कर्नाटक इनोवेशन एक्ट के तहत उभरती तकनीकों के लिए रेगुलेटरी सैंडबॉक्स को मंज़ूरी

कर्नाटक इनोवेशन एक्ट के तहत उभरती तकनीकों के लिए रेगुलेटरी सैंडबॉक्स को मंज़ूरी

कर्नाटक इनोवेशन एक्ट के तहत उभरती तकनीकों के लिए रेगुलेटरी सैंडबॉक्स को मंज़ूरी
इसका उद्देश्य नई और उभरती तकनीकों को एक ऐसे लचीले माहौल में परखने और विकसित करने की अनुमति देना है, जहां नियम थोड़े सरल हों।


कर्नाटक सरकार ने तकनीकी अनुसंधान और नई तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए अपने नवाचार अधिनियम के तहत एक नियामक सैंडबॉक्स बनाने की योजना बनाई है। इसका उद्देश्य नई और उभरती तकनीकों को एक ऐसे लचीले माहौल में परखने और विकसित करने की अनुमति देना है, जहां नियम थोड़े सरल हों।

कर्नाटक सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी, जैव प्रौद्योगिकी और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की सचिव डॉ. मंजुला एन ने कहा कि सरकार इस दिशा में एक ऐसा ढांचा तैयार कर रही है, जिससे नवाचार करने वालों को नए प्रयोग और शोध करने में मदद मिले। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में शासन व्यवस्था नई तकनीकों के अनुसार विकसित होती रहे।

डॉ. मंजुला ने यह बातें बेंगलुरु में आयोजित इंडिया डिजिटल समिट (IDS) के 20वें संस्करण के उद्घाटन कार्यक्रम में कही। यह दो दिवसीय सम्मेलन 29 और 30 जनवरी 2026 को आयोजित होगा। सम्मेलन का विषय है- 'भारत का एआई क्षण: बुद्धिमान अर्थव्यवस्था का लाभ उठाना'। यह कार्यक्रम AI इम्पैक्ट समिट 2026 से पहले आयोजित किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि कर्नाटक नवाचार अधिनियम के तहत सरकार एक ऐसा वातावरण बनाना चाहती है, जहां नई तकनीकों को बड़े स्तर पर लागू करने से पहले सुरक्षित तरीके से परीक्षण किया जा सके। इस सैंडबॉक्स से कई उभरती तकनीकों को समर्थन मिलेगा और नवाचार को गति मिलेगी।

डॉ. मंजुला के अनुसार, तेजी से बदलती तकनीकों के साथ तालमेल बनाए रखने और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ऐसे मॉडल बहुत जरूरी हैं।

उन्होंने भारत के एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) इकोसिस्टम में कर्नाटक की भूमिका के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में एआई से जुड़ी कुशल प्रतिभाओं की बड़ी संख्या है। यहां सरकार द्वारा समर्थित उत्कृष्टता केंद्र, जाने-माने शोध संस्थान और एक मजबूत व विकसित स्टार्टअप इकोसिस्टम मौजूद है। इन सभी कारणों से कर्नाटक देश की एआई क्षमताओं को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में हो रहे लगातार निवेश से जमीनी स्तर पर जरूरी तकनीकी क्षमताएं विकसित हो रही हैं, जो राष्ट्रीय स्तर के एआई ढांचे के निर्माण के लिए बेहद जरूरी हैं। इसके अलावा, एक्सेलेरेटर प्रोग्राम और डीप-टेक स्किलिंग जैसी पहलें युवाओं और पेशेवरों की तकनीकी क्षमता को और मजबूत कर रही हैं।

इस मौके पर इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (IAMAI) के चेयरमैन और बिलडेस्क के, को-फाउंडर श्रीनिवासु एमएन ने भारत की अर्थव्यवस्था में डिजिटल तकनीक की बढ़ती भूमिका पर बात की। उन्होंने कहा कि अब डिजिटल तकनीक देश की अर्थव्यवस्था की नींव बन चुकी है और हर क्षेत्र में विकास को आगे बढ़ा रही है।

उन्होंने बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म बहुत बड़े पैमाने पर काम करते हैं, इसलिए उनके लिए भरोसेमंद होना और नए तरीकों से काम करना उतना ही जरूरी है जितना तकनीकी विकास। एआई पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि असली सवाल यह नहीं है कि एआई को अपनाया जाएगा या नहीं, बल्कि यह है कि इसे जिम्मेदारी से, पारदर्शिता के साथ और समाज के हित में कैसे लागू किया जाए।

कार्यक्रम का उद्घाटन भाषण IAMAI के चेयरमैन डॉ. सुभो रे ने दिया। यह आयोजन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और मेक इन इंडिया के सहयोग से किया जा रहा है।

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