NEP ने विश्व पटल पर मजबूत की भारत की शैक्षिक पहचान: धर्मेंद्र प्रधान

NEP ने विश्व पटल पर मजबूत की भारत की शैक्षिक पहचान: धर्मेंद्र प्रधान

NEP ने विश्व पटल पर मजबूत की भारत की शैक्षिक पहचान: धर्मेंद्र प्रधान
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि नई शिक्षा नीति 2020 के लागू होने के बाद भारत की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है और इससे वैश्विक स्तर पर देश की पहचान और मजबूत हुई है।


केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का लक्ष्य है कि वर्ष 2047 तक, जब भारत अपनी आज़ादी के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब तक देश को एक विकसित राष्ट्र बनाया जाए और इस दिशा में शिक्षा सबसे बड़ा माध्यम है।

युवा शक्ति है भारत की ताकत

शिक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी युवा आबादी है। देश में बड़ी संख्या में युवा उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, नए विचारों पर काम कर रहे हैं और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर नवाचार कर रहे हैं। उन्होंने यह बातें नई दिल्ली में आयोजित ‘स्टडी इन इंडिया एजु डिप्लोमैटिक एन्क्लेव 2026’ कार्यक्रम में कहीं, जिसमें 50 से अधिक देशों के राजनयिकों ने भाग लिया।

यह सम्मेलन नई दिल्ली स्थित सुषमा स्वराज भवन में आयोजित किया गया था। इसमें विभिन्न देशों के राजदूत, उच्चायुक्त और प्रतिनिधि मौजूद रहे। इस अवसर पर मंत्री ने भारत की शिक्षा प्रणाली और उसके भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की।

भारत में खुलेंगे विदेशी विश्वविद्यालयों के परिसर

सरकार चाहती है कि दुनिया के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय भारत में अपने कैंपस स्थापित करें। इसके लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने पारदर्शी और समयबद्ध नियम बनाए हैं, ताकि विदेशी संस्थानों को भारत में आने में सुविधा हो।

शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, Australia, Italy, United Kingdom और United States के प्रमुख संस्थानों के आवेदनों को एक महीने के भीतर मंजूरी दी गई है। इससे भारतीय छात्रों को विदेश गए बिना ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

पढ़ाई का बदला स्वरूप

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 के बाद छात्रों को अब केवल एक विषय तक सीमित नहीं रहना पड़ता। वे अपनी रुचि के अनुसार अलग-अलग विषयों का चयन कर सकते हैं। इसके साथ ही कौशल आधारित शिक्षा पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि पढ़ाई केवल डिग्री तक सीमित न रहे, बल्कि रोजगार और आत्मनिर्भरता से भी जुड़ी हो।

वैश्विक सहयोग और नई तकनीक पर जोर

सम्मेलन में भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक मंच तक पहुंचाने, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नई तकनीकों के उपयोग, तथा कौशल शिक्षा को अंतरराष्ट्रीय स्तर से जोड़ने जैसे विषयों पर चर्चा हुई। मंत्री ने कहा कि शिक्षा देशों को जोड़ने का माध्यम है और शोध व ज्ञान का आदान-प्रदान ही सच्ची साझेदारी बनाता है। उन्होंने सभी देशों के प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे अपने छात्रों और संस्थानों को भारत से जोड़ें। भारत अब केवल शिक्षा प्राप्त करने का स्थान नहीं, बल्कि एक उभरता हुआ वैश्विक शैक्षणिक केंद्र बनना चाहता है।

छात्रों के लिए उपलब्ध प्रमुख कोर्स

नई शिक्षा नीति के तहत भारत में कई आधुनिक और रोजगारोन्मुख कोर्स शुरू किए गए हैं, जिनमें प्रमुख हैं:

डेटा साइंस और साइबर सुरक्षा
स्किल-बेस्ड वोकेशनल कोर्स
स्टार्टअप और उद्यमिता अध्ययन
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग
भारतीय ज्ञान प्रणाली और संस्कृति अध्ययन

अंतरराष्ट्रीय स्तर के कोर्स और अवसर 

विदेशी विश्वविद्यालयों के सहयोग से अब भारत में निम्न क्षेत्रों में वैश्विक स्तर के कोर्स उपलब्ध कराए जा रहे हैं:

इंटरनेशनल बिज़नेस मैनेजमेंट
ग्लोबल पब्लिक पॉलिसी
एडवांस टेक्नोलॉजी और रोबोटिक्स
ग्रीन एनर्जी और सस्टेनेबल डेवलपमेंट
हेल्थ साइंसेज़ और बायोटेक्नोलॉजी

इन पहलों से स्पष्ट है कि भारत शिक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ वैश्विक नेतृत्व की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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