सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 से भारत के टेक इकोसिस्टम को मजबूती

सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 से भारत के टेक इकोसिस्टम को मजबूती

सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 से भारत के टेक इकोसिस्टम को मजबूती
केंद्रीय बजट 2026 में डीप-टेक, मैन्युफैक्चरिंग और राष्ट्रीय तकनीकी मिशनों के जरिए दीर्घकालिक क्षमता निर्माण पर जोर दिया गया है।

केंद्रीय बजट 2026 को प्रतिक्रियात्मक वित्तीय नीति से हटकर दीर्घकालिक क्षमता निर्माण की दिशा में एक निर्णायक कदम के रूप में देखा जा रहा है। बजट में डीप टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग, एमएसएमई और कैपिटल मार्केट्स को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, FY27 में भारत की नाममात्र जीडीपी के 4.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर को पार करने की उम्मीद और FY26 में रिकॉर्ड 11.1 लाख करोड़ रुपये के सार्वजनिक पूंजीगत व्यय के बीच सरकार ने अल्पकालिक उपभोग बढ़ाने के बजाय संस्थागत मजबूती को प्राथमिकता दी है।

बजट में सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष, स्वच्छ ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे राष्ट्रीय मिशनों के लिए निरंतर आवंटन नीति निरंतरता को दर्शाता है। यह उन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है जहां इनोवेशन साइकिल लंबी होती है और शुरुआती निवेश अधिक होता है। विशेष रूप से, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 का विस्तार, जिसमें उपकरण, सामग्री और फुल-स्टैक आईपी को शामिल किया गया है, यह संकेत देता है कि सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को टुकड़ों में नहीं बल्कि समग्र रूप से विकसित करने की आवश्यकता है।

कैपिटल-ए के फाउंडर और लीड इन्वेस्टर अंकित केडिया ने कहा कि यह बजट भारत की मैन्युफैक्चरिंग और डीप-टेक यात्रा में एक महत्वपूर्ण मोड़ को दर्शाता है। वहीं, स्पेशल इन्वेस्ट के फाउंडिंग पार्टनर विशेश राजाराम ने कहा कि बजट उभरती तकनीकों में दीर्घकालिक और क्षमता-निर्माण आधारित दृष्टिकोण को मजबूत करता है, जो डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए जरूरी है।

बजट 2026 में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और फाइबर कनेक्टिविटी पर भी विशेष जोर दिया गया है। वर्ष 2025 तक भारत में 95 करोड़ से अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ता होने के बावजूद ब्रॉडबैंड गुणवत्ता और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी असमान बनी हुई है। नई घोषणाओं का उद्देश्य इस अंतर को पाटना है, जिससे मैन्युफैक्चरिंग, रक्षा, स्वास्थ्य, जलवायु और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में स्टार्टअप्स बड़े पैमाने पर समाधान विकसित कर सकें।

विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक फंडिंग और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के इस संयोजन से निजी निवेशकों के लिए तकनीकी और बाजार जोखिम कम होंगे, जिससे शुरुआती और विकास दोनों चरणों में निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

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