राहक के ड्राइविंग अनुभव को बेहतर बनाया जा सकता है।

इसलिए SDV केवल नए फीचर्स जोड़ने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह वाहन के पूरे जीवनचक्र में ग्राहक अनुभव को लगातार बेहतर बनाने का तरीका है।

अगर वाहन चलाते समय सॉफ्टवेयर अपडेट में समस्या आ जाए तो क्या होगा?

साई श्रीधर: मोबाइल फोन में किसी ऐप में समस्या आने पर फोन को रीस्टार्ट किया जा सकता है। लेकिन वाहन में ऐसा करना संभव नहीं है। अगर ड्राइविंग के दौरान सिस्टम रीस्टार्ट हो जाए, तो यह गंभीर सुरक्षा जोखिम बन सकता है।

इसलिए ऑटोमोटिव सॉफ्टवेयर में एक मजबूत सेफ्टी लेयर जरूरी है। यह सुरक्षा केवल एप्लीकेशन स्तर पर नहीं, बल्कि हार्डवेयर, मिडिलवेयर और एप्लीकेशन की पूरी लेयर में होनी चाहिए।

वाहन के सॉफ्टवेयर को इस तरह डिजाइन किया जाना चाहिए कि किसी एक एप्लीकेशन की समस्या का असर वाहन के महत्वपूर्ण सुरक्षा और ड्राइविंग सिस्टम पर न पड़े।

ईवी में साइबर सिक्योरिटी और AI किस तरह वाहन सुरक्षा को बेहतर बना सकते हैं?

जागृत गंडोत्रा: एआई (AI) का उपयोग संभावित समस्याओं का पहले से पता लगाने के लिए किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, अगर बैटरी के प्रदर्शन में गिरावट आ रही है या भविष्य में किसी समस्या की संभावना है, तो सिस्टम ग्राहक को पहले ही इसकी जानकारी दे सकता है। इस तरह AI और डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल वाहन की विश्वसनीयता और सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है।

क्या वाहन हमेशा कनेक्टेड रहना चाहिए या केवल आवश्यकता के अनुसार सॉफ्टवेयर अपडेट होना चाहिए?

जागृत गंडोत्रा: यह पूरी तरह उपयोग के मामले पर निर्भर करता है। अगर ग्राहक के व्यवहार और ड्राइविंग पैटर्न से जुड़े डेटा का लगातार विश्लेषण करना है, तो वाहन का लगातार कनेक्टेड रहना जरूरी हो सकता है।

हालांकि, हर उपयोग के लिए हमेशा कनेक्टिविटी आवश्यक नहीं है। वाहन और ग्राहक की जरूरत के अनुसार कनेक्टिविटी और डेटा शेयरिंग को कस्टमाइज किया जा सकता है।

रजत श्रीवास्तव: मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र से सीख मिलती है कि डेटा स्ट्रीमिंग को मुख्य रूप से मशीन से क्लाउड की दिशा में रखा जा सकता है। वहीं, मशीन या सिस्टम में महत्वपूर्ण बदलाव करने के लिए Human-in-the-Loop मॉडल अपनाया जा सकता है। सॉफ्टवेयर अपडेट के लिए मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन, सुरक्षित स्थान और अन्य सुरक्षा शर्तों को अनिवार्य बनाया जा सकता है।

सॉफ्टवेयर अपडेट्स के दौरान सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाती है?

ब्रह्मानंद पाटिल: ऑटोमोटिव सेक्टर में सुरक्षा और साइबर सिक्योरिटी एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं। कोई भी सॉफ्टवेयर अपडेट करने से पहले कई तरह की सुरक्षा शर्तों की जांच की जाती है।

किसी भी महत्वपूर्ण कंट्रोलर को अपडेट करने से पहले यह सुनिश्चित किया जाता है कि वाहन सही स्थिति में हो। इंजन, पावरट्रेन और ब्रेकिंग जैसे महत्वपूर्ण सिस्टम में अपडेट के लिए अतिरिक्त सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू होते हैं।

वाहन में कनेक्टेड सिस्टम, टेलीमैटिक्स, Bluetooth, Apple CarPlay, Android Auto, USB और CAN, LIN तथा Ethernet जैसे कई संभावित एंट्री पॉइंट होते हैं। इसलिए साइबर सिक्योरिटी को कई स्तरों पर लागू करना जरूरी है।

ऑटोमोटिव साइबर सिक्योरिटी में एक “Onion-Peel” मॉडल अपनाया जाता है, जिसमें सुरक्षा की कई परतें होती हैं। साइबर हमले की स्थिति में भी यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि वाहन के महत्वपूर्ण सुरक्षा कार्य प्रभावित न हों।

प्रिवेंटिव, प्रेडिक्टिव और प्रिस्क्रिप्टिव मेंटेनेंस में एसडीवी और एआई  की क्या भूमिका है? वाहनों में प्रिवेंटिव, प्रेडिक्टिव और प्रिस्क्रिप्टिव मेंटेनेंस का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। AI और SDV इन तीनों स्तरों को किस तरह बेहतर बना सकते हैं?

