साल 2019 में शुरू हुई डिजिटल पहल ऑपरेशन डिजिटल बोर्ड ने 2026 तक सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा के विस्तार की दिशा में शानदार प्रगति की है। इसका उद्देश्य पारंपरिक ब्लैकबोर्ड और कागज़-कलम आधारित शिक्षण पद्धति को स्मार्ट डिजिटल बोर्ड, प्रोजेक्टर, कंप्यूटर और इंटरनेट आधारित शिक्षण सामग्री से बदलकर पढ़ाई को अधिक प्रभावी, रोचक और आधुनिक बनाना है।
डिजिटल शिक्षा का विस्तार
ऑपरेशन डिजिटल बोर्ड के तहत 2019 से अब तक सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम की संख्या लगातार बढ़ाई गई है। योजना के अनुसार हर स्कूल में कम से कम दो डिजिटल कक्षाएं स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया था। 2026 तक यह लक्ष्य लगभग पूरे देश में लागू किया जा चुका है, जिससे लाखों छात्रों को डिजिटल शिक्षा का लाभ मिला है।
इन डिजिटल कक्षाओं में स्मार्ट बोर्ड, प्रोजेक्टर, कंप्यूटर, तेज़ इंटरनेट और शिक्षण-संबंधी सॉफ्टवेयर की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। शिक्षक अब ऑडियो-वीडियो, एनीमेशन और इंटरैक्टिव प्रेजेंटेशन के माध्यम से जटिल विषयों को सरल और रोचक तरीके से पढ़ा सकते हैं। विज्ञान, गणित और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों में सिमुलेशन और 3D विज़ुअल्स छात्रों को बेहतर समझ प्रदान कर रहे हैं।
ट्रेनिंग प्रोग्रामों के माध्यम से शिक्षकों का प्रशिक्षण
सिर्फ डिजिटल उपकरण लगाना ही पर्याप्त नहीं था। इसके लिए शिक्षकों को भी डिजिटल टूल्स और स्मार्ट कक्षा संचालन के प्रशिक्षण दिए गए। राज्य और केंद्र सरकार के सहयोग से नियमित कार्यशालाओं और ट्रेनिंग प्रोग्रामों के माध्यम से शिक्षकों को तैयार किया गया। इससे उन्हें तकनीक का उपयोग आत्मविश्वास के साथ कक्षा में करने में मदद मिली।
ग्रामीण और शहरी स्कूलों में समान अवसर
ODB का एक प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण और शहरी स्कूलों के बीच डिजिटल अंतर को कम करना भी है। इससे अब ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को भी शहरों की तरह आधुनिक शिक्षण सामग्री और डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान ऑनलाइन शिक्षा की आवश्यकता ने डिजिटल बोर्डों के महत्व को और बढ़ा दिया।
ऑपरेशन डिजिटल बोर्ड योजना का लाभ और प्रभाव
ऑपरेशन डिजिटल बोर्ड ने सरकारी स्कूलों में शिक्षा को आधुनिक और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके लाभ और प्रभाव को निम्न बिंदुओं में समझा जा सकता है-
छात्रों की भागीदारी में वृद्धि: डिजिटल कक्षा में छात्रों की एक्टिव भागीदारी बढ़ी है। वे पढ़ाई में अधिक शामिल होते हैं और अपनी समझ दिखा पाते हैं।
सीखने में रुचि बढ़ी: इंटरैक्टिव क्विज़, वीडियो, ग्राफिक्स और एनीमेशन के माध्यम से सीखना अब अधिक रोचक और मनोरंजक हो गया है।
अनुभवात्मक (Experiential) सीखना: डिजिटल कंटेंट से सीखने की प्रक्रिया अनुभवात्मक बन गई है, जिससे छात्र विषयों को सिर्फ याद नहीं करते बल्कि समझते और महसूस करते हैं।
जटिल विषयों को आसान बनाना: गणित, विज्ञान और अन्य कठिन विषयों को सिमुलेशन और विज़ुअल टूल्स के जरिए आसानी से समझाया जा सकता है।
डिजिटल कौशल का विकास: छात्रों को डिजिटल उपकरणों और टेक्नोलॉजी का उपयोग सीखने का अवसर मिला, जो उनके भविष्य के लिए उपयोगी है।
शिक्षक और छात्र दोनों के लिए प्रभावी शिक्षण: डिजिटल बोर्ड के माध्यम से शिक्षण और सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी, आकर्षक और समग्र रूप से बेहतर हुई है।
नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप
नई शिक्षा नीति 2020 में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। ऑपरेशन डिजिटल बोर्ड इसी नीति का हिस्सा है। यह पहल न केवल शिक्षा के आधुनिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि सरकारी स्कूलों को तकनीक-सक्षम बनाकर शिक्षा को 21वीं सदी के अनुरूप तैयार कर रही है।
उद्देश्य: भविष्य में सभी कक्षाओं तक डिजिटल सुविधाओं का होगा विस्तार
सरकार की योजना है कि भविष्य में सभी कक्षाओं तक डिजिटल सुविधाओं का विस्तार किया जाए और अधिक से अधिक स्कूलों को तकनीक-सक्षम बनाया जाए। यदि यह पहल व्यापक स्तर पर सफल होती है, तो यह देश के करोड़ों छात्रों के लिए सीखने के अनुभव को पूरी तरह बदल सकती है।
साल 2019 में शुरू हुई ऑपरेशन डिजिटल बोर्ड योजना ने 2026 तक सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा के विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यह पहल भारत में आधुनिक, समावेशी और गुणवत्ता-आधारित शिक्षा की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो रही है। सही मायनों में ऑपरेशन डिजिटल बोर्ड केवल ब्लैकबोर्ड बदलने की योजना नहीं, बल्कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की एक व्यापक पहल है जिसका लक्ष्य है आधुनिक, समावेशी और गुणवत्ता-आधारित शिक्षा की दिशा में निर्णायक कदम है।