महेश मेडिडा वेंकट: एसडीवी (SDV) के लिए अभी इंडस्ट्री में स्पष्ट और एकसमान मानक विकसित किए जा रहे हैं। जैसे ऑटोनॉमस ड्राइविंग में अलग-अलग स्तर तय हैं, उसी तरह SDV के लिए भी भविष्य में सुरक्षा और परिपक्वता के अलग-अलग स्तर तय किए जा सकते हैं। Functional Safety और Cybersecurity के मानक SDV के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। जैसे-जैसे तकनीक विकसित होगी, वाहन में सॉफ्टवेयर अपडेट और कनेक्टेड फीचर्स को अधिक सुरक्षित बनाया जा सकेगा।

रजत श्रीवास्तव: Preventive Maintenance लंबे समय से वाहनों में मौजूद है। नियमित सर्विसिंग और निर्धारित समय पर मेंटेनेंस इसका हिस्सा है। Predictive Maintenance के लिए बड़ी मात्रा में ऑपरेशनल डेटा की आवश्यकता होती है। इसमें RPM, वाइब्रेशन, तापमान और अन्य सेंसर डेटा के साथ-साथ वास्तविक फेलियर डेटा भी महत्वपूर्ण होता है।

बैटरी के मामले में Battery Passport भी बेहद महत्वपूर्ण है। बैटरी में किस प्रकार की सामग्री का इस्तेमाल हुआ है, उसमें कितनी रीसाइकल्ड सामग्री है और उसकी पूरी हिस्ट्री क्या है—इन सभी जानकारियों से बैटरी की स्थिति और भविष्य की संभावित समस्याओं का अधिक सटीक अनुमान लगाया जा सकता है।

Prescriptive Maintenance इससे एक कदम आगे है। इसमें केवल यह बताना पर्याप्त नहीं है कि वाहन में भविष्य में समस्या आ सकती है, बल्कि यह भी बताया जाता है कि उस समस्या को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए।

इसके लिए वाहन, सर्विस सेंटर, इंश्योरेंस प्रोवाइडर और पूरे मोबिलिटी इकोसिस्टम का आपस में जुड़ा होना जरूरी है। फिलहाल इंडस्ट्री Predictive Maintenance के स्तर पर आगे बढ़ रही है, लेकिन Prescriptive Maintenance तक पहुंचने के लिए डेटा इंटीग्रेशन और बेहतर कनेक्टिविटी की आवश्यकता होगी।

प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस में ड्राइवर और वाहन के उपयोग का डेटा कितना महत्वपूर्ण है?

साई श्रीधर: Predictive Maintenance केवल वाहन के सेंसर डेटा पर निर्भर नहीं करता। ड्राइवर का व्यवहार और वाहन का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है, यह भी बेहद महत्वपूर्ण है।

उदाहरण के लिए, वाहन लगातार भारी लोड के साथ पहाड़ी क्षेत्र में चल रहा है या नहीं, ड्राइवर किस तरह वाहन चला रहा है और वाहन पर कितना दबाव पड़ रहा है इन सभी पहलुओं से मेंटेनेंस की जरूरत का अनुमान लगाया जा सकता है।

फ्लीट वाहनों में यह डेटा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। वाहन के सेंसर डेटा, ड्राइवर के व्यवहार, रूट और ऑपरेशनल उपयोग को एक साथ मिलाकर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि किसी वाहन को कब मेंटेनेंस की आवश्यकता होगी।

हालांकि, डेटा प्राइवेसी भी एक महत्वपूर्ण पहलू है। व्यक्तिगत डेटा, OEM डेटा और अन्य प्रकार के डेटा के इस्तेमाल के लिए सही अनुमति और स्पष्ट नियम जरूरी हैं।

ईवी और कमर्शियल व्हीकल्स में AI और डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल किस तरह हो रहा है?

जागृत गंडोत्रा: आज कई ईवी और मोटर कंपनियां डेटा एनालिटिक्स टूल्स का व्यापक रूप से इस्तेमाल कर रही हैं। इन टूल्स के माध्यम से कंपनियां ग्राहक के व्यवहार और वाहन के प्रदर्शन को समझ रही हैं।

इस डेटा के आधार पर कंपनियां पारंपरिक प्रक्रियाओं की तुलना में अधिक तेजी से निर्णय ले पा रही हैं। विशेष रूप से कमर्शियल व्हीकल्स और फ्लीट ऑपरेशंस में इसका महत्व बहुत अधिक है, क्योंकि छोटी-सी दक्षता या लागत बचत भी बड़े स्तर पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है।

भविष्य में AI और एनालिटिक्स के माध्यम से वाहन के परफॉरमेंस, बैटरी हेल्थ, ड्राइवर बिहेवियर और ऑपरेशनल एफिशिएंसी को बेहतर तरीके से समझना संभव होगा।

निष्कर्ष

पैनल चर्चा से यह स्पष्ट हुआ कि ईवी ने ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को सॉफ्टवेयर-डिफाइंड व्हीकल और सॉफ्टवेयर-डिफाइंड मोबिलिटी के एक नए युग में पहुंचा दिया है। अब वाहन केवल एक हार्डवेयर उत्पाद नहीं रह गया है, बल्कि सॉफ्टवेयर, डेटा, AI, कनेक्टिविटी और साइबर सिक्योरिटी से जुड़ा एक लगातार विकसित होने वाला डिजिटल प्लेटफॉर्म बन रहा है।

विशेषज्ञों ने जोर दिया कि भविष्य के वाहनों में ओवर-द-एयर अपडेट, AI-आधारित प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स, साइबर सिक्योरिटी, डेटा इंटीग्रेशन और पूरे मोबिलिटी इकोसिस्टम की कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

हालांकि, इस विकास के साथ सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी। इसलिए SDV के विकास में केवल नए फीचर्स जोड़ना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, AI, साइबर सिक्योरिटी और फंक्शनल सेफ्टी को एक साथ विकसित करना होगा।

कुल मिलाकर, ईवी ने ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया है। आने वाले समय में वे वाहन जो लगातार सीखेंगे, अपडेट होंगे, समस्याओं का पहले से अनुमान लगाएंगे और पूरे मोबिलिटी इकोसिस्टम से जुड़े रहेंगे, वही भविष्य की स्मार्ट और सस्टेनेबल मोबिलिटी को आकार देंगे।

